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एक डाक्टर होने के नाते मैं आपको एक सच्चाई बताना चाहता हूं

पर मुझे क्षमा कीजिए मैं अपना नाम और फोटो आप लोगो के साथ शेयर नही कर सकता
मैं इस समय कोलकाता के बहुत बड़े अस्पताल में डाक्टर हूं
इससे पहले बनारस न्यू दिल्ली लखनऊ में था
आज सुबह मेरे पास एक केस आता है जिसमे 54 साल की एक महिला थी जिसका हाथ फ्रेक्चर था
जल्दी जल्दी में उसे पेंकिलर का इंजेक्शन दिया और उसके घर वालो से सारे दस्तावेज पर साइन कराया इस दौरान हमारे फ्रेंडली स्टाफ उनसे उनकी डिटेल लेते हैं जैसे कैसे चोट लगी
समय क्या था परिवार में कितने सदस्य हैं
माता जी क्या करती हैं उनके बेटे क्या करते हैं
पहले कभी कोई ऐसी घटना हुई है
दवाई कौन कौन सी चल रही और परिवार एक एक कर के सारी जानकारी बता देता है
और उसे तुरंत भेज दिया जांच कराने के लिए
जिसमे xary कराया गया हाथ टूटने का और चेस्ट का
उसके बाद ब्लड टेस्ट हुआ जिसने लीवर किडनी थायराइड शुगर की जांच की गई
और अब बारी थी ECG करने की इसके ये सब करते करते 15000 का बिल बन जाता है
उनका बेटा कई लोगो से पूछता है की हाथ टूटने पर चेस्ट का एक्सरे और ecg क्यों
तो हम उसे बताते हैं उम्र ज्यादा है इस लिए, और सारी जांच की रिपोर्ट के बाद
हमने घर वालो को बताया की हाथ की स्थिति ठीक नहीं है जल्दी से जल्दी ऑपरेशन करना होगा
घर वाले घबरा गए और बोला जल्दी प्रोसेस शुरू कीजिए
उसने एक बार फिर सभी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए
हमने उन्हें बताया की 3 दिन का प्रोसेस है और ऑपरेशन में काम से कम 1 लाख 50000 का खर्च है और रूम bed दवाई का चार्ज अलग से हैं
जो 3 दिन का लगभग 50000 होगा परिवार सदमे में था
पर हमने उन्हें बताया की ये कितना जरूरी है
अगर बजट की समस्या है तो हम आप को किसी सरकारी अस्पताल में रेफर कर देंगे जिससे कम पैसे में आप का काम हो सके
अब परिवार को भरोसा नही होता है सरकारी अस्पताल पर और वो लोग पैसे का बंदोबस्त कर के अपनी माता जी को एडमिट करते हैं
और हम डॉक्टर अपना काम शुरू करते हैं दूसरे दिन ऑपरेशन कर के बिलकुल ठीक कर देते हैं
और माता जी को
आपको ये कहानी साधारण लग रहीं होगी लेकिन अब सुनिए
जब परिवार के दस्तावेज पर हस्ताक्षर हो रहे थे
हमने माता जी के परिवार वालों से बात कर के ये जाना की उनके घर कितने लोग है और क्या कमाते हैं
जिसका उद्देश्य उनकी हैसियत जानना था
हाथ टूटने पर सिर्फ हाथ का एक्सरे होता है बाकी सारी चीज जो 15000 में गई उसे हमारी भाषा में मिनिमम vital product बोलते हैं मतलब अगर कोई अस्पताल आता है तो उसका इतना बिल बनाना जरूरी है भले बीमारी मात्र 2 रुपए की गोली में ठीक हो जाए
इनके कैसे में ecg chest xray और ब्लड टेस्ट इसी कमाई को करने के लिए किया गया
हमने 1 lakah 50000 का खर्च बताया साथ में ये भी बोला को यदि बजट कम है तो सरकारी अस्पताल में रेफर कर दें
जिससे परिवार को भरोसा हुआ की हम लोग फालतू सलाह नही देते
और सरकारी अस्पतालों की ऐसी इमेज है जिसकी वजह से लोग वहां लोग जाने से डरते हैं
और इस तरह से जिस हाथ को मात्र 600 के एक्सरे और 300 के प्लास्टर
और 500 की दवाई से ठीक किया जा सकता था उसके लिए
हमने प्यार 2 लाख की कमाई की
और सामने वाले खुशी खुशी देते भी हैं
हमारी भाषा में इसे मेडिकल किडनैपिंग कहते हैं जो इतने प्यार से की जाती है की लोगो को पता भी नही चलता
मैं खुद एक गरीब घर से डॉक्टर बना हूं
पर प्राइवेट काम करने की वजह से मैं चाहते हुए भी किसी की सहायता ता नही कर सकता
क्यों की ये अस्पताल बड़े व्यापारी, और नेताओ द्वारा चलाए जाते हैं
इनका उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाना है और काली कमाई को सफेद करना है
इससे बचने का एक उपाय है और वह है की सरकारी अस्पताल में इलाज कराएं
क्यों की हम लोग सिर्फ 2 प्रतिशत बिगड़े हुए केस देखते हैं
बाकी 98 प्रतिशत लोग सही से स्वास्थ्य होके ही जाते हैं
वो भी मामूली से शुल्क पर
क्या आप लोगो के साथ ये जानकारी किसी तरह से सहायक होगी मुझे कमेंट कर के जरूर बताएं