Satish

फ़रवरी 1951

फ़रवरी 1951 में जन्मे Satish Shah हिंदी फ़िल्म-टीवी जगत के उन कलाकारों में से हैं जिन्होंने हास्य और आत्मीयता दोनों को एक साथ अपनी कला में समाहित किया। इनके कुछ मुख्य बिंदु:

  • उन्होंने थिएटर से शुरुआत की, बाद में टीवी और फिल्मों में काम किया।

  • टीवी शो की दुनिया में Sarabhai vs Sarabhai में ‘इन्द्रवदन साराभाई’ की भूमिका ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई।

  • फिल्मों में Jaane Bhi Do Yaaro (1983) में कमीशनर डी’मेलो की भूमिका चर्चित रही।

  • उनके काम में कमी नहीं– हास्य, चरित्र-भूमिका और कभी-कभी गंभीर भूमिका भी उन्होंने निभाई।

निधन और उसके बाद की जानकारी

  • Satish Shah का देहांत 25 अक्टूबर 2025, उम्र 74 वर्ष में हुआ।

  • प्रारंभिक रिपोर्ट्स में बताया गया कि वह किडनी फेलियर के कारण चले गए।

  • बाद में उनके ऑन-स्क्रीन बेटे (Rajesh Kumar) ने स्पष्ट किया कि वास्तविक कारण सडन हार्ट अटैक था।

  • अस्पताल की ओर से बताया गया कि उन्हें घर पर बेहोश पाया गया, एम्बुलेंस लाई गई, सीपीआर दी गई लेकिन बचाया नहीं जा सका।

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उस आखिरी मैसेज — क्या कहा गया था?

आपने जो मैसेज लिखा है — “This has become even more unbelievable” — उसकी पुष्टि स्रोतों में नहीं मिल पाई है।
वाकई में, निम्न बातें सामने आई हैं:

  • उनके निर्माता J D Majethia ने बताया कि Shah ने सुबह लगभग 11 बजे एक मित्र (फिल्मकार) से बात की थी और फिर 12:57 बजे उनकी ऑन-स्क्रीन पत्नी Ratna Pathak Shah से फोन पर बातचीत हुई।

  • बातचीत में उन्होंने कहा था, “Look, I’m so healthy.”

  • हालांकि, जहां तक संकेत है — कोई भरोसेमंद स्रोत नहीं कह रहा कि उन्होंने “This has become even more unbelievable” जैसा टेक्स्ट भेजा हो। सूत्रों में ऐसा कोई विवरण नहीं मिला।

इसलिए यह कहना सुरक्षित होगा कि उस विशेष मैसेज-वाक्य की स्थिति अस्पष्ट है और मीडिया में पुष्टि नहीं हुई है।

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उनके जीवन-कार्य से कुछ सीखें

  1. हास्य में गंभीरता — Satish Shah ने साबित किया कि हास्य केवल मज़ाक नहीं बल्कि जीवन को हल्केपन से देखने का तरीका हो सकता है।

  2. विविधता में सहजता — उन्होंने टीवी सीरियलों से लेकर फिल्मों तक काम किया, अलग-अलग भूमिका निभाई।

  3. समय की अनिश्चितता — उनका अचानक जाना हमें याद दिलाता है कि “अब और आज” की कीमत है। किसी से कहने का इंतज़ार मत करो।

  4. कला और रिश्ता एक-साथ चलते हैं — उनसे जुड़ी यादें-बातें सिर्फ कलाकार तक सीमित नहीं, बल्कि उन रिश्तों का भी हिस्सा हैं जिनमें हम हैं।

Satish Shah ने मनोरंजन की दुनिया में वह अमिट छाप छोड़ी है जिसे याद करना आसान नहीं है। उनकी अंतिम बातचीत और संदेशों का सच शायद हमेशा रहस्य बना रहेगा, लेकिन उनकी कला और हँसी-मज़ाक का असर हमेशा रहेगा।

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