इंडिगो फ्लाइट कैंसिलेशन: Driver की कमी, टेक्नोलॉजी गड़बड़ियाँ और एयरपोर्ट भीड़ ने बनाई बड़ी अव्यवस्था
सोचिए, आपने परिवार के साथ यात्रा की प्लानिंग की हो या किसी जरूरी मीटिंग के लिए निकल रहे हों, और आखिरी पल में पता चले कि आपकी IndiGo फ्लाइट रद्द हो गई। एक ही दिन में एयरलाइन ने 70 से ज्यादा उड़ानें निरस्त कर दीं, जिससे भारत भर के एयरपोर्ट्स पर हजारों यात्री फँस गए। इस अव्यवस्था की सबसे बड़ी वजह थी Driver की कमी, जिसमें तकनीकी दिक्कतें और भीड़भाड़ से भरे रनवे और टैक्सीवे ने आग में घी डाल दिया।
इसका असर तुरंत दिखा। रिपोर्टों के अनुसार लगभग 10,000 यात्रियों को भारी देरी का सामना करना पड़ा, और दिल्ली व मुंबई जैसे प्रमुख हवाईअड्डों पर अफरा-तफरी मच गई। लोग घंटों जानकारी का इंतज़ार करते रहे—कुछ अपनी कनेक्टिंग फ्लाइट्स और महत्वपूर्ण कार्यक्रमों से चूक गए।
इंडिगो ने अपनी शुरुआती प्रतिक्रिया में क्रू लिमिट्स, अचानक आए ‘सिक डे’, तकनीकी दिक्कतें और एयरपोर्ट कंजेशन को जिम्मेदार ठहराया।
मूल समस्या का विश्लेषण: Driver की कमी सबसे बड़ा कारण
Driver की कमी छोटी शुरू होती है, लेकिन एयरलाइन संचालन में जल्दी ही बढ़कर संकट बन जाती है। इंडिगो में पायलट और केबिन क्रू उस दिन अपने अधिकतम उड़ान-समय सीमा (FDTL) के करीब पहुँच गए, जिससे कई उड़ानों के लिए अनिवार्य स्टाफ उपलब्ध नहीं था।
Driver शेड्यूलिंग की विफलताएँ और रोस्टरिंग गैप्स
यह वैसा ही है जैसे किसी जादूगर के हाथ से एक गेंद गिर जाए और पूरा शो बिगड़ जाए। एक पायलट के बीमार पड़ते ही पूरा दिनचर्या बिगड़ जाती है। IndiGo में रिज़र्व स्टाफ भी इन गैप्स को तुरंत भर नहीं पाया।
अगर किसी उड़ान में देरी हो जाती है, तो Driver की ड्यूटी टाइम लिमिट आगे की उड़ानों को भी प्रभावित करती है। इस तरह कई उड़ानें बिना क्रू के खड़ी रह जाती हैं।
एयरमैनशिप नियमों का डोमिनो इफ़ेक्ट
भारत की DGCA के नियम काफी सख्त हैं। पायलट और क्रू अपनी अधिकतम ड्यूटी टाइम सीमा से आगे उड़ान नहीं भर सकते। एक उड़ान में देरी बाकी सभी उड़ानों को प्रभावित करती है—डोमिनो की तरह।
इंडिगो का लो- कॉस्ट मॉडल बेहद तंग शेड्यूल पर काम करता है। ऐसे में एक छोटी चूक भी 70 फ्लाइट कैंसिलेशन तक ले जा सकती है।
पायलट और केबिन क्रू के मनोबल पर प्रभाव
लंबे समय तक लगातार उड़ानें भरना Driver में थकान और बर्नआउट पैदा करता है। तनाव बढ़ता है, शिकायतें बढ़ती हैं और कभी-कभी अनिवार्य ‘सिक डे’ भी लिए जाते हैं—जो फिर से क्रू की कमी को बढ़ाते हैं।

