Thane

दुखद Thane फ्लाईओवर हादसा: ड्राइवर को दिल का दौरा पड़ा, बेकाबू कार ने 4 लोगों की जान ली

सोचिए—टायरों की चीखती आवाज़ और अचानक ऐसा झटका जो हवा को हिला दे। Thane के एक व्यस्त फ्लाईओवर पर एक कार अचानक नियंत्रण खो देती है और ट्रैफिक में रुके बाइक और स्कूटर सवारों पर चढ़ जाती है। कुछ ही सेकंड में चार ज़िंदगियाँ खत्म हो जाती हैं—सिर्फ इसलिए कि कार चला रहे व्यक्ति को गाड़ी चलाते समय दिल का दौरा पड़ गया।
यह घटना बताती है कि सड़क पर मेडिकल इमरजेंसी का खतरा कितना घातक साबित हो सकता है, खासकर Thane जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में। आइए समझते हैं कि यह हादसा कैसे हुआ, इतना भयानक क्यों निकला, और क्या सुरक्षा खामियाँ उजागर हुईं।

हादसे की कड़ी: पल-पल की दर्दनाक कहानी

प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और शुरुआती पुलिस निष्कर्ष

आसपास मौजूद लोगों ने देखा कि कार अचानक लहराने लगी और बेकाबू होकर तेज़ी से आगे बढ़ी। एक स्कूटर सवार ने बताया कि वाहन अचानक लेन बदलने लगा, जैसे ड्राइवर उसे संभाल नहीं पा रहा हो। गवाहों ने बताया कि ड्राइवर का चेहरा पीला पड़ गया था, वह स्टीयरिंग कसकर पकड़े हुए था, लेकिन कार को रोक नहीं सका।

पुलिस मौके पर पहुँची और देखा कि ड्राइवर बेहोश था—बाद में पुष्टि हुई कि उसे दिल का दौरा पड़ा था। शुरुआती रिपोर्टों में पता चला कि कार ने तीन दो–पहिया वाहनों को सीधे टक्कर मारी और उन्हें बैरियर से चिपका दिया। न शराब, न फोन—सिर्फ एक अचानक आई स्वास्थ्य समस्या ने नियंत्रण छीन लिया।

अधिकारियों ने लगभग 50 फीट तक फैले स्किड मार्क्स पाए, जो दिखाते हैं कि ब्रेक लगाने की कोशिश की गई थी, पर बेअसर रही। Thane फ्लाईओवर हादसा एक बार फिर पीक ऑवर्स में फ्लाईओवर की असुरक्षा उजागर करता है।

ड्राइवर को दिल का दौरा पड़ने से गाड़ी चार वाहनों से टकराई, 4 की मौत - Sabguru News

पीड़ितों की पहचान और हादसे के बाद की स्थिति

जिन चार लोगों की मौत हुई, वे आम लोग थे—कोई दफ्तर से लौट रहा था, कोई काम पर जा रहा था। उनमें दो युवा ऑफिस कर्मचारी, एक 40 वर्षीय डिलीवरी बॉय और एक कॉलेज पास–आउट छात्र शामिल था। स्थानीय मीडिया ने नाम जारी किए, लेकिन परिवारों पर अभी गहरा सदमा है।

रेस्क्यू टीमें 10 मिनट में पहुंच गईं, लेकिन तब तक नुकसान हो चुका था। बाइक और कार की म twisted metal के बीच शव फंसे थे। ट्रैफिक घंटों जाम रहा; नीचे की सड़कें भी ठप हो गईं। बचाव दल ने कटिंग टूल से फंसे लोगों को निकालने में काफी मेहनत की।

यह जगह अचानक शांति से चीख-पुकार में बदल गई—एक चेतावनी कि फ्लाईओवर पर एक छोटी गलती भी बड़ी आपदा बन सकती है।

मेडिकल इमरजेंसी: सड़क दुर्घटनाओं का छिपा हुआ कारण

दिल का दौरा और वाहन नियंत्रण—खतरनाक रिश्ता

दिल का दौरा अचानक आता है—हाथ सुन्न, आँखें धुंधली, पैर पेडल पर टिकते नहीं। इस मामले में ड्राइवर को शायद टक्कर से कुछ सेकंड पहले ही दर्द हुआ होगा, लेकिन गाड़ी साइड में लगाने का समय नहीं बचा।

डॉक्टर कहते हैं कि ऐसे कार्डियक इवेंट अक्सर 50+ उम्र वालों में बिना चेतावनी के हो सकते हैं।
WHO के मुताबिक, दुनिया में लगभग 3% सड़क हादसे मेडिकल कारणों से होते हैं। भारत में NCRB डेटा बताता है कि हर साल 1,000 से अधिक मौतें ड्राइवरों की अचानक स्वास्थ्य समस्या से जुड़ी होती हैं।

