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इंश्योरेंस कंपनी ने अपने दायित्व से बचने के लिए लिया झूठ का सहारा

अब देने होंगे 66433 रुपए कोर्ट ने लगाया 15000 का जुर्माना साथ ही देनी होगी 7% वार्षिक ब्याज

अफसर अली इंडिया सावधान न्यूज

संभल/बहजोई /सम्भल निवासी पीयूष कुमार वार्ष्णेय ने अपने व अपने परिवार की सुरक्षा हेतु वर्ष 2016 में स्टार हैल्थ एंड एलॉयज इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड से ₹500000 तक की स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी क्रय की थी जिसका निरंतर प्रीमियम अदा करते रहे। इसी बीच निजी हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी नीवा भूपा हैल्थ इंश्योरेंस कंपनी के एजेंट ने पीयूष कुमार वार्ष्णेय से संपर्क किया और अपनी कंपनी की पॉलिसीयों की खूबियां बताई और बर्ष 2016 में क्रय की गई पॉलिसी को पोर्ट कराने के लिए कहा और बताया कि पूर्व बीमा कंपनी से अत्यधिक लाभ हमारी कंपनी से मिलेगा तथा वर्ष 2016 से पॉलिसी पर मिलने वाले नो क्लेम बोनस का लाभ भी मिल सकता है

पॉलिसी को पोर्ट कराने पर प्राप्त होगा इसी क्रम में पीयूष कुमार ने अपनी हैल्थ बीमा पॉलिसी को नीवा भूपा हैल्थ इंश्योरेंस कंपनी में पोर्ट करा लिया पोर्ट करने के उपरांत परिवादी की प्रश्न गत पॉलिसी 10 लाख रुपए तक ईलाज की हो गई 26जनवरी 2022 को पीयूष की पत्नी श्रीमती अजेता के अचानक पेट में दर्द हुआ जिन्हें निजी अस्पताल ले जाया गया निजी अस्पताल ने प्राथमिक उपचार करने के बाद हायर सेंटर ले जाने की सलाह दी जिस कारण उन्हें मुरादाबाद के निजी अस्पताल में ले जाकर भर्ती कराया गया इसकी सूचना उन्होंने बीमा कंपनी को भी दी थी

बीमा कंपनी ने इलाज पर व्यय हुई धनराशि को देने में टालमटोल की इसी दौरान पुनः उनकी पत्नी का स्वास्थ्य 2फरवरी 22 को खराब हो गया और मुरादाबाद उपचार के लिए ले जाया गया तथा इलाज पर हुए व्यय की धनराशि के संबंध में समस्त औपचारिकताएं परिवादी द्वारा पूर्ण की गई ओर बीमा कंपनी से 66433 रुपए का भुगतान दोनों बार कराए गए इलाज के सम्बन्ध में व्यय धनराशि की मांग बीमा कंपनी से की गई परंतु बीमा कंपनी द्वारा अजेता के इलाज पर व्यय धनराशि यह कहकर इंकार किया गया कि यह उनकी प्रथम बीमा पॉलिसी है जबकि वर्ष 2016 में पॉलिसी को क्रय किया गया था

और उसी पॉलिसी को ही पोर्ट कराया गया था परिवादी ने काफी प्रयास किया परंतु विपक्षी बीमा कंपनी ने नहीं सुना तब उन्होंने उपभोक्ता फोरम मामलों के विशेषज्ञ अधिवक्ता लव मोहन वार्ष्णेय से संपर्क किया और अपनी व्यथा बतायी तब लव मोहन वार्ष्णेय एडवोकेट द्वारा उनकी ओर से जिला उपभोक्ता आयोग जनपद संभल में एक परिवाद प्रस्तुत किया गया और आयोग ने विपक्षी को नोटिस निर्गत कर अपना जवाब दाखिल करने के लिए कहा तो विपक्षी बीमा कंपनी ने वही अपना पूर्व दिए जवाब को आयोग में प्रस्तुत किया वादी की ओर से लव मोहन वार्ष्णेय एडवोकेट ने आयोग को बताया कि प्रश्नगत बीमा पॉलिसी 2016 से क्रय करने के उपरांत निरंतर रूप से चल रही है तथा नो क्लेम बोनस का भी लाभ पोर्ट होने पर प्राप्त होने की संबंध में विपक्षी द्वारा बताया गया इसी कारण प्रश्नगत पॉलिसी को पोर्ट कराया गया

अब वह अपने दायित्वो से वह बच नहीं सकती आयोग ने दोनों की बहस सुनी और अपना आदेश विपक्षी बीमा कंपनी नींवा भूपा हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को आदेशित किया कि वह परिवादी पीयूष कुमार वार्ष्णेय को उसकी पत्नी श्रीमती अजेता के इलाज पर हुए व्यक्ति धनराशि 66433रु उस पर परिवाद संस्थान की तिथि से 7% वार्षिक ब्याज सहित अंदर 2 महा में अदा करें इसके अलावा परवादी को मुबलिग 10000 रुपए मानसिक कष्ट व आर्थिक हानि की मद में तथा ₹5000 बाद व्यय के मद में अदा करेगी।
नियत अवधि में धनराशि न अदा किये जाने की दशा में ब्याज 9% वार्षिक की दर से देय होगा