Delhi के लड़के ने सड़क किनारे पड़ी साधारण पत्थर को ₹5,000 की कलात्मक घड़ी में बदला, इंटरनेट हुआ हैरान
सोचिए, Delhi की एक सड़क पर पड़ा एक साधारण सा पत्थर। एक युवा लड़का उसे उठाता है। फिर उसी पत्थर को एक ऐसी खूबसूरत, चलती हुई घड़ी में बदल देता है जिसकी कीमत ₹5,000 लगती है। इस अनोखी अपसाइक्लिंग की कहानी ने इंटरनेट पर हलचल मचा दी है।
कहानी देखते ही देखते वायरल हो गई। सोशल मीडिया पर लोग इसे इसलिए साझा करते रहे क्योंकि यह दिखाती है कि कैसे एक मामूली-सी चीज में भी छुपी होती है अनंत संभावनाएँ। आइए जानें कि इस दिल्ली के लड़के ने यह कैसे किया और यह कहानी इतनी चर्चा में क्यों रही।
आइडिया की शुरुआत: कबाड़ से कमाल तक
रोज़मर्रा में मौके तलाशना
Delhiका यह लड़का अक्सर निर्माण स्थलों के पास से गुजरता था। एक दिन उसकी नज़र एक खुरदुरे, पर मजबूत और आकर्षक आकार वाले पत्थर पर पड़ी। उसने सोचा—यह सिर्फ कचरा नहीं, इससे कुछ बनाया जा सकता है।
इसका चुनाव बहुत सोच-समझकर किया गया था।
पत्थर:
मुफ्त मिल जाते हैं
लंबे समय तक चलने वाले
टिकाऊ और मजबूत
उसके मन में कला और उपयोगिता को मिलाकर कुछ नया बनाने का ख्याल आया।
घर पहुँचकर उसने स्केच बनाए। कुछ साधारण रेखाओं ने पत्थर को घड़ी का रूप देने का