मुम्बई–ठाणे जैसे तनावभरे और लंबे सफ़र वाले क्षेत्रों में जोखिम और बढ़ जाता है।
इसलिए ड्राइवरों को चेतावनी: किसी भी असहजता को नजरअंदाज न करें—एक जांच आपकी और दूसरों की जान बचा सकती है।

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वाहन सुरक्षा बनाम दो–पहिया वाहनों का खतरा

कारों में एयरबैग, क्रम्पल ज़ोन और कई सुरक्षा फीचर होते हैं, लेकिन बाइक सवार लगभग असुरक्षित रहते हैं। इस हादसे में चारों पीड़ित दो–पहिया पर थे और कार की टक्कर उनके लिए जानलेवा साबित हुई। हेलमेट के बावजूद गति और टक्कर की दिशा बहुत घातक थी।

फ्लाईओवर पर तेज़ मोड़ और संकरी लेन इस खतरे को और बढ़ाते हैं। न कोई मुलायम शोल्डर, न बचाव की जगह—बस बैरियर या दूसरी लेन।
विशेषज्ञ मानते हैं कि बेहतर डिवाइडर और नियंत्रित स्पीड ऐसे हादसों को रोक सकते हैं।

हादसे के बाद नियमों और ढाँचे पर सवाल

ड्राइवरों के स्वास्थ्य परीक्षण—क्या ज़रूरी और क्या कमी?

भारत में कमर्शियल ड्राइवरों के लिए मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट जरूरी है, लेकिन निजी कार चलाने वालों के लिए यह सख्त नहीं है। ठाणे हादसे में ड्राइवर निजी वाहन चला रहा था।

विशेषज्ञ सुझाव देते हैं:

  • 40+ उम्र वालों के लिए वार्षिक हार्ट स्क्रीनिंग

  • EKG / स्ट्रेस टेस्ट अनिवार्य

  • लाइसेंस रिन्यूअल से पहले स्वास्थ्य मूल्यांकन

अगर ऐसे नियम लागू हों, तो कई हादसे रोके जा सकते हैं।

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Thane फ्लाईओवर की डिजाइन और बैरियर की मजबूती

Thane फ्लाईओवर 90 के दशक में बना था और इसके बैरियर्स पुराने डिजाइन के थे। कार ने बैरियर के कमजोर हिस्से को तोड़ दिया, जिससे जहरीली स्थिति बनी। यदि ऊर्जा अवशोषित करने वाले आधुनिक बैरियर लगे होते, तो टक्कर का असर कम हो सकता था।

कई शहरों में फ्लेक्सिबल बैरियर से मौतें 40% तक कम होती हैं।
Thane में अब इंजीनियर पूरे ढांचे की समीक्षा कर रहे हैं।

कानूनी पहलू और मुआवज़े पर ध्यान

मेडिकल कारण से हुए हादसों में दोष तय कैसे होता है?

कई मामलों में ऐसे हादसों को ‘अनिवार्य’ माना जाता है, अगर ड्राइवर को कोई पूर्व संकेत नहीं था।
2018 में दिल्ली में स्ट्रोक के चलते हुए हादसे में भी अदालत ने ड्राइवर को दोषी नहीं माना था।

फिर भी जांच यह देखती है:

  • क्या ड्राइवर को पहले से दिल की बीमारी थी?

  • क्या उसने चेतावनियों को नजरअंदाज किया?

यह जिम्मेदारी तय करने में अहम होता है।

बीमा दावे और पीड़ितों का मुआवजा

थर्ड-पार्टी बीमा ऐसे मामलों में भी पीड़ितों को कवर करता है।
पीड़ित परिवार Motor Vehicles Act के तहत 5–10 लाख रुपये तक के दावे कर सकते हैं।
लेकिन प्रक्रिया लंबी होती है—FIR, मेडिकल रिपोर्ट, गवाह—सब जरूरी।

सभी ड्राइवरों को सलाह:

  • पर्सनल एक्सीडेंट कवर जरूर लें

  • नीतियाँ समय पर अपडेट रखें

  • परिवार को बीमा प्रक्रिया सिखाएँ

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महानगरों में सड़क सुरक्षा के लिए सबक

Thane फ्लाईओवर का यह हादसा बताता है कि ड्राइवर की अचानक सेहत बिगड़ना, तेज़ रफ्तार, दो–पहिया की असुरक्षा और कमजोर ढांचा मिलकर कैसे मौत का कारण बन जाते हैं।
चार परिवार उजड़ गए—सिर्फ कुछ सेकंड की असहायता के कारण।

हम क्या सीख सकते हैं?

  • समय पर स्वास्थ्य जांच

  • दो–पहिया पर सुरक्षा उपकरण

  • बेहतर फ्लाईओवर डिजाइन

  • उचित बीमा कवरेज

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