लव जिहाद कानून से था डर ! अंतर धार्मिक विवाह करने वाले यूपी के जोड़े को दिल्ली हाईकोर्ट ने दी सुरक्षा
अंतर धार्मिक विवाह करने वाले उत्तर प्रदेश के एक जोड़े को दिल्ली हाईकोर्ट से सुरक्षा मिली है। मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने दिल्ली सरकार को यह आदेश दिया। हाल ही में उत्तर प्रदेश में गैर कानूनी तरीके से धर्मांतरण पर रोक से जुड़े उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश नामक कानून के पारित हो जाने के बाद इस जोड़े को प्रताड़ना का डर था।
जोड़े का कहना है कि लव जिहाद कानून पारित होने के बाद अंतर धार्मिक विवाह करने वालों के खिलाफ हो रहे उत्पीड़न की खबरों के बारे में जानकर हम अपने माता-पिता के घर को छोड़ने के लिए मजबूर हुए हैं। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अनु मल्होत्रा ने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के अनुसार दिल्ली सरकार से इस जोड़े के लिए एक सुरक्षित घर उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया।
कोर्ट में दी गई दलील के मुताबिक, 21 वर्षीय हिंदू युवती को शाहजहांपुर के एक कोचिंग सेंटर में 25 वर्षीय मुस्लिम युवक से मुलाकात हुई थी। दोस्ती के बाद दोनों प्यार में पड़ गए। धर्मांतरण न कराना पड़े इसलिए दोनों स्पेशल मैरेज एक्ट के तहत शादी करना चाहते थे। हालांकि माता-पिता और रिश्तेदारों ने दोनों के निर्णय का विरोध किया था।
वकील सौतिक बनर्जी और आकाश कामरा के माध्यम से दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि युवती के माता-पिता और रिश्तेदारों ने उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। उत्पीड़न के डर से यह जोड़ा 11 दिसंबर को दिल्ली पहुंचा और एक एनजीओ से संपर्क किया। अंतर धार्मिक जोड़े की तरफ से कोर्ट में पक्ष रखते हुए वकील वृंदा ग्रोवर ने कहा कि इस दंपति ने दिल्ली सरकार के समाज कल्याण विभाग से सुरक्षा की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि स्पेशल मैरेज एक्ट के तहत शादी करने और अपने संबंधित धर्मों को परिवर्तित नहीं करने की इच्छा रखने के बावजूद इन पर खतरा है।

