प्रयागराज। रोजी छिनी, रोटी का भी जुगाड़ नहीं रहा। लेकिन इसे नियति का खेल मानकर चुप हो गए। लेकिन लॉकडाउन के चलते कलकत्ता के अनवारूल को एक ऐसा गम मिला, जो जिंदगी भर नहीं मिटेगा। हर वक्त साथ रहने वाला भाई तो खोया ही, पत्नी की बहन की भी जिंदगी चली गई। बदनसीबी की इस मार की चोट ऐसी रही कि दो दिन के सफर में भी उसके आंसू लगातार बहते ही रहे।
कलकत्ता में मालगांव उत्तर दिनाजपुर का रहने वाला अनवारुल हरियाणा में रहकर शटरिंग का काम करता था। साथ में छोटा भाई सनवारुल(23), पत्नी व पत्नी की बहन अफरोजा(14) भी रहती थी। लॉकडाउन में काम-धंधा बंद हो गया। किसी तरह महीने भर गुजारा करने के बाद 27 अप्रैल को सभी बाइक से घर जाने के लिए निकले। एक बाइक पर पत्नी के साथ अनवारुल जबकि दूसरी बाइक पर उसका भतीजा बावुलहक, सनवारुल व अफरोजा सवार थीं। 28 अप्रैल की रात सभी थरवई के थानापुर गांव के पास बाइक डिवाइडर से टकराने के बाद सनवारुल व अफरोजा की मौत हो गई।
29 अप्रैल को पोस्टमार्टम के बाद दोनों के शव अनवारुल को सौंप दिए गए। फोन पर बातचीत में उसने बताया कि लाश ले जाने के लिए एंबुलेंस वाले ने 33 हजार रुपये मांगे। उसके पास सिर्फ 12 हजार रुपये थे जिसे उसने ड्राइवर को दे दिया। साथ ही बाकी के रुपये घर पहुंचने के बाद देने का वादा किया।
दो लाशों संग बृहस्पतिवार को 36 घंटे के बाद भी उसका सफर जारी था। फोन पर बातचीत करते हुए वह लगातार बिलखता रहा। यही कहता रहा कि भाई को लेकर लौटने की बात घरवालों से कही थी। अब उन्हें क्या मुंह दिखाऊंगा। ससुरालवालों ने अफरोजा की भी जिम्मेदारी दी थी। किस मुंह से उनके सामने जाऊंगा। अनवारुल की पत्नी ने बताया कि शुक्रवार सुबह 10 बजे तक घर पहुंचने की उम्मीद है। यह भी बताया कि रास्ते में अनवारुल की भी तबियत बिगड़ गई है। ऊपरवाले से यही दुआ कर रहे हैं किसी तरह घर पहुंच जाएं।

