T20230311128097

उपराष्ट्रपति महोदय द्वारा मेरठ में आयोजित प्रादेशिक आयुर्वेदिक सम्मेलन में दिए गए भाषण के प्रमुख अंश

मेरी पहली यात्रा को मुख्यमंत्री जी ने यादगार बना दिया। मेरे हेलीकॉप्टर को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में उतरवाया।

राज्यपाल महोदया से मेरा परिचय पुराना है। मैं आप सबको बता दूं कि  राज्यपाल महोदया की कलम बहुत मजबूत है।

इस प्रांत के मुख्यमंत्री जी सरल और सख्त अपने नाम के ही अनुरूप हैं।

मुख्यमंत्री जी ने सही कहा कि भारत ने एक बड़ी छलांग लगाई है।

UP is in news for right reasons. मन बहुत खुश हो जाता है जब लोग उत्तर प्रदेश की चर्चा करते हैं।

काफी समय से पहले मेरी रामदेव जी से मुलाकात हुई थी, मैंने उनसे कहा कि कोई ऐसा उपाय बताओ कि कोर्ट में दोनों पक्ष के वकील शांत मन से आयें।

आज आचार्य बालकृष्ण जी यहाँ उपस्थित हैं, प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य मौजूद हैं। राज्य सभा का सभापति होने के नाते मैं कुछ कहना चाहता हूं –  कि आप कोई ऐसी औषधि बनाएं ताकि संसद ही गरिमा ठीक रहे।

हमारी संविधान सभा ने 3 वर्षों तक अनेक जटिल और विभाजनकारी मुद्दों पर बहस की, उन्हें सुलझाया। लेकिन 3 वर्ष के लंबे समय में, कोई व्यवधान नहीं हुआ, कोई वेल में नहीं आया, कोई प्लेकार्ड नहीं दिखाये गए।

हमारा आचरण आज उसके  विपरीत है। हम लोकतंत्र के मंदिरों का इस तरह अनादर होते हुए नहीं देख सकते। We cannot allow temples of democracy to be outraged.

हम न केवल सबसे बड़े प्रजातंत्र हैं, हम लोकतंत्र की जननी भी हैं ।

देश हमेशा सबसे पहले है, और होना चाहिए। We are proud Indians and should take pride in our historic achievements.

आज देश की  सोच में बदलाव आ गया है, धारा में भी बदलाव आ गया है।

आज के दिन भारत कहां है, जो कभी सोचा नहीं था जिसकी कल्पना नहीं थी वो सब आज भारत में हो रहा है।

आज के विकास को देखो, आज भारत बदल गया है। भारत आज दुनिया का सबसे ज्यादा कार्यात्मक प्रजातंत्र है- पंचायत, म्युनिसिपलिटी, राज्य और केंद्र स्तर तक।

इसके बाद भी कुछ लोग नैरेटिव सेट करने के लिए आरोप लगाते हैं कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की संसद में माइक बंद कर दिया जाता है। इससे बड़ा असत्य और कुछ नहीं हो सकता।

आज राज्य सभा के सभापति होने के नाते मजबूरन मुझे कहना पड़ रहा है कि भारत की संसद में माइक बंद  नहीं होता। हां एक समय था, एक काला अध्याय था, वो आपतकाल का समय था।

जैसे भारत ने कोविड से निबटा है उसकी सम्पूर्ण विश्व मे प्रसंशा हुई है।

भारत ने अपनी वैक्सीन बनाई यह भी कुछ लोगों के गले नहीं उतरा।

आज हमने 220 करोड़ वैक्सीन की खुराकें दीं हैं, और उनकी डिजिटल मैपिंग की गई।

दुनिया ने योग की ताकत को देखा, पूरी दुनिया ने उसका समर्थन किया।

कोविड के दौरान आयुर्वेद ने अपनी क्षमता सिद्ध की।

हमारी संस्कृति का साफ  संदेश है कि पहला सुख निरोगी काया।

मुझे याद है जब मैं मंत्री था, हर सांसद को अधिकार था की वो साल में किसी को भी 50 गैस कनेक्शन 50 फोन कनेक्शन दे सकता है। आज स्थित देखिए।

आज देश की सरकार बड़ा सोचती है और उससे भी बड़ा करती है।

उत्तर प्रदेश के लोगों ने क्या कभी सोचा था कि कानून व्यवस्था ठीक हो पाएगी? लेकिन आज आप देख सकते हैं। लोगों ने मुख्यमंत्री के बारे में कहा था कि देखते हैं इनकी कानून व्यवस्था कब तक टिकेगी, लेकिन ये टिक गयी है, इस पौधे  की जड़ नीचे की ओर जा रही हैं।

हमारे आगे जो युवा शक्ति है वो तय करेगी कि भविष्य में हमारे देश की तस्वीर क्या होगी।

अब भारत के अंदर जो  शासन व्यवस्वथा है उसके केंद्र में एक ही चीज है – भारत का हित।

अब भारत की आवाज सुनी नहीं जाती है, बल्कि लोग इंतजार करते हैं कि भारत इस विषय पर क्या बोलेगा।

अब ये आपको तय करना  है कि आप आयुर्वेद को कहां तक ​​ले जाएंगे।

आज लाइफस्टाइल डिसीज़ की बात होती है। इसमें आयुर्वेद और परंपरागत चिकित्सा पद्धतियां बहुत प्रभावी हैं। यह वही बात हुई – “गली में छोरो गांव में ढिढोरो।”

मैने अपनी दो विदेश यात्राओं के दौरान देखा है कि जब मैं खुद का परिचय देता हूं तो लोग सम्मान की दृष्टि से देखते हैं, ये है आज के भारत की ताकत।

फिर भी कुछ लोग भारत को विदेश में बदनाम कर रहे हैं।

हमारा इतिहास हजारों साल पुराना है, हम एक महान राष्ट्र हैं, हमारे लोग महान हैं।

अंत में मैं बस इतना कहना चाहूंगा कि एक वातावरण तैयार कीजिए, संसद और विधान सभाओं में आचारण अनुकरणीय होना चाहिए। वहां व्यवधान नहीं होना चाहिए। पर ये कैसे होगा- इसके लिए आप सभी को जनांदोलन करना होगा। उन लोगों को जवाबदेह बनाना होगा जो इस महान देश की उपलब्धियों का निरादर करते हैं।

मुख्यमंत्री जी आपने मुझे आमंत्रित कर यह सुअवसर दिया, आपका बहुत बहुत धन्यवाद।