India में चंद्र ग्रहण 2025 की तिथि और समय: 82 मिनट की दुर्लभ खगोलीय घटना का साक्षी बनें
साल 2025 में एक अनोखा खगोलीय नज़ारा आपका इंतजार कर रहा है। यह चंद्र ग्रहण एक बड़ी घटना है, जिसे देखने के लिए लोग बहुत उत्साहित हैं। चाँद के दीवानों और अंतरिक्ष प्रेमियों के लिए यह समय बेहद खास होगा।
यह घटना 14 मार्च, 2025 को होगी। ग्रहण कुल 82 मिनट तक अपने चरम पर रहेगा। यह एक ऐसा मौका है जब India के लोग भी इस अद्भुत दृश्य को देख पाएंगे। चाँद का यह खास रूप आपको कई सालों तक याद रहेगा।
चंद्र ग्रहण हमेशा से लोगों की जिज्ञासा जगाते रहे हैं। भारतीय संस्कृति में भी इनका एक खास स्थान है। कई लोग इसे शुभ-अशुभ से जोड़कर देखते हैं, जबकि विज्ञान इसे प्रकृति का एक अद्भुत खेल मानता है।
2025 में चंद्र ग्रहण: वह सब कुछ जो आपको जानना चाहिए
चंद्र ग्रहण 2025 की सटीक तिथि और समय
यह चंद्र ग्रहण 14 मार्च, 2025 को देखा जाएगा। यह शुक्रवार का दिन होगा। चाँद के इस खास रंग को देखने के लिए सुबह का समय सबसे अच्छा रहेगा।
India में चंद्र ग्रहण का प्रारंभ (प्रारंभिक समय)
India के अलग-अलग शहरों में ग्रहण की शुरुआत का समय थोड़ा बदल सकता है।
- दिल्ली: सुबह 8:42 बजे (लगभग)
- मुंबई: सुबह 8:42 बजे (लगभग)
- कोलकाता: सुबह 8:42 बजे (लगभग)
- चेन्नई: सुबह 8:42 बजे (लगभग)
यह वो पल होगा जब चंद्रमा पृथ्वी की हल्की छाया में आना शुरू कर देगा। आपको धीरे-धीरे चंद्रमा पर बदलाव दिखना शुरू होगा।

चंद्र ग्रहण का चरम (अधिकतम ग्रहण का समय)
ग्रहण का सबसे गहरा पल तब होता है, जब चंद्रमा पृथ्वी की मुख्य छाया में सबसे ज़्यादा होता है। 14 मार्च को यह समय कुछ ऐसा होगा:
- दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई: सुबह 10:28 बजे (लगभग)
इस समय चंद्रमा का रंग नारंगी या गहरा लाल दिख सकता है। इसे ब्लड मून भी कहते हैं। यह नज़ारा सच में देखने लायक होता है।
चंद्र ग्रहण का समापन (समाप्ति का समय)
ग्रहण धीरे-धीरे खत्म होता है और चंद्रमा अपनी सामान्य चमक पर लौट आता है। यह प्रक्रिया भी अलग-अलग शहरों में थोड़ा भिन्न होगी।
- दिल्ली: दोपहर 12:14 बजे (लगभग)
- मुंबई: दोपहर 12:14 बजे (लगभग)
- कोलकाता: दोपहर 12:14 बजे (लगभग)
- चेन्नई: दोपहर 12:14 बजे (लगभग)
यह वो समय होगा जब चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की छाया से बाहर निकल जाएगा। ग्रहण का अद्भुत चक्र पूरा हो चुका होगा।
चंद्र ग्रहण की कुल अवधि (82 मिनट)
इस चंद्र ग्रहण की मुख्य दृश्य अवधि लगभग 82 मिनट होगी। यह समय बेहद खास है। इतने लंबे समय तक चाँद का बदला हुआ रंग देखना एक दुर्लभ अनुभव देता है। यह अवधि आपको ग्रहण के सबसे सुंदर और रोमांचक हिस्से को करीब से देखने का मौका देती है। क्या आप इस खास पल के लिए तैयार हैं?
चंद्र ग्रहण 2025 का प्रकार
चंद्र ग्रहण कई तरह के होते हैं। क्या आप जानते हैं कौन सा प्रकार सबसे दिलचस्प होता है? हर प्रकार का नज़ारा आसमान में अलग दिखता है।
क्या यह पूर्ण चंद्र ग्रहण, आंशिक चंद्र ग्रहण या उपच्छाया चंद्र ग्रहण होगा?
