पृष्ठभूमि एवं संदर्भ
शिक्षा एवं छात्रवृत्ति प्रथा
भारत में और विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में, राज्य सरकारें विभिन्न वर्गों (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक एवं सामान्य वर्ग) के छात्रों को छात्रवृत्ति योजनाएँ देती रही हैं — ताकि आर्थिक रूप से पिछड़े परिवारों के छात्र पढ़ाई छोड़ने न पड़े।पहले की समस्याएँ-Yogi
समय-समय पर यह समस्या रही है कि छात्रवृत्ति आने में बहुत देरी होती थी, कई बार उचित सत्यापन के अभाव में छात्र छूट जाते थे, अथवा छात्रवृत्ति राशि सीधे बैंक खाते में न पहुँच पाने की शिकायत होती थी।नीति सुधार एवं डिजिटल हस्तांतरण
केंद्र तथा राज्य सरकारें अब “उक्त लाभार्थियों के बैंक खाते में सीधे हस्तांतरण” (डीबीटी — Direct Benefit Transfer) की व्यवस्था बढ़ा रही हैं, जिससे मध्यस्थों की भूमिका कम हो और पारदर्शिता बढ़े।समय का चक्र-Yogi
अक्सर छात्रवृत्ति राशि (जो कि शैक्षणिक वर्ष की है) बहुत बाद में दी जाती थी। इस बार, ऐसा दिखा कि राज्य सरकार ने समय से पहले वितरण करना चाहा है — ताकि छात्र समय पर लाभ प्राप्त करें।
क्या हुआ: ₹ 89.96 करोड़ का हस्तांतरण-Yogi
दिन व कार्यक्रम
26 सितंबर 2025 को लखनऊ में एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री Yogi आदित्यनाथ ने लगभग 3,96,602 छात्रों (लगभग 3.96 लाख) को छात्रवृत्ति राशि सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर करने की घोषणा की।

राशि एवं लाभार्थी संख्या
कुल राशि: ₹ 89.96 करोड़ (₹ 89,96,00,000)
लाभार्थी छात्र: लगभग 3,96,602
— यह छात्रवृत्ति विभिन्न विभागों जैसे पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, सामाजिक कल्याण विभाग और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की संयुक्त योजना के अंतर्गत दी गई है।
— विशेष रूप से, कुल 4 लाख छात्रों में से कुछ छात्र अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वर्ग से, कुछ पिछड़ा वर्ग से, कुछ अल्पसंख्यक विभाग से एवं सामान्य वर्ग से हैं।घोषणा के वक्त की बातें
— मुख्यमंत्री Yogi ने इस अवसर पर यह भी कहा कि अब “भेदभाव का युग समाप्त हुआ” है, और तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तथा बेहतर सत्यापन प्रणाली से छात्रवृत्ति वितरण अब पारदर्शी होगा।
— उन्होंने यह घोषणा की कि “One Nation, One Scholarship” नामक प्रणाली जल्दी लागू की जाएगी — यानी हर छात्र को प्रवेश तुंरत छात्रवृत्ति राशि मिलने लगेगी।सरकारी ट्रैक रिकार्ड-Yogi
— मुख्यमंत्री Yogi ने यह भी जानकारी दी कि 2017-18 से 2024-25 तक SC/ST छात्रों को DBT के माध्यम से ₹ 9,150 करोड़ और सामान्य वर्ग छात्रों को ₹ 5,945 करोड़ छात्रवृत्ति के रूप में प्रदान की गई है।
— उन्होंने वर्षवार आंकड़े भी बताए ताकि यह दिख सकें कि छात्रवृत्ति राशि समय के साथ कैसे बढ़ी है।
उद्देश्य और महत्व-Yogi
इस हस्तांतरण के पीछे कई उद्देश्य और लाभ निहित हैं:
शिक्षा में समावेश (Inclusion)
यह प्रयास छात्रों के वित्तीय बोझ को कम करने का है ताकि वे अपनी पढ़ाई जारी रख सकें और शिक्षा न छोड़े। विशेष रूप से गरीब व पिछड़े वर्गों के लिए यह मदद महत्वपूर्ण है।

देर और वंचना को समाप्त करना
देर या बिचौलियों के कारण वंचित छात्रों को न्याय दिलाना — इस वितरण ने इस समस्या को दूर करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।पारदर्शिता और जवाबदेही
पैसा सीधे बैंक खातों में जाने से भ्रष्टाचार व बिचौलियों की भूमिका कम होगी। सत्यापन तकनीक और AI आधारित सिस्टम से यह सुनिश्चित करना कि योग्य छात्र ही लाभ उठाएं।समय पर सहायता
समय से पहले वितरण करना छात्रों को पढ़ाई के लिए आवश्यक संसाधन तुरंत उपलब्ध कराता है — इससे वे पुस्तक, फीस, सामग्री आदि समय रहते खरीद सकें।राजनीतिक संदेश एवं जनहित छवि
इस तरह की घोषणाएँ सरकार के शिक्षा समर्थक छवि को मजबूत करती हैं, और छात्रों तथा आम जनता में लोकप्रियता बढ़ाती हैं।
चुनौतियाँ, आलोचना व सीमाएँ-Yogi
लाभार्थी चयन
यह सुनिश्चित करना कि सिर्फ योग्य छात्र ही लाभ पाएं — अगर डेटा अपूर्ण है तो कई योग्य छात्र वंचित रह सकते हैं।डेटा सत्यापन की खामियाँ
AI एवं सत्यापन प्रणाली में यदि त्रुटि हो जाए, तो कुछ छात्रों के खाते “लॉक” हो सकते हैं या राशि न पहुँच सके। उदाहरण के लिए, समाचारों में कहा गया है कि पहले SC/ST छात्रों को छात्रवृत्ति नहीं मिली क्योंकि संस्थानों ने डेटा समय पर अपलोड नहीं किया।

भविष्य की प्रतिबद्धता
यह एक बड़ा कदम है, लेकिन यह आवश्यक है कि आने वाले वर्षों में यह जारी रहे और राशि व छात्र संख्या समय के साथ बढ़ती जाए।लाभार्थियों को जागरूक करना
बहुत से छात्र इस तरह की घोषणाओं के बारे में जानते नहीं हैं, या बैंक खाता, आधार आदि संबंधी बाधाएँ हो सकती हैं।नियमित निगरानी और जवाबदेही
राशि ट्रांसफर हो जाने मात्र से काम समाप्त नहीं हो जाता — यह देखना होगा कि छात्र ने रकम सही उपयोग की या नहीं, और यदि कोई शिकायत हो तो उसकी सुनवाई कैसे हो।
₹ 89.96 करोड़ की इस बड़ी राशि का हस्तांतरण और लगभग 3.96 लाख छात्रों को लाभ पहुँचाना एक महत्वाकांक्षी कदम है। इससे यह दिखता है कि राज्य सरकार शिक्षा को प्राथमिकता दे रही है और समय पर सहायता देना चाहती है।
लेकिन इस कदम की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि:
चयन प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी हो,
तकनीकी प्रणाली में त्रुटि न्यूनतम हो,
योजनाएँ निरंतर और दीर्घकालिक हों,
लाभार्थियों को सही जानकारी मिले, और
सरकार जवाबदेह बनी रहे।
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