Delhi

Delhi के लक्ष्मीनारायण मंदिर में कृष्ण जन्माष्टमी: एक भव्य उत्सव

कृष्ण जन्माष्टमी, भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में भारत भर में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। Delhi का प्रतिष्ठित लक्ष्मीनारायण मंदिर (बिरला मंदिर) इस पावन अवसर पर विशेष रूप से श्रद्धा और भक्ति का केंद्र बनता है। हर साल लाखों श्रद्धालु इस मंदिर में आकर भगवान कृष्ण के दर्शन करते हैं। वे कई धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं। यह उत्सव केवल आध्यात्मिक महत्व नहीं रखता, बल्कि दिल्ली की सांस्कृतिक विरासत का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

यह लेख Delhi  के लक्ष्मीनारायण मंदिर में मनाए जाने वाले कृष्ण जन्माष्टमी उत्सव की पूरी जानकारी देगा। इसमें उत्सव की रौनक, धार्मिक अनुष्ठान, और श्रद्धालुओं की भागीदारी का वर्णन शामिल है।

लक्ष्मीनारायण मंदिर: Delhi

मंदिर का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व

लक्ष्मीनारायण मंदिर, जिसे आमतौर पर बिरला मंदिर कहा जाता है, Delhi का एक मशहूर पूजा स्थल है। इसका उद्घाटन 1939 में महात्मा गांधी ने किया था। मंदिर नागर शैली की वास्तुकला का अद्भुत नमूना है। इसके निर्माण में सफेद संगमरमर और लाल बलुआ पत्थर का प्रयोग हुआ है। यह मंदिर भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को समर्पित है।

यहां भगवान शिव, गणेश, हनुमान और बुद्ध के छोटे मंदिर भी हैं। मंदिर की दीवारों पर हिंदू धर्मग्रंथों के चित्र और नक्काशी मन मोह लेती है। यह स्थान शांति और भक्ति का प्रतीक है।

Delhi में मंदिर का स्थान

यह मंदिर Delhi के मध्य में कनॉट प्लेस के पास है। यह शहर के किसी भी कोने से आसानी से पहुँचा जा सकता है। Delhi मेट्रो और बसें यहाँ तक पहुंचने के लिए सुविधाजनक साधन हैं। मंदिर अपनी भव्यता के कारण पर्यटकों को भी बहुत आकर्षित करता है।

दूर-दूर से लोग यहाँ दर्शन करने आते हैं। यह मंदिर Delhi के प्रमुख आध्यात्मिक केंद्रों में से एक बन गया है।

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कृष्ण जन्माष्टमी: उत्सव का उल्लास

जन्माष्टमी का धार्मिक महत्व

कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व भगवान कृष्ण के जन्म का जश्न मनाता है। वे मथुरा में देवकी और वसुदेव के पुत्र के रूप में पैदा हुए थे। यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं और भगवान कृष्ण की पूजा करते हैं।

आधी रात को भगवान का जन्म होता है। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और अभिषेक किया जाता है। लोग पूरे उत्साह के साथ “हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की” के नारे लगाते हैं।

लक्ष्मीनारायण मंदिर में जन्माष्टमी की तैयारी

जन्माष्टमी से कई दिन पहले ही लक्ष्मीनारायण मंदिर में उत्सव की तैयारी शुरू हो जाती है। पूरे मंदिर को रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों से सजाया जाता है। भगवान की मूर्तियों का विशेष श्रृंगार होता है। कृष्ण लीला से जुड़ी झांकियां भी तैयार की जाती हैं।

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को संभालने के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था की जाती है। मंदिर प्रशासन भक्तों के लिए पीने के पानी और अन्य सुविधाओं का भी प्रबंध करता है।

उत्सव के मुख्य आकर्षण

मध्यरात्रि की आरती और झूला

जन्माष्टमी की रात मंदिर में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है। आधी रात को भगवान कृष्ण के जन्म का समय होता है। इस समय, बाल कृष्ण की मूर्ति का दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से अभिषेक किया जाता है। यह एक बहुत ही पवित्र और भावुक पल होता है।

अभिषेक के बाद विशेष आरती की जाती है। मंदिर का पूरा वातावरण शंखनाद और घंटियों की मधुर ध्वनि से गूंज उठता है। भक्त भगवान कृष्ण को झूले में झुलाते हैं। यह दृश्य वाकई अद्भुत होता है।

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भजन-कीर्तन और प्रवचन

पूरे दिन मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन चलता रहता है। भक्त भगवान के नाम का जप करते हैं। कई सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। धार्मिक विद्वान और संत जन्माष्टमी के महत्व पर प्रवचन देते हैं।

वे भगवान कृष्ण के जीवन और उनकी शिक्षाओं के बारे में बताते हैं। यह माहौल भक्तों को गहरी भक्ति में डुबो देता है। लोग भक्तिमय संगीत का आनंद लेते हैं।

श्रद्धालुओं की भागीदारी

लाखों भक्तों का संगम

जन्माष्टमी के दिन लक्ष्मीनारायण मंदिर में लाखों श्रद्धालु जमा होते हैं। लोग घंटों लंबी कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं। यह भगवान के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा को दर्शाता है। मंदिर में चारों ओर भक्ति का सैलाब होता है।

दर्शन के बाद भक्तों को प्रसाद बांटा जाता है। प्रसाद में पंचामृत और धनिया पंजीरी जैसी चीजें होती हैं।

सांस्कृतिक विविधता का प्रदर्शन

इस उत्सव में भारत के अलग-अलग राज्यों से लोग आते हैं। वे अपनी-अपनी सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के साथ उत्सव में भाग लेते हैं। यह एक छोटे भारत का अनुभव कराता है। लोग एक-दूसरे से मिलते हैं और शुभकामनाएं देते हैं।

जन्माष्टमी का यह उत्सव Delhi में सामुदायिक भावना को बढ़ाता है। यह एक साथ आने और खुशी बांटने का मौका होता है।

जन्माष्टमी का अनुभव

मंदिर का माहौल

जन्माष्टमी के दौरान लक्ष्मीनारायण मंदिर का माहौल बहुत खास होता है। हर तरफ भक्ति, उल्लास और श्रद्धा का संगम दिखाई देता है। हवा में धूप और फूलों की खुशबू घुल जाती है। भजनों की धुनें और आरती का शंखनाद मन को शांति देते हैं।

रात में जगमगाती रोशनी मंदिर की सुंदरता को और बढ़ा देती है। यह अनुभव जीवन भर याद रहता है।

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ऐतिहासिक डेटा

पिछले साल जन्माष्टमी के अवसर पर लक्ष्मीनारायण मंदिर में लगभग 5 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। मंदिर प्रबंधन उम्मीद करता है कि इस साल यह संख्या और भी बढ़ सकती है। यह दिखाता है कि यह उत्सव कितना लोकप्रिय है।

यह लगातार भक्तों की बढ़ती संख्या का प्रमाण है।

Delhi के लक्ष्मीनारायण मंदिर में कृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं है। यह भक्ति, उल्लास और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। यह अवसर लाखों लोगों को एक साथ लाकर भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने का एक अनूठा मंच प्रदान करता है। मंदिर की भव्यता और उत्सव की रौनक इस पावन पर्व को और भी खास बना देती है।

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