टेक्नोलॉजी का फेल होना: संकट बढ़ाने वाला दूसरा बड़ा कारण
टेक्नोलॉजी गड़बड़ाए तो सिर्फ ऐप नहीं रुकता—पूरी उड़ान रुक सकती है। इसी दिन इंडिगो की बुकिंग और ग्राउंड ऑपरेशन से जुड़ी कुछ प्रणालियाँ धीमी या बंद हो गईं।
सिस्टम आउटेज और बुकिंग मैनेजमेंट में अफरातफरी
जैसे व्यस्त ट्रैफिक में सिग्नल बंद हो जाए, वैसे ही इंडिगो के टिकट और मैनिफेस्ट सिस्टम में गड़बड़ी ने सबकुछ रोक दिया। क्रू को समय पर डॉक्यूमेंट नहीं मिले—उड़ानें लटक गईं।
ग्राउंड ऑपरेशंस से देरी का फैलता असर
एक चेक-इन कियोस्क के खराब होते ही लाइनें लंबी हो जाती हैं। बोर्डिंग देर से होती है। इससे Driver की ड्यूटी टाइम लिमिट जल्दी समाप्त हो जाती है, और उड़ानें रद्द करनी पड़ती हैं।
एयरलाइन टेक्नोलॉजी की विश्वसनीयता का इतिहास
इंडिगो पहले भी ऐसे IT आउटेज झेल चुका है। 2023 में भी एक बड़ी IT समस्या के कारण देशभर में उड़ानें प्रभावित हुई थीं। इससे पता चलता है कि उनकी टेक इंफ्रास्ट्रक्चर में कुछ कमज़ोरियाँ मौजूद हैं।
एयरपोर्ट कंजेशन: बाहरी कारक जो हालात खराब कर गया
भारत के बड़े एयरपोर्ट पहले से ही क्षमता से ज्यादा फ्लाइट संभाल रहे हैं। पीक आवर में यह भीड़ उड़ान संचालन को बुरी तरह प्रभावित करती है।
बड़े एयरपोर्ट्स पर चरम समय का दबाव
दिल्ली और मुंबई जैसे हवाई अड्डे उड़ानों से ठसाठस भरे रहते हैं। स्लॉट्स की भारी मांग के कारण देरी जल्दी बढ़ती है। इंडिगो का तंग शेड्यूल इससे और बिगड़ गया।
स्लॉट मैनेजमेंट और टर्नअराउंड टाइम का दबाव
फ्लाइट को पार्किंग स्लॉट की जरूरत होती है—अगर एक स्लॉट छूट जाए, अगली फ्लाइट तुरंत नहीं जा सकती। इंडिगो की कम टर्नअराउंड टाइम रणनीति ऐसी भीड़ में टिक नहीं पाती।
एयरसाइड मूवमेंट में बाधाएँ
एक रनवे पर एक समय में सीमित उड़ानें ही आ-जा सकती हैं। टैक्सीवे जाम होने पर देरी और बढ़ जाती है, जिससे क्रू टाइम लिमिट भी टूट जाती है।
वित्तीय और प्रतिष्ठा पर भारी असर
70 उड़ानों का रद्द होना महँगा सौदा है। इंडिगो को यात्रियों को होटल, भोजन और रिफंड देने का खर्च उठाना पड़ता है।

वित्तीय बोझ: मुआवजा और रिफंड
DGCA के नियमों के तहत:
3 घंटे से ज्यादा देरी पर मुआवजा
रद्द उड़ानों पर पूरा रिफंड
जरूरत होने पर होटल की व्यवस्था
इन सबका बोझ एयरलाइन पर ही आता है।
ग्राहक भरोसा और निष्ठा पर असर
इंडिगो की पहचान “ऑन-टाइम” एयरलाइन की है। ऐसी घटनाएँ छवि को नुकसान पहुँचाती हैं। यात्री दूसरी एयरलाइनों की ओर झुकने लगते हैं। सोशल मीडिया पर नाराजगी और भी तेजी से फैलती है।
नियामकीय नजरदारी बढ़ने की संभावना
DGCA इस मामले में अतिरिक्त जांच या ऑडिट कर सकता है। भविष्य में कड़े Driver रिजर्व नियम भी लागू किए जा सकते हैं।
भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने की रणनीतियाँ
Driver रिजर्व बढ़ाना और बेहतर प्लानिंग
पीक सीजन में 20% अतिरिक्त रिजर्व
अनुपस्थिति पैटर्न की निगरानी
रियल-टाइम क्रू मैनेजमेंट टूल्स

बेहतर और रियल-टाइम ऑपरेशनल सॉफ्टवेयर में निवेश
बैकअप सर्वर
क्रू-लोकेशन ट्रैकिंग
नियमित सॉफ्टवेयर टेस्टिंग
भीड़भाड़ वाले एयरपोर्ट्स पर बुनियादी ढाँचे का आधुनिकीकरण
नए रनवे
तेज ATC टेक्नोलॉजी
स्लॉट नियमों में लचीलापन
इंडिगो संकट से मिली सीख
इंडिगो की 70 उड़ानें रद्द होने की घटना बताती है कि कैसे Driver की कमी, तकनीकी गड़बड़ियाँ और एयरपोर्ट भीड़ मिलकर एक बड़ी अव्यवस्था पैदा कर सकते हैं। यह एयरलाइन उद्योग को याद दिलाता है कि मजबूत योजना, पर्याप्त रिजर्व, और विश्वसनीय टेक्नोलॉजी जरूरी हैं।
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