PM नरेंद्र मोदी
PM नरेंद्र मोदी जी ने इस वर्ष दिवाली और शादी-त्योहारों के सीज़न को एक विशेष अवसर के रूप में देखा है, जिसमें उन्होंने देशवासियों से “स्वदेशी उत्पाद खरीदें” करने का आग्रह किया है।
यह आग्रह सिर्फ एक उपभोक्ता-चयन की अपील नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे सामाजिक-आर्थिक और राष्ट्र-निर्माण सम्बंधित उद्देश्य हैं। इस लेख में हम इस अपील को विभिन्न पक्षों से समझेंगे: क्या कहा गया, क्यों कहा गया, क्या मायने हैं, इसके सामाजिक-आर्थिक प्रभाव, व्यक्तिगत उपभोक्ता के लिए सुझाव, और संभावित चुनौतियाँ भी।
1. PM द्वारा की गई अपील – क्या कहा गया?
PM मोदी ने सोशल मीडिया (विशेषकर ‘X’ प्लेटफॉर्म) के माध्यम से और त्योहारी शुभकामनाओं के सन्दर्भ में निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया है:
उन्होंने कहा: “आइए इस त्योहारी मौसम को 140 करोड़ भारतीयों की मेहनत, उनकी रचनात्मकता और नवाचार का जश्न मनाकर मनाएं।”
उन्होंने कहा: “चलिए भारतीय उत्पाद खरीदें और गर्व से कहें – ‘गर्व से कहो ये स्वदेशी है!’”
साथ ही यह संदेश भी दिया गया कि आप जो खरीदारी करें, वह सोशल मीडिया पर साझा करें, जिससे दूसरों को प्रेरणा मिले।
उन्होंने त्योहारी अवसर (दिवाली आदि) को सिर्फ आभूषण, सजावट या उपहार-खरीदारी का समय नहीं, बल्कि एक स्वदेशी-चयन का अवसर बताया है।
इस प्रकार, यह अपील तीन प्रमुख सतहों पर है: (1) खरीदारी करते समय स्वदेशी-उत्पाद को प्राथमिकता देना, (2) गर्व के साथ इसे चुनना एवं बताना, (3) इस चयन को सामाजिक रूप से साझा करना।

2. क्यों कहा गया? — पृष्ठभूमि एवं उद्देश्य
आत्मनिर्भर भारत और “वोकल फॉर लोकल”
PM ने बार-बार “आत्मनिर्भर भारत (Atmanirbhar Bharat)” तथा “वोकल फॉर लोकल (Vocal for Local)” की माँग उठाई है।
स्वदेशी-उत्पाद को बढ़ावा देना, घरेलू उद्योग, कुटीर एवं हस्तशिल्प को समर्थन देना इन पहलों का आधार है।
त्योहारी सीज़न में खरीद-पत का बढ़ना
दिवाली, दानतेरस, शादी-सत्र आदि के मौकों पर खरीदारी बहुत बढ़ जाती है — उपहार, सजावट, वस्त्र-गहने, होम-सजावट, इलेक्ट्रॉनिक्स आदि। इसी दौरान “स्वदेशी खरीदारी” को यदि बढ़ावा मिले, तो यह देश की अर्थव्यवस्था, रोजगार एवं स्थानीय उद्यमिता के लिए अवसर बन जाती है।
अर्थव्यवस्था-रोजगार और समावेशन
स्वदेशी उत्पाद लेने से पैसा देश में घूमता है—उद्योग-कारखाने, कारीगर, MSME (माइक्रो, स्मॉल, मीडियम उद्यम) लाभान्वित होते हैं। यह न सिर्फ आर्थिक रफ्तार बढ़ाने को है बल्कि सामाजिक समावेशन, ग्रामीण-शहरी उद्यमिता, महिला-कारीगरों को सशक्त बनाने का माध्यम भी है।
राष्ट्र-गौरव एवं सामाजिक-मानसिक घटक
उपभोक्ता-चयन में “हम देश के उत्पाद लेते हैं”-भाव शामिल होता है, जो राष्ट्रीय गर्व, पहचान, स्थानीय संस्कृति के प्रति सम्मान को बढ़ावा देता है। मोदी ने इसे खुले रूप से कहा है: गर्व से कहें — “ये स्वदेशी है”!
3. इसके मायने: व्यक्तिगत एवं सामाजिक-आर्थिक
व्यक्तिगत उपभोक्ता के लिए
आप जब किसी सजावटी वस्तु, उपहार, वस्त्र, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण आदि खरीदते हैं, तो दो-तीन प्रश्न विचार करने लायक हैं:
यह वस्तु कहाँ बनी है? (भारत में बनी है या आयातित?)
