Kharge ने ‘अनघोषित आपातकाल’, ‘पपेट’ चुनाव आयोग के खिलाफ कांग्रेस की मोर्चा संभाला
प्रस्तावना: भारत में लोकतंत्र की साख पर संकट और कांग्रेस का जवाब
भारत में चुनाव प्रक्रिया का इतिहास बहुत पुराना है, और इसी पर हमारा लोकतंत्र टिका है। लेकिन अब सवाल उठा है—क्या चुनाव की स्वतंत्रता सुरक्षित है? सरकार और चुनाव आयोग के बीच बढ़ती टकराव ने इस सवाल को जोरदार बनाया है। कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन Kharge ने इस मुद्दे पर अपनी आवाज उठाई है। उनका संदेश साफ है—लोकतंत्र को कमजोर करने वाले खतरे को पहचानना जरूरी है। हम सभी के लिए यह जानना जरूरी है कि निष्पक्ष चुनाव होना क्यों जरूरी है। जब चुनाव सही तरीके से नहीं होते, तब जनता का विश्वास टूटता है और लोकतंत्र पर अंगूठा लग जाता है।
चुनाव आयोग की भूमिका और उसकी विश्वसनीयता पर सवाल
चुनाव आयोग की स्थापना एवं उसका संविधानिक महत्व
चुनाव आयोग भारत के संविधान का अभिन्न हिस्सा है। इसकी जिम्मेदारी है कि हर राउंड का चुनाव सही, निष्पक्ष और स्वतंत्र हो। इसकी स्थापना स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हुई थी, ताकि वोट की स्वतंत्रता और सत्यता बरकरार रहे। आयोग का काम है देश के हर नागरिक का मत सुरक्षित करना और चुनाव की प्रक्रिया साफ-सुथरी बनाना।
हाल के चुनावी घटनाक्रम और आयोग की निर्णय क्षमता
पिछले कुछ वर्षों में हुए चुनाव आयोग के फैसले कई बार विवादों में आए हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव ने भी विपक्षी दलों का भरोसा तोड़ा। विपक्ष का आरोप है कि आयोग पक्षपात कर रहा है। विपक्ष कहता है कि आयोग की फैसले राजनीतिक दलों का पक्ष घेत है। इससे चुनाव की साख पर काला धब्बा लगता है। जनता को यह भरोसा नहीं रहता कि वोट का सही व सही परिणाम आएगा।
चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर संदेह के कारण
सरकार और चुनाव आयोग के बीच तकरार आम बात बन गई है। कई बार सरकार पर आयोग को प्रभावित करने का आरोप भी लगा है। जबकि अदालतें और स्वतंत्र संस्थान इस मामले में भूमिका निभाते हैं। फिर भी, सवाल खड़ा होता है—क्या आयोग स्वतंत्र है? यदि नहीं, तो चुनाव की निष्पक्षता खतरे में पड़ती है। ऐसी स्थिति में लोकतंत्र का दिन-प्रतिदिन कमजोर होना तय है।

Kharge का ‘अनघोषित आपातकाल’ और राजनीतिक स्वतंत्रता पर प्रभाव
‘अनघोषित आपातकाल’ का अर्थ और वर्तमान संदर्भ
‘अनघोषित आपातकाल’ का मतलब है कि लोकतंत्र के बीच छिपा हुआ खतरा। यह असल में वह स्थिति है जब सरकार स्वतंत्रता को नियंत्रित करती है, लेकिन खुलेआम आपातकाल नहीं लगाती। वर्तमान में यह स्थिति हमें दिख रही है। जब विरोध करने वालों को दबाया जाता है या मीडिया को सिक्रेट तरीके से धमकाया जाता है, तो वह चिंता की बात है।
मानवाधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का ह्रास – Kharge
आज के दौर में मीडिया पर दबाव बढ़ रहा है। पत्रकारों को, सामाजिक कार्यकर्ताओं को, और राजनीतिक आलोचकों को डराया जा रहा है। यह सब हमारे मौलिक अधिकार के खिलाफ है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का ह्रास हो रहा है, जो लोकतंत्र के लिए जरूरी है। यदि हम इन अधिकारों को ना बचाएं, तो हमारे लोकतंत्र की जड़ें कमजोर हो जाएंगी।
राजनीतिक स्वतंत्रता में बाधाएँ और जनता का अधिकार
