Navratri 2025: जब प्रेम आनंद महाराज से एक भक्त ने मां दुर्गा को लेकर पूछा सवाल, जानिए महाराज जी ने क्या उत्तर दिया
हर साल Navratri भारत में भक्ति की लहर लेकर आती है। 2025 में यह पर्व और भी गहराई से मनाया जाएगा, खासकर संतों के अमूल्य विचारों से, जैसे प्रेम आनंद महाराज के सत्संग। सोचिए, एक भक्त सैकड़ों लोगों के बीच हाथ उठाता है और मां दुर्गा की कृपा को लेकर सवाल करता है—तो महाराज जी ने ऐसा क्या कहा कि पूरा माहौल श्रद्धा से भर उठा?
Navratri 2025 का आध्यात्मिक महत्व
Navratri 2025 दो चरणों में आएगी:
चैत्र Navratri: 30 मार्च से 7 अप्रैल तक
शारदीय Navratri: 3 अक्टूबर से 11 अक्टूबर तक
इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना की जाती है, और हर रूप विशेष ऊर्जा व आशीर्वाद प्रदान करता है। भक्त व्रत रखते हैं, मंत्र जपते हैं और ध्यान करते हैं ताकि आंतरिक शक्ति प्राप्त हो सके।
Navratri के नौ दिनों का विशेष महत्व
हर दिन एक देवी के रूप को समर्पित है:
शैलपुत्री – स्थिरता का प्रतीक
ब्रह्मचारिणी – तप और संयम की देवी
चंद्रघंटा – शांति और साहस का स्वरूप
कूष्मांडा – अपनी मुस्कान से सृष्टि रचने वाली
स्कंदमाता – योद्धाओं की रक्षक
कात्यायनी – अधर्म के खिलाफ युद्ध करने वाली
कालरात्रि – अंधकार की संहारक
महागौरी – पवित्रता और क्षमा की देवी
सिद्धिदात्री – सभी सिद्धियों की प्रदाता
इन दिनों उपवास, फलाहार और मंत्रजप से मानसिक शांति मिलती है और साधना की गहराई बढ़ती है।

मां दुर्गा की पूजा के लाभ
Navratri में देवी की आराधना नकारात्मकता से रक्षा करती है और आत्मबल बढ़ाती है। दीप जलाना, दुर्गा सप्तशती का पाठ, और कन्या पूजन जैसे सरल उपाय जीवन में सुख-शांति लाते हैं।
सच्ची घटनाएँ भी इस बात को प्रमाणित करती हैं—जैसे एक महिला ने बताया कि रोज़ मंत्र जाप करने से उनके घर की कलह खत्म हो गई। भक्ति से मानसिक शांति, स्वास्थ्य, और सकारात्मक सोच आती है।
प्रेम आनंद महाराज का नवरात्रि से संबंध
प्रेम आनंद महाराज हर साल वृंदावन आश्रम में विशेष सत्संग करते हैं, जिनमें हज़ारों भक्त शामिल होते हैं। कृष्ण भक्ति और दुर्गा भक्ति का सुंदर समावेश इन सत्संगों में देखने को मिलता है।
2023 और 2024 के सत्संगों की लाइव स्ट्रीमिंग ने लाखों लोगों तक आध्यात्मिक संदेश पहुंचाया। 2025 में महाराज जी के प्रवचनों में मां दुर्गा की शक्ति पर और अधिक गहराई से चर्चा की उम्मीद है।
प्रेम आनंद महाराज और उनके सत्संगों की भूमिका
प्रेम आनंद महाराज एक प्रसिद्ध संत हैं, जो अपने सरल और भावपूर्ण प्रवचनों से करोड़ों लोगों को प्रेरणा देते हैं। एक साधारण परिवार से आए महाराज जी ने श्री कृपालु महाराज के सान्निध्य में संन्यास लिया और भक्ति मार्ग को अपनाया।
वृंदावन में रहकर उन्होंने शास्त्रों का गहन अध्ययन किया और राधा-कृष्ण भक्ति को अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया। उनके सत्संगों में श्रद्धालु दिव्यता का अनुभव करते हैं।
सत्संग में भक्तों की भागीदारी
सत्संग में अक्सर भक्तों के प्रश्नों से ही प्रवचन की दिशा तय होती है। कोई एक प्रश्न पूरे जनसमूह को दिशा दे सकता है। चाहे वृंदावन की सभा हो या ऑनलाइन जुड़ाव, हर प्रश्न से समाधान निकलता है।
सत्संग में भजन, कथा और ज्ञान का सुंदर मिश्रण होता है, जिससे हर व्यक्ति कुछ न कुछ नया लेकर लौटता है।
Navratri में सत्संग का महत्व
2025 की Navratri में सत्संगों में दुर्गा भक्ति विशेष रूप से केंद्र में होगी। महाराज जी सच्चे प्रेम और समर्पण की भावना पर जोर देंगे। ये शब्द भक्तों को उपवास को आनंदपूर्वक निभाने की शक्ति देंगे।