यदि भारत में बनी है — किस राज्य/शहर/उद्यम में बनी है?
क्या यह स्थानीय कारीगर/उद्योग को लाभ पहुँचा रही है?
उपभोक्ता-गौरव: “मैं स्वदेशी चुन रहा/रही हूँ”-मानसिकता बनती है जिससे चयन-चिंतन (buying consciously) का स्तर बढ़ता है।
सामाजिक साझेदारी: यदि सोशल मीडिया पर यह आदत साझा की जाए (“मैंने यह स्वदेशी लिया”) तो अन्य भी प्रेरित होते हैं, सृजन-श्रृंखला बढ़ती है।
सामाजिक-आर्थिक मायने
रोजगार में वृद्धि: घरेलू उत्पादन बढ़ेगा → कारीगरों, मैन्युफैक्चरिंग श्रमिकों, MSME-उद्यमियों को वृद्धि होगी।
आय में वृद्धि: उपभोक्ता-रुपए देश में रहेंगे, विदेशी आयापूर्ति कम होगी।
आर्थिक विविधीकरण: अधिक उद्योग, अधिक नवाचार, स्थानीय आपूर्ति-शृंखला मजबूत होगी।
सामाजिक समावेशन: ग्रामीण-महिला-उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा जिसे “स्वदेशी” आंदोलन समर्थन देता है।
राष्ट्र-गौरव & संस्कृति: भारतीय उत्पादों की पहचान बढ़ेगी, लोक-शिल्प एवं पारंपरिक तकनीकों का पुनरुत्थान होगा।
4. त्योहारी व शादी-मौसम में “स्वदेशी खरीदारी” कैसे करें?
चरण-बद्ध सुझाव
योजना बनाएं
खरीदारी से पहले सूची बनाएं — उपहार, सजावट, वस्त्र-गहने, होम-सजावट, इलेक्ट्रॉनिक्स।
सूची में यह चिन्हित करें कि किन मदों को “निर्विवाद स्वदेशी” होना चाहिए।
उत्पाद की उत्पत्ति जांचें
“मेड इन इंडिया”, “स्वदेशी”, “भारत निर्मित” खाँच देखें।
लेबल-बारकोड देखें: ‘IND’ आरंभित कोड या भारत-निर्मित इंगित करता हो।
विक्रेता से पूछें: यह उत्पाद किस राज्य/शहर का है? क्या यह स्थानीय कारीगर-उद्योग का है?
स्थानीय बाजार-उद्यमों को प्राथमिकता दें
बड़े ब्रांड-शोरूम के बजाय स्थानीय कारीगर-बाजार, हाट-मेलों, MSME-उद्यमों को देखें।
यदि ऑनलाइन खरीद रहे हैं, तो स्थानीय ब्रांड्स चुनें, “स्वदेशी” टैग वाले विकल्प देखें।
उपहार एवं सजावट-वस्तुओं में स्वदेशी चयन
शादी-महोत्सव, दिवाली-सजावट आदि में प्लास्टिक-आयातित उत्पादों की बजाय स्थानीय हस्तशिल्प को चुनें।
उपहार में imported आइटम कम रखें; स्वदेशी गहने, होम-डेकर, कपड़े-वस्त्र चुनें।
सोशल मीडिया में भागीदारी
खरीदारी के बाद सोशल मीडिया पर चित्र/व्हाट्सएप स्टेटस साझा करें – “मैंने लिया स्वदेशी…” इसकी प्रेरणा बने। मोदी जी ने इस बार इसी आग्रह को दोहराया है।
बुद्धिमानी से खर्च करें
स्वदेशी चुनते समय कीमत, गुणवत्ता, उपयुक्तता देखें — “स्वदेशी मतलब महंगा” नहीं, बल्कि मूल्य-उचित एवं देश-हित में चयन।
प्रतिक्रिया-और-वापसी नीति देखें
यदि स्थानीय ब्रांड ले रहे हैं, तो देखें ग्राहक-सेवा, वारंटी/रिटर्न नीति; इससे भरोसा बढ़ता है।
शादी-मौसम-खरीदारी के लिए विशेष सुझाव
शादी-सत्र में फैशन-वियर (संगठनों, लहंगे-सूट) में स्वदेशी डिजाइनों को चुनें।
सजावट-वस्तुओं (लाइटिंग, होम-डेकोर, गिफ्ट-बैग) में स्थानीय निर्माता-ब्रांड्स देखें।
“थैंक्स-गिफ्ट” और “स्मृति-वस्तुओं” में आयातित की बजाय हस्तशिल्प चुनें।
