नई दिल्ली, 03 सितंबर ( दिल्ली के अलग-अलग स्थानों पर लगे 33 में 22 सीवेज
ट्रीटमेंट प्लांट मानकों पर खरे नहीं पाए गए हैं।
इसका मतलब है कि प्लांट सीवेज पानी को उतना
साफ नहीं कर पा रहे हैं, जितना उन्हें करना चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि एसटीपी के पानी को
अलग-अलग कार्यों में इस्तेमाल करने में ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है।
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति की हालिया रिपोर्ट में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की अक्षमता उजागर हुई
है। डीपीसीसी की जल प्रयोगशाला ने जुलाई में 35 में से 33 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से नमूने लिए थे।
इनमें से सिर्फ 11 एसटीपी के नमूने ही मानकों पर खरे पाए गए, बाकी 22 के नमूनों में खराबी
सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक,
22 प्लांट में कहीं पर शुद्दीकृत पानी में टीएसएस (टोटल सस्पेंडेड
सॉलिड) की मात्रा मानकों से ज्यादा है
तो कहीं पर बीओडी (बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड) मानकों
से अधिक है।
इसके चलते इन एसटीपी में शुद्धीकृत किए गए पानी को निर्धारित मानदंडों के अनुरूप
नहीं माना जा सकता है।
यहां मिली खराबी
महरौली, ओखला फेज दो, तीन, चार और पांच,
मोलरबंद, बसंत कुंज फेज एक और दो, कोंडली फेज
एक और फेज चार, यमुना फेज एक, दो और तीन, कोरोनेशन पिलर फेज एक और दो, नरेला,
रोहिणी, केशोपुर फेज एक, दो और तीन, नीलोठी,
पप्पनकलां फेज एक और नजफगढ़ स्थित सीवेज
ट्रीटमेंट प्लांट के नमूने अलग-अलग मानकों पर खरे नहीं उतरे।
ये प्लांट मानकों के अनुरूप
ओखला फेज छह, दिल्ली गेट नाला फेज एक और फेज दो,
चीला, कॉमनवेल्थ गेम्स विलेज, न्यू
कोरोनेशन पिलर, रिठाला फेज दो, नीलोठी फेज दो, पप्पनकलां फेज दो
और कापसहेड़ा के नमूने
मानकों के अनुरूप पाए गए हैं।
इसके अलावा, घिटोरनी एसटीपी के सैंपल नहीं लिए जा सके थे
जबकि, कोंडली फेज तीन का एसटीपी अभी परीक्षण की स्थिति में है।
क्या है मानक
सीवेज ट्रीटमेंट से शुद्ध पानी में टीएसएस यानी टोटल
सस्पेंडेड सॉलिड की मात्रा 10 मिली ग्राम प्रति
लीटर से कम, सीओडी (केमिकल ऑक्सीजन डिमांड) की मात्रा 50 मिली ग्राम से कम, बीओडी
(बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड) की मात्रा 10 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम, डिजॉल्व फास्फेट की
मात्रा दो मिलीग्राम प्रति लीटर से कम और अमोनिकल नाइट्रोजन की मात्रा दो मिलीग्राम से कम
होनी चाहिए। लेकिन, 33 में से 21 एसटीपी में इनमें से कोई न कोई अपने मानकों से ज्यादा पाया
गया है।

