448740580 779550617661599 2452028199490254015 n e1718789859454
गरिमा मैं मां को लेने स्टेशन जा रहा हूं मां आ रही हैं उनका फोन आया था… गौरव ऑफिस से फोन करके अपनी पत्नी गरिमा को बताया.. गरिमा को बड़ा आश्चर्य हुआ … इतने साल हो गए सासू मां कभी आई नहीं अचानक से आ गई क्या बात है ..
शायद मन बदल गया होगा …बेटा बहू से कब तक नाराज रहती ..
मन ही मन सोच कर गरिमा खुश हो रही थी ..
और जल्दी-जल्दी डिनर बनाने लगी ..
गरिमा अपने सासू मां के चरण स्पर्श की .
#ठीक है ठीक है खुश रहो गरिमा के सास बहुत बेरुखी से बोली ..
गरिमा की आंखों में आंसू अा गया और किचन में चली गई !!
अगले दिन गौरव की मां लता देवी अपने बेटे को बुलाकर बोली ..
देखो गौरव तुम्हारी सरकारी नौकरी है इतना तनख्वाह तो मिल जाता है कि तुम्हारा जीवन आराम से चल जाए ..
और रहने के लिए तुम्हें सरकारी आवास भी मिला है ।

अब तुम गांव की जमीन और मकान मेरे नाम से कर दो ..

मां आप ऐसे क्यों बोल रही है सब तो आप ही का है ..
इसीलिए तो बोल रही हूं जो मेरा है वह मेरे नाम कर दो ..
मां आप तो जानती ही हैं मकान पर लोन लेने के लिए ही मैं सब अपने नाम किया था …
ठीक है अब मेरे नाम कर दो मैं अपना संभाल लूंगी और जीते जी मैं बटवारा कर देना चाहती हूं लता जी बोली ..
गौरव कुछ बोलना चाहा लेकिन गरिमा ने उसे रोक लिया..
लता जी बेटे के सामने मकान का पेपर रख दी और बोली सिग्नेचर कर दो

..

जो आपको ठीक लगे मां…

गौरव समझ चुका था उसके और उसके परिवार के साथ बहुत बड़ा अनर्थ होने वाला है उसके सिर पर से छत छीलने वाला है..
गौरव पेपर पर सिग्नेचर कर दिया..
अगले दिन लता जी वापस कहां चली गई …
गौरव बहुत उदास था गरिमा समझने की कोशिश कर रही थी
गरिमा तुम नही जानती हो मैं अपनी मां और बहन के लिए कितना त्याग किया हूं…
15 साल की उम्र में पिताजी का साया सर से उठ गया ..मैं घर की पूरी जिम्मेदारी अपने कंधे पर ले लिया ..पढ़ाई के साथ-साथ में काम भी करता था…, मेरी मां और बहन को कोई तकलीफ ना हो इसके लिए मैं जी तोड मेहनत करता था …
मेरी मेहनत रंग लाई और मुझे सरकारी नौकरी मिल गई …जहां तुम दो मंजिला मकान देख रही हो वहां कभी एक कमरा हुआ करता था और हम सब उसी में रहते थे ..

जी तोड मेहनत करके मै मकान बनवाया

दोनों बहनों को हॉस्टल में रखकर अच्छी शिक्षा दिलवाई ताकि वह अपने पैरों पर खड़ी हो सके ..
मां की आंखों में कभी आंसू नहीं आने दिया
और आज वही मां मेरे सर पर से छत छीन कर ले गई …
क्या गलती थी मेरी ..
बस यही ना कि अपने मनपसंद की लडकी से शादी कर लिया..
दोनों बहनों की शादी करने के बाद 35 साल की उम्र में अपनी मनपसंद लड़की से शादी करने का तो अधिकार मुझे मिलना ही चाहिए था ..
लेकिन मां की नजर में यह भी गुनाह हो गया ..
मैंने कभी सोचा नहीं था कि मेरी मां और बहने इतना बदल जाएंगी!””
गरिमा…

मैं अपने बच्चों के लिए

कुछ सोचा ही नहीं ,
कुछ किया ही नहीं !!!
आप चिंता ना करें सब ठीक हो जाएगा थोड़ा-थोड़ा पैसा जमा करके एक छोटा सा घर ले लेंगे और आपकी पेंशन तो आएगी ना आराम से जीवन कट जाएगा …
नहीं गरिमा अब पेंशन नहीं मिलता है ..

पता नहीं अब मेरे परिवार का क्या होगा …

कुछ दिनों बाद पता चला कि लता जी ने प्रॉपर्टी दोनों बेटियों मे आधा-आधा बांट दी
और दोनों बहने खुशी-खुशी उस प्रॉपर्टी को अपने नाम करवा ली .., और भाई के बारे में रक्ति भर भी नहीं सोचा …
इस कलयुग में सब कुछ त्याग करने वाला हमेशा अकेला रह जाता है जिनके लिए त्याग करो उन्हें तो याद ही नहीं रहता कि उनके लिए उनके अपने ने कुछ किया है …
दोस्तों हमेशा बेटा ही गलत नहीं होता कभी-कभी मां भी बहुत गलत कर देती!!!
May be an image of 1 person and smiling