चंद्र ग्रहण तीन मुख्य प्रकार के होते हैं।
- पूर्ण चंद्र ग्रहण: इसमें चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की मुख्य छाया (अम्ब्रा) में आ जाता है। यह सबसे नाटकीय नज़ारा होता है।
- आंशिक चंद्र ग्रहण: इसमें चंद्रमा का केवल एक हिस्सा ही पृथ्वी की मुख्य छाया में आता है। चाँद पर एक कटा हुआ भाग दिखता है।
- उपच्छाया चंद्र ग्रहण: इसमें चंद्रमा केवल पृथ्वी की हल्की छाया (पेनम्ब्रा) से होकर गुजरता है। यह देखना मुश्किल होता है क्योंकि चाँद की चमक में बहुत कम फर्क आता है।
2025 में होने वाले चंद्र ग्रहण के विशिष्ट प्रकार की पुष्टि
14 मार्च 2025 को होने वाला चंद्र ग्रहण एक पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा। यह खगोल प्रेमियों के लिए एक खुशखबरी है। पूर्ण चंद्र ग्रहण सबसे ज़्यादा खूबसूरत और रोमांचक होते हैं। इसमें चंद्रमा का रंग बदलकर लाल या नारंगी हो जाता है।
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विभिन्न प्रकार के चंद्र ग्रहणों का दृश्य प्रभाव
पूर्ण चंद्र ग्रहण में चंद्रमा का रंग लाल, भूरा या नारंगी दिखाई देता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पृथ्वी के वायुमंडल से छनकर आने वाली सूरज की रोशनी चाँद पर पड़ती है। आंशिक ग्रहण में चाँद का एक हिस्सा अँधेरा दिखता है। उपच्छाया ग्रहण में चाँद बस थोड़ा धुँधला सा दिखता है।
India में चंद्र ग्रहण 2025 की दृश्यता
क्या आप सोच रहे हैं कि यह ग्रहण India में कहाँ-कहाँ दिखेगा? यह जानकारी आपके लिए जरूरी है।
India के किन हिस्सों में दिखेगा ग्रहण?
यह चंद्र ग्रहण India के कुछ हिस्सों में आंशिक रूप से दिखाई देगा। पूरे देश में इसकी दृश्यता एक जैसी नहीं होगी। पूर्वी और उत्तर-पूर्वी राज्यों में ग्रहण का कुछ हिस्सा देखा जा सकता है। जैसे-जैसे ग्रहण आगे बढ़ेगा, यह कुछ और जगहों पर दिख सकता है।
प्रमुख शहरों और राज्यों के लिए दृश्यता की जानकारी
अगर आप इस ग्रहण को देखना चाहते हैं, तो India के पूर्वी हिस्से में रहने वालों को सबसे अच्छा मौका मिलेगा। पश्चिम बंगाल, असम और अन्य उत्तर-पूर्वी राज्यों में इसकी दृश्यता अधिक स्पष्ट हो सकती है। हालाँकि, यह आंशिक रूप से ही दिखेगा। अन्य जगहों पर चंद्रमा क्षितिज के नीचे होने के कारण या दिन के उजाले के कारण इसे देखना मुश्किल हो सकता है।
ग्रहण को देखने के लिए सर्वोत्तम स्थान और समय
ग्रहण को अच्छे से देखने के लिए खुली जगह चुनना सबसे अच्छा रहता है। शहर की रोशनियों से दूर कोई ऐसी जगह देखें जहाँ आसमान साफ दिखे। पहाड़ी इलाके या गाँव के खुले खेत अच्छे विकल्प हो सकते हैं।
खगोलीय वेधशालाओं या सार्वजनिक Viewing स्थानों का उल्लेख (यदि लागू हो)
हालांकि चंद्र ग्रहण को सीधे आँखों से देखना सुरक्षित है, फिर भी कुछ खगोलीय समूह या वेधशालाएँ विशेष आयोजन कर सकते हैं। वे दूरबीन या टेलीस्कोप की मदद से देखने का इंतजाम कर सकते हैं। अगर ऐसा कोई आयोजन होता है, तो उसकी जानकारी के लिए स्थानीय खगोलीय क्लबों से संपर्क करें।
चंद्र ग्रहण 2025: खगोलीय महत्व और दुर्लभता
यह ग्रहण केवल एक सुंदर नज़ारा नहीं है। इसका खगोलीय महत्व भी बहुत ज़्यादा है।
82 मिनट की अवधि का महत्व
इस ग्रहण की 82 मिनट की मुख्य दृश्य अवधि इसे खास बनाती है। क्या आपको पता है कि यह क्यों महत्वपूर्ण है? कई चंद्र ग्रहण इससे कम समय के होते हैं।