छोटी-छोटी बातों पर सरकार और उसकी एजेंसियां जनता के मताधिकार का उल्लंघन कर रही हैं। इससे हम लोकतंत्र को कमजोर करने का काम कर रहे हैं। जनता का वोट ही सरकार को जवाबदेह बनाता है, लेकिन जब यह अधिकार ही खतरे में पड़े, तो लोकतंत्र दर्द में जाएगा।
‘पपेट’ चुनाव आयोग: कांग्रेस की निंदा और आरोप
चुनाव आयोग को ‘पपेट’ कहने का आधार
कांग्रेस नेता Kharge का कहना है कि चुनाव आयोग अब ‘पपेट’ बन गया है। इसका मतलब है कि यह सरकार का बहाना बन चुका है। सरकार के प्रभाव के कारण, आयोग पक्षपात कर रहा है। यह स्थिति अब लोकतंत्र के सामने बड़ा खतरा है।
विपक्षी दलों का रुख और प्रतिक्रिया
विभिन्न विपक्षी दल भी इस बात से सहमत हैं। उनका कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पक्षपात दिख रहा है। विपक्ष का आरोप है कि आयोग का फैसला अक्सर सरकार के पक्ष में हो रहा है। इससे लोकतंत्र का मूल मर्म खतरे में पड़ गया है।
चुनाव प्रक्रिया में पक्षपात या पक्षपात का आरोप
मतदान प्रक्रिया से लेकर मतगणना तक, हर कदम पर शक रहता है। पारदर्शिता और निष्पक्षता की कमी से जनता का भरोसा खत्म हो रहा है। यह स्थिति देश की चुनाव प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

कांग्रेस की रणनीति और आंदोलन के उपाय
कांग्रेस प्रमुख Kharge का आंदोलन विजन
खड़गे का लक्ष्य है कि जनता को जागरूक किया जाए। वे संवाद के माध्यम से लोगों को यह समझा रहे हैं कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए सभी को जिम्मेदारी निभानी होगी। उनका मानना है कि जनता का समर्थन ही बदलाव ला सकता है।
कानूनी और राजनैतिक कदम
कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर चुकी है। उनका मकसद है कि न्यायालय चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को सुरक्षित करे। साथ ही, संसद में इस मुद्दे पर बहस कराना भी जरूरी है। यह कदम लोकतंत्र को मजबूत बनाने में मदद करेगा।
सोशल मीडिया और जनता के साथ संपर्क
सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके कांग्रेस लोगों तक अपनी बात पहुंचा रही है। बड़े पैमाने पर जनसंपर्क अभियान चलाकर जनता का समर्थन हासिल कर रही है। इससे राजनीतिक जंग के बीच जनता का हौसला भी बढ़ रहा है।
Kharge : लोकतंत्र को सुरक्षित बनाने के लिए क्या करें
सबसे जरूरी है कि हम तुरंत ही निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव सुनिश्चित करें। जनता और राजनीतिक दल दोनों को साथ मिलकर काम करना होगा। जागरूकता और नागरिक सहभागिता का प्रभाव हमें मजबूत बनाता है। खड़गे की बातों से हमें सीख मिलती है—सभी को मिलकर लोकतंत्र को बचाना है। तभी हम एक बेहतर, मजबूत भारत बना सकते हैं।
मुख्य बातें और अंतिम विचार
- चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता का संरक्षण सभी के लिए जरूरी है।
- ‘अनघोषित आपातकाल’ का मुकाबला सुनिश्चित करने के लिए तुरंत कदम उठाने होंगे।
- जनता और राजनीतिक दल दोनों की जिम्मेदारी है कि वे लोकतंत्र की रक्षा करें। जब मिलकर काम करेंगे, तभी हम मजबूत लोकतंत्र बना पाएंगे।
सामूहिक प्रयासों से ही हम देश के लोकतंत्र को बचा सकते हैं और बेहतर बना सकते हैं। यह समय है चेतने का, बदलाव लाने का, और लोकतंत्र को मजबूत करने का।
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