Supreme Court
पृष्ठभूमि: वायु प्रदूषण और पटाखों का प्रभाव
दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र (National Capital Region) भारत के उन हिस्सों में है जहाँ वायु गुणवत्ता अक्सर खतरनाक स्तर तक गिर जाती है, विशेषकर सर्दियों में।
दिवाली के समय पटाखों की बौछार, कृषि अवशेष जलाना (stubble burning), जमीनी धूल, वाहनों के प्रदूषण आदि मिलकर वायु गुणवत्ता को और अधिक प्रभावित करते हैं।
अदालतों ने यह माना है कि “साफ हवा में रहने का अधिकार” नागरिकों का एक मूलभूत अधिकार है, जो कि संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) से जुड़ा है। इसलिए न्यायालय यह सुनिश्चित करना चाहता है कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक उत्सवों की आज़ादी व पर्यावरण सुरक्षा के बीच संतुलन बन सके।
Supreme Court के आदेश और प्रतिबंध
नीचे सुप्रीम कोर्ट के मुख्य निर्णय और आदेशों का क्रम है, जो पटाखों के उपयोग को लेकर दिल्ली‑एनसीआर में लागू हैं:
| तारीख / अवधि | आदेश / निर्णय | विशेषताएँ / प्रतिबंध |
|---|---|---|
| अप्रैल 2025 | सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष‑भर का प्रतिबंध लगाया | अदालत ने आदेश दिया कि दिल्ली‑एनसीआर में पटाखों की “उपयोग, बिक्री, भंडारण और निर्माण” पर पूरी तरह बैन होगा। |
| उसी समय | अदालत ने यह कहा कि बैन सिर्फ कुछ महीनों तक सीमित करना पर्याप्त नहीं है | आदेशों में कहा गया कि केवल दिवाली या तीन-चार महीने का प्रतिबंध पर्याप्त नहीं क्योंकि लोग पहले खरीद-भंडार कर लेते हैं। |
| सितंबर 2025 | निर्माण की अनुमति, पर बिक्री पर रोक | सुप्रीम कोर्ट ने यह अनुमति दी कि यदि कांच “ग्रीन क्रैकर्स” (नियंत्रित प्रदूषण वाले पटाखे) हों और NEERI / PESO द्वारा प्रमाणित हों, तो उनका निर्माण हो सकता है, लेकिन उनका NCR क्षेत्र में बिक्री न हो, जब तक आगे का आदेश न हो |
| अक्टूबर 2025 | दिवाली अवसर पर “पायलट आधार पर” सीमित पटाखों की अनुमति का संकेत | सुनवाई के दौरान अदालत ने यह संकेत दिया कि दिवाली के समय परीक्षण के आधार पर कुछ हरित पटाखों की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन यह आदेश अभी अंतिम रूप नहीं ले चुका है। |
| पूर्व में | राज्यों को NCR में पटाखों पर नियंत्रण लागू करने का निर्देश | कोर्ट ने हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान को निर्देश दिया कि वे दिल्ली की तरह पटाखों पर रोक लगाएं और पर्यावरण अधिनियम (Environment Protection Act) की धारा 5 के तहत कदम उठाएँ। |
Supreme Court “दिवाली की सजा” — क्या और कैसे?
जब आप कह रहे हैं “पटाखे फोड़ने को दिवाली की सजा बताया”, हो सकता है यह अभिव्यक्ति रूपक या लोकसमझ हो कि कोर्ट ने पटाखों को पूरी तरह से दंडित कर रखा है। लेकिन विस्तार में देखें:
कोर्ट ने ऐसा आदेश नहीं दिया कि डिफॉल्ट रूप से दिवाली पर पटाखे फोड़ने वाले सभी को “सज़ा” होगी।
लेकिन यदि कोई व्यक्ति पटाखों का उपयोग, बिक्री या भंडारण करता है, जो बैन का उल्लंघन है, तो वह कानूनी कार्रवाई, जुर्माना, या अन्य दंडों के दायरे में आ सकता है।
उदाहरण के लिए, यूपी सरकार ने NCR क्षेत्र में पटाखों की बिक्री/उपयोग पर प्रतिबंध लगाने का आदेश किया है जिसमें उल्लंघन पर पाँच साल की जेल या एक लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को चेतावनी दी है कि वे “scrupulous implementation” (संवेदनशील एवं सख्ती से पालन) करें और यदि आदेशों का पालन न हो तो अवमानना (contempt) की कार्रवाई हो सकती है।
इस प्रकार, पटाखा फोड़ना अब “नियम उल्लंघन” की श्रेणी में आता है, और अदालत एवं राज्य सरकारें इसे नियंत्रित करने के लिए दंडात्मक प्रावधान लागू कर सकती हैं।
Supreme Court चुनौतियाँ और विवाद
यहाँ कुछ चुनौतियाँ और विवाद हैं:
नियंत्रण और प्रवर्तन
बैन के निर्देश जारी करना आसान है, लेकिन उनका पालन करना और उल्लंघन पर कार्रवाई करना कठिन।
कभी-कभी पटाखे पहले खरीदे जाते हैं और बाद में फोड़े जाते हैं, जिससे वर्षभर प्रतिबंध से बचना संभव हो जाता है।
“ग्रीन पटाखों” (कम प्रदूषण वाले) का प्रमाणन, निर्माण एवं निगरानी करना चुनौतीपूर्ण है।
धार्मिक एवं सांस्कृतिक संवेदनाएँ
दिवाली और अन्य त्योहारों में लोगों की परंपरा और उत्सव भावना मजबूत है। कई लोग इसे धार्मिक क्रिया मानते हैं।
न्यायालय को यह संतुलन बनाना है: अधिकारों की रक्षा (उत्सव मनाने की आज़ादी) और पर्यावरण संरक्षण।
आजीविका और उद्योग हित
पटाखों की صنعت में लाखों लोगों का रोजगार जुड़ा है। यदि बिक्री और उपयोग पूरी तरह बंद हो जाए तो उद्योग बंद हो सकता है।
इसलिए न्यायालय ने यह विचार किया है कि निर्माण की अनुमति हो ताकि उद्योग पूरी तरह बंद न हो।
निर्धारित ग्रीन पटाखों की सीमाएँ
ग्रीन पटाखे भी पूरी तरह प्रदूषण रहित नहीं होते; उनका प्रदूषण कम होता है, लेकिन पूरी तरह नहीं निकलता।
यह साबित करना कि उनका प्रदूषण “न्यूनतम” है, वैज्ञानिक रूप से मापन योग्य और स्वीकार्य है, एक कठिन प्रश्न है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली‑एनसीआर में पटाखों पर कड़ी पाबंदियाँ लगाई हैं, और कई मामलों में पूर्ण प्रतिबंध जारी किया है।
“दिवाली की सजा” जैसा कोई शाब्दिक आदेश नहीं है, लेकिन पटाखों का उपयोग अब अवैध हो गया है और उल्लंघन करने वालों पर दंडात्मक कार्रवाई की संभावना है।
अदालत का रुख यह है कि हम साफ हवा का अधिकार और उत्सव मनाने की आज़ादी दोनों का संतुलन बनाएँ।
भविष्य में अदालत दिवाली के अवसर पर कुछ पायलट/नियमित पटाखों की अनुमति देने पर विचार कर सकती है, लेकिन यह अभी स्पष्ट नहीं है।
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