सामान्य चंद्र ग्रहणों की तुलना में 82 मिनट की अवधि
आमतौर पर पूर्ण चंद्र ग्रहण की कुल अवधि लगभग 60 से 70 मिनट की होती है। 82 मिनट की अवधि का मतलब है कि आपको चाँद के लाल रंग का यह अद्भुत नज़ारा काफी देर तक देखने को मिलेगा। यह अनुभव आपको ग्रहण की सुंदरता में पूरी तरह डूबने का मौका देगा। यह इसे एक दुर्लभ घटना बनाता है।
लंबे ग्रहण के पीछे खगोलीय कारण (यदि ज्ञात हो)
इस लंबे ग्रहण का कारण पृथ्वी और चंद्रमा की कक्षाओं का विशेष संरेखण है। जब चंद्रमा पृथ्वी की अम्ब्रा (गहरी छाया) के बीचों-बीच से होकर गुजरता है, तो ग्रहण की अवधि लंबी हो जाती है। यह एक ऐसा संयोग है जो बार-बार नहीं बनता। यह दर्शाता है कि हमारी सौर मंडल में चीजें कितने सटीक ढंग से काम करती हैं।
खगोलीय घटना के रूप में चंद्र ग्रहण का विज्ञान
चंद्र ग्रहण एक बहुत ही वैज्ञानिक घटना है। इसमें कोई जादू नहीं होता, बस ग्रहों की चाल का खेल होता है।
सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा का संरेखण
चंद्र ग्रहण तब होता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधी रेखा में आ जाते हैं। पृथ्वी ठीक बीच में होती है, जिससे उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है। यह एक त्रिमूर्ति का खेल है जो आसमान में एक शानदार दृश्य बनाता है। पृथ्वी की छाया चंद्रमा की चमक को ढक लेती है।
पृथ्वी की छाया (अम्ब्रा और पेनम्ब्रा) का प्रभाव
पृथ्वी की छाया दो हिस्सों में बटी होती है।
- अम्ब्रा (Umbra): यह पृथ्वी की गहरी, काली छाया होती है। जब चंद्रमा इस अम्ब्रा में आता है, तो हमें पूर्ण या आंशिक चंद्र ग्रहण दिखता है।
- पेनम्ब्रा (Penumbra): यह अम्ब्रा के चारों ओर की हल्की छाया होती है। जब चंद्रमा पेनम्ब्रा से गुजरता है, तो हमें उपच्छाया चंद्र ग्रहण दिखता है। चंद्रमा का लाल रंग अम्ब्रा से गुजरते समय ही दिखता है।
चंद्र ग्रहण 2025: मान्यताएं, सावधानियां और सुझाव
चंद्र ग्रहण से जुड़ी कई पुरानी मान्यताएं हैं। लोग अकसर इनके बारे में जानना चाहते हैं।
धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताएं (भारतीय संदर्भ)
भारतीय संस्कृति में चंद्र ग्रहण का एक खास स्थान है। कई लोग इसे धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण मानते हैं।
ग्रहण से जुड़े ज्योतिषीय प्रभाव
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, चंद्र ग्रहण का राशियों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है। कुछ राशियों के लिए यह शुभ हो सकता है, तो कुछ के लिए थोड़ा चुनौती भरा। इस दौरान मंत्र जाप और पूजा-पाठ करने की सलाह दी जाती है। यह समय आत्म-चिंतन और ध्यान के लिए भी अच्छा माना जाता है।
गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए पारंपरिक मान्यताएं
कई लोग मानते हैं कि ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को बाहर नहीं निकलना चाहिए। यह भी कहा जाता है कि उन्हें चाकू, कैंची जैसे धारदार उपकरणों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। बच्चों को भी ग्रहण के सीधे संपर्क में आने से बचाने की सलाह दी जाती है। हालाँकि, ये केवल पारंपरिक मान्यताएं हैं और इनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।
ग्रहण के दौरान और बाद में बरती जाने वाली सावधानियां
क्या आप जानते हैं ग्रहण के दौरान क्या करना चाहिए और क्या नहीं? कुछ पुरानी बातें अब भी लोग मानते हैं।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सीधे देखने की सुरक्षा
सूर्य ग्रहण के विपरीत, चंद्र ग्रहण को सीधे आँखों से देखना पूरी तरह सुरक्षित होता है। आपको किसी खास चश्मे या उपकरण की जरूरत नहीं होती। आप इसे नंगी आँखों से आराम से देख सकते हैं। यह खगोलीय नज़ारा देखने में कोई खतरा नहीं है।
स्वास्थ्य और भोजन संबंधी पारंपरिक मान्यताएं (और उनका खंडन)
पुरानी मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के दौरान खाना पकाना या खाना नहीं चाहिए। लोग मानते हैं कि इससे भोजन अशुद्ध हो जाता है। कई लोग ग्रहण से पहले पकाए गए भोजन में तुलसी के पत्ते भी डालते हैं। लेकिन वैज्ञानिक रूप से इन बातों का कोई आधार नहीं है। ग्रहण के दौरान भोजन करने या न करने से स्वास्थ्य पर कोई फर्क नहीं पड़ता।
ग्रहण के बाद के अनुष्ठान (यदि कोई हों)
ग्रहण खत्म होने के बाद कई लोग स्नान करते हैं। यह एक शुद्धि का प्रतीक माना जाता है। कुछ लोग मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना भी करते हैं। दान-पुण्य करना भी एक सामान्य प्रथा है।
ग्रहण को देखने के लिए व्यावहारिक सुझाव
इस खास नज़ारे को और भी यादगार कैसे बनाया जाए? कुछ आसान सुझाव आपके काम आ सकते हैं।
दूरबीन या टेलीस्कोप का उपयोग
अगर आपके पास छोटी दूरबीन या टेलीस्कोप है, तो इसका इस्तेमाल करें। यह आपको चाँद की सतह के छोटे-छोटे गड्ढे और ग्रहण के दौरान रंगों के बदलाव को और करीब से देखने में मदद करेगा। इससे आपका अनुभव और भी अद्भुत हो जाएगा।
फोटोग्राफी के लिए टिप्स
चंद्र ग्रहण की तस्वीरें लेना चाहते हैं? इसके लिए एक तिपाई (tripod) का इस्तेमाल करें ताकि कैमरा हिले नहीं। कम रोशनी में अच्छी तस्वीरें लेने के लिए कैमरे की ISO सेटिंग बढ़ाएँ और शटर स्पीड को थोड़ा धीमा करें। कुछ प्रैक्टिस आपको शानदार तस्वीरें दिला सकती है।
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वेबकास्ट और लाइव स्ट्रीमिंग के विकल्प
अगर आप इसे सीधे नहीं देख पाते, तो चिंता न करें। कई खगोलीय संगठन और विज्ञान चैनल इस घटना की लाइव स्ट्रीमिंग करते हैं। आप उन्हें ऑनलाइन देख सकते हैं। यह घर बैठे ही इस अद्भुत नज़ारे का हिस्सा बनने का एक अच्छा तरीका है।
14 मार्च 2025 का चंद्र ग्रहण एक ऐसा अवसर है, जिसे कोई भी मिस नहीं करना चाहेगा। यह 82 मिनट की खास अवधि आपको प्रकृति के एक अद्भुत रंग को दिखाएगी। भारत के कुछ हिस्सों में यह आंशिक रूप से ही सही, लेकिन एक यादगार नज़ारा पेश करेगा।
इस खगोलीय घटना को अपनी आँखों से देखना एक अलग ही अनुभव होता है। चाहे आप खगोल विज्ञान में रुचि रखते हों या बस आसमान में कुछ खास देखना चाहते हों, यह ग्रहण आपको निराश नहीं करेगा। तो, तैयार हो जाइए इस दुर्लभ खगोलीय घटना के साक्षी बनने के लिए।
यह चंद्र ग्रहण हमें याद दिलाता है कि ब्रह्मांड में हमेशा कुछ नया और रोमांचक होता रहता है। अपनी अगली खगोलीय यात्रा के लिए तैयार रहें। आसमान के रहस्यों को जानने की अपनी इच्छा को हमेशा जगाए रखें।
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