विवाह स्थल-सज्जा में बचे-स्वदेशी विकल्पों पर विचार करें — उदाहरण के लिए सूखे फूलों की सजावट, कागज़-हैंडल बैग्स, स्थानीय कैंडल्स।
शादी के निमंत्रण-कार्ड, मेन्यू कार्ड, सॉविनियर आदि में पर्यावरण-अनुकूल एवं स्थानीय उत्पादित विकल्प देखें।
5. चुनौतियाँ और सावधानियाँ
चुनौतियाँ
लेबलिंग व प्रमाणिकता: सभी “स्वदेशी” लेबल्स भरोसेमंद नहीं हो सकते — कभी-कभी आयातित सामान को “स्वदेशी” दिखाया जा सकता है।
— उदाहरण: कुछ “स्वदेशी” लेबल वाले ग्राफिक कार्ड वायरल हुए थे जो भ्रामक थे।मूल्य-उत्पादकता का अंतर: कभी-कभी विदेशी उत्पादों की तुलना में घरेलू विकल्प महंगे या उत्पादन-क्षमता में कमजोर हो सकते हैं, जिससे ग्राहक विकल्प चुनने में हिचक सकते हैं।
उपलब्धता व विविधता: विशेष रूप से छोटे शहर-गाँवों में “मेड इन इंडिया” विकल्पों की विविधता कम हो सकती है।
ब्रांड-विश्वसनीयता: नए स्वदेशी ब्रांड्स में भरोसा बनाने में समय लगता है; ग्राहक की सुविधा व सेवा-प्राप्ति महत्वपूर्ण होगी।
सावधानियाँ
लेबल तथा निर्माता-विवरण जरूर देखें।
“स्वदेशी” का मतलब सिर्फ भारत में असेंबली नहीं – समग्र उत्पादन भारत में होना बेहतर मापा जाता है।
कीमत-तुलना करें — स्वदेशी चुनिए, लेकिन यह सुनिश्चित करें कि गुणवत्ता व मूल्य-संतुलन ठीक हो।
खरीद के बाद स्थानीय उद्यम/कारीगर को फीडबैक दें — इससे व्यवसाय-सुधार व भरोसा बढ़ेगा।
सोशल मीडिया पर शेयर करते समय वास्तविक चित्र व अनुभव साझा करें — ऐसा करना अपील को भरोसेमंद बनाता है।
6. आपके लिए एक रूपरेखा — क्या-करें, क्यों-करें
| क्र. | क्या करें | क्यों करें |
|---|---|---|
| 1. | कान-उत्पादों की सूची बनाएं (दिवाली-खरीदारी, शादी-उपहार) | योजना बनाने से बचत व स्वदेशी चुनने में मद्द मिलती है |
| 2. | भारत-निर्मित विकल्प खोजें | स्थानीय उद्योग को बढ़ावा और राष्ट्र-गौरव |
| 3. | स्थानीय मार्केट/हाट देखें | छोटे उद्यमों को आर्थिक रूप से सशक्त करना |
| 4. | सोशल मीडिया पर साझा करें | अन्य को प्रेरित करना व सामाजिक आंदोलन में भागीदारी |
| 5. | गुणवत्ता-वित्तीय संतुलन देखें | देशी चुनना है, लेकिन विवेक के साथ |
| 6. | बच्चों व परिवार को इस विचार से जोड़ें | भविष्य-उपभोक्ता-चेतना बनाना |
PM मोदी द्वारा इस दिवाली-और-शादी-सीज़न में की गई “स्वदेशी खरीदें” की अपील सिर्फ एक त्योहारी विचार नहीं है, बल्कि यह एक सोचा-विचारा उपभोक्ता-चुनाव, स्थानीय उद्योग-रणनीति, रोजगार-उत्थान, और राष्ट्रीय आत्म-विश्वास का संगम है।
हम में से प्रत्येक अगर इस अपील को गंभीरता से ले और अपनी-खरीदारी में थोड़ा-बहुत बदलाव करें—तो इसका प्रभाव बहुत व्यापक हो सकता है:
कौशल व कारीगरी को सशक्त करना।
देश के अंदर धन को प्रवाहित करना।
स्थानीय उद्योग-विकास को गति देना।
उपभोक्ता-चेतना व गर्व की भावना जगाना।
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