KP ओली के इस्तीफे के बाद नेपाल का अगला प्रधानमंत्री कौन? पीएम मोदी की सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात का महत्व
KP शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद नेपाल में राजनीतिक हलचल तेज है। देश अब नए प्रधानमंत्री की तलाश में है। कई बड़े नाम इस दौड़ में शामिल हैं, जिनमें शेर बहादुर देउबा और पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ खास हैं। यह बदलाव नेपाल को राजनीतिक अस्थिरता के मोड़ पर ले आया है।
नेपाल के इस राजनीतिक बदलाव का भारत-नेपाल रिश्तों पर बड़ा असर पड़ सकता है। इसी बीच, प्रधानमंत्री मोदी की सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात ने कई सवाल खड़े किए हैं। क्या यह बैठक भारत की नेपाल संबंधी रणनीति का हिस्सा है? इस मुलाकात के मायने क्या हैं, यह समझना जरूरी है।
नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता: ओली के इस्तीफे के कारण और परिणाम
ओली सरकार ने अपने कार्यकाल में कई मुश्किलें देखीं। पार्टी के भीतर अंदरूनी कलह और गठबंधन सहयोगियों का साथ छूटना उनकी सरकार की बड़ी चुनौतियाँ थीं। उनके कुछ विवादित फैसले भी चर्चा में रहे। विशेषकर, सीमा विवादों और नागरिकता कानूनों को लेकर उनकी नीतियों ने खूब सुर्खियाँ बटोरीं। इन सभी कारणों ने ओली के इस्तीफे की पृष्ठभूमि तैयार की।
प्रधानमंत्री पद के लिए कई बड़े नेता सामने आए हैं। नेपाली कांग्रेस के शेर बहादुर देउबा एक प्रमुख दावेदार हैं। सीपीएन (माओवादी सेंटर) के पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ भी रेस में हैं। सीपीएन (यूएमएल) के माधव कुमार नेपाल का नाम भी चर्चा में है। देउबा को पहले भी प्रधानमंत्री रहने का अनुभव है, और वे संसदीय समर्थन जुटाने में माहिर माने जाते हैं। प्रचंड और माधव नेपाल भी अपनी पार्टियों में मजबूत पकड़ रखते हैं।
सरकार बनाने के लिए विभिन्न दलों के बीच जोर-आजमाइश चल रही है। बहुमत के लिए 138 सीटों का आंकड़ा चाहिए। नेपाली कांग्रेस, माओवादी सेंटर और अन्य छोटे दल मिलकर गठबंधन बनाने की कोशिश में हैं। यूएमएल के भीतर की गुटबाजी भी नए समीकरणों को जन्म दे सकती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन सा गठबंधन सफल होता है।

भारत-नेपाल संबंध: नए नेतृत्व की अपेक्षाएँ
भारत और नेपाल के रिश्ते सिर्फ पड़ोसी होने से बढ़कर हैं। सदियों से दोनों देशों के बीच ‘रोटी-बेटी’ का रिश्ता रहा है। साझा संस्कृति, खुली सीमा और व्यापार दोनों देशों को गहरे से जोड़ते हैं। जल संसाधन, ऊर्जा और पर्यटन जैसे क्षेत्र दोनों देशों के बीच सहयोग के अहम हिस्से हैं।
भारत हमेशा से अपनी ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति पर चला है। नेपाल की राजनीतिक स्थिरता भारत की सुरक्षा के लिए बेहद अहम है। सीमावर्ती राज्यों की सुरक्षा, अवैध व्यापार को रोकना और क्षेत्रीय शांति बनाए रखना भारत के मुख्य हित हैं। भारत नेपाल के आर्थिक विकास में भी लगातार सहयोग करता रहा है।
भारत नई नेपाली सरकार से मैत्रीपूर्ण संबंध चाहता है। सीमा विवादों पर बातचीत से समाधान खोजना भारत की प्राथमिकता होगी। पुराने द्विपक्षीय समझौतों का सम्मान करना और दोनों देशों के बीच विश्वास बहाल करना भी भारत की बड़ी उम्मीदें हैं।
पीएम मोदी की सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात: क्या हैं मायने?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झारखंड के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात की। यह बैठक नई दिल्ली में हुई थी। हालांकि, इस मुलाकात का मुख्य एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया। ऐसी बैठकें अक्सर राजनयिक या सुरक्षा संबंधी विषयों पर चर्चा के लिए होती हैं।
इस बैठक में भारत-नेपाल सीमा से जुड़े सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। सीमा पर होने वाली तस्करी, अवैध घुसपैठ और अन्य गतिविधियों को नियंत्रित करना एक महत्वपूर्ण विषय है। राज्यपाल अक्सर अपने सीमावर्ती राज्यों की सुरक्षा चिंताओं से अवगत होते हैं।
क्या इस मुलाकात का संबंध नेपाल के आगामी राजनीतिक घटनाक्रम से है? यह संभव है। भारत क्षेत्रीय स्थिरता को महत्व देता है। नेपाल में नई सरकार बनने पर द्विपक्षीय सहयोग कैसे आगे बढ़ेगा, इस पर भी अनौपचारिक चर्चा हो सकती है। आर्थिक सहयोग और साझा विकास परियोजनाएं भी एजेंडे का हिस्सा हो सकती हैं।

नेपाल के नए प्रधानमंत्री के लिए चुनौतियाँ और अवसर
नेपाल की अर्थव्यवस्था कोविड-19 महामारी के कारण बुरी तरह प्रभावित हुई है। बेरोजगारी बढ़ गई है और विकास दर धीमी पड़ गई है। नए प्रधानमंत्री को आर्थिक सुधारों पर ध्यान देना होगा। पर्यटन को बढ़ावा देना और विदेशी निवेश आकर्षित करना बड़ी चुनौती होगी।
नेपाल में गठबंधन सरकारें अक्सर अस्थिर रही हैं। नए नेतृत्व के लिए एक स्थायी राजनीतिक माहौल बनाना मुश्किल काम होगा। विभिन्न दलों के बीच आम सहमति बनाना और संवैधानिक सुधारों को आगे बढ़ाना भी जरूरी होगा। एक स्थिर सरकार ही देश को आगे ले जा सकती है।
नेपाल को चीन और भारत जैसे पड़ोसियों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने होंगे। किसी एक पक्ष की ओर झुकने से बचना होगा। विदेशी निवेश और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के नए रास्ते तलाशना भी देश के लिए महत्वपूर्ण होगा।

KP ओली के इस्तीफे के बाद नेपाल में राजनीतिक अनिश्चितता का नया दौर शुरू हो गया है। नए नेतृत्व को कई महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। इसमें आर्थिक मुद्दों को सुलझाना और राजनीतिक स्थिरता बनाए रखना प्रमुख कार्य होंगे।
प्रधानमंत्री मोदी की सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात, भले ही सीधे तौर पर नेपाली प्रधानमंत्री की दौड़ से न जुड़ी हो, पर यह भारत की क्षेत्रीय शांति और द्विपक्षीय संबंधों में निरंतरता सुनिश्चित करने की भूमिका को दर्शाती है। भारत नेपाल में स्थिरता चाहता है।
नेपाल के भविष्य के लिए राजनीतिक स्थिरता, आर्थिक विकास और सुदृढ़ द्विपक्षीय संबंध बहुत मायने रखते हैं। नई सरकार को इन सभी पहलुओं पर गंभीरता से काम करना होगा। इससे न केवल नेपाल बल्कि पूरे क्षेत्र को फायदा होगा।
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