कभी-कभी सत्संग “दुर्गा चालीसा” के सामूहिक पाठ के साथ समाप्त होता है, जिससे समुदाय में एकता और ऊर्जा आती है। ऑनलाइन माध्यम से देश-विदेश के श्रद्धालु भी जुड़ सकते हैं।
भक्त का सवाल: मां दुर्गा की उपस्थिति कैसे अनुभव करें?
हाल ही के एक सत्संग में एक भक्त खड़ा हुआ और बोला—”महाराज जी, जब जीवन में तनाव और कठिनाई हो, तब मां दुर्गा की उपस्थिति कैसे महसूस करें?” पूरा माहौल शांत हो गया, और सबकी नजरें प्रेम आनंद महाराज जी पर टिक गईं।
सवाल की पृष्ठभूमि और भावना
यह घटना नवरात्रि की तैयारियों के बीच हुई। वह भक्त नियमित आने वाला था, जिसने अपनी नौकरी और पारिवारिक तनाव की बात साझा की। यह सवाल बहुतों का प्रतिनिधित्व करता है—”मां की शक्ति रोज़ कैसे मिले?”
भावनात्मक पहलू
भक्त के भीतर श्रद्धा थी, पर साथ ही चिंता भी। वह उपवास करता था, फिर भी देवी से जुड़ाव महसूस नहीं कर पा रहा था। यह भावना आम है—जब जीवन की आपाधापी में प्रार्थना खो जाती है।
यह सवाल हमें याद दिलाता है कि भक्ति केवल व्रत या पूजा नहीं, बल्कि भाव का विषय है।
आध्यात्मिक गहराई
यह सवाल दुर्गा सप्तशती के मूल तत्व को छूता है—समर्पण और विश्वास। जब भक्त सच्चे मन से माता को पुकारता है, तो वह हमेशा उत्तर देती हैं।
एक विचार करने योग्य बात: क्या एक सच्ची पुकार आपके जीवन की दिशा बदल सकती है?
प्रेम आनंद महाराज जी का दिव्य उत्तर
महाराज जी मुस्कराए और बोले:
“मां दुर्गा तुम्हारे हृदय में हैं। अपने डर को प्रेम से उन्हें सौंप दो, शांति अपने आप मिल जाएगी।”
उनका स्वर स्थिर था, लेकिन उनमें दिव्यता झलक रही थी।
उत्तर के मुख्य बिंदु
मां दुर्गा की कृपा बड़ी साधना से नहीं, शुद्ध भावना से मिलती है।
उन्होंने कहा, “जैसे बच्चा मां को पुकारता है, वैसे ही मां का नाम लो।”
भक्ति का अर्थ है अहंकार का त्याग।
न कोई विशेष नियम, न दिखावा—सिर्फ सच्चा स्मरण।

उत्तर से मिली आध्यात्मिक शिक्षा
पूर्ण समर्पण – अपने दुख मां को सौंप दो।
नित्य स्मरण – दिन की शुरुआत सिर्फ 5 मिनट के जप से करो।
मां को हर छोटी जीत में देखो – यह मानसिकता बदल देती है।
छोटे-छोटे अनुभव को नोट करो—हर दिन की एक कृपा पहचानो।
Navratri 2025 पर उत्तर का प्रभाव
महाराज जी के उत्तर से 2025 की Navratri का स्वरूप और भी आध्यात्मिक होगा। भक्त अब साधना को बोझ नहीं, बल्कि आनंद मानकर करेंगे।
कई लोग पहले से इस उत्तर को ऑनलाइन शेयर कर चुके हैं। यह नवरात्रि को आत्मिक रूपांतरण का अवसर बना रहा है।
Navratri 2025 के लिए मां दुर्गा की भक्ति के सरल उपाय
घर पर आसान दुर्गा पूजन विधि:
स्वच्छ altar पर मां दुर्गा की मूर्ति या चित्र रखें।
पहले दिन कलश स्थापित करें—पानी, सुपारी, पत्ते और सिक्के डालें।
रोज़ फूल, फल, दीप व अगरबत्ती अर्पित करें।
आरती करें और हलवा जैसे प्रसाद बांटे।
व्रत में ध्यान रखें:
फल, सूखे मेवे, दही का सेवन करें।
नारियल पानी पीते रहें।
स्वास्थ्य समस्याओं में डॉक्टर से सलाह लें।
भक्ति में आने वाली रुकावटों से कैसे निपटें?
शंका हो तो “ॐ दूं दुर्गायै नमः” का जप करें।
प्रेम आनंद महाराज जी की बात मानें—कृतज्ञता में ध्यान लगाएं।
सत्संग से जुड़ें, भले ऑनलाइन ही सही।
ध्यान के समय मोबाइल और स्क्रीन से दूरी रखें।
Tejashwi यादव बिहार के सीएम दौड़ में आगे क्यों लग रहे हैं
Follow us on Facebook
India Savdhan News | Noida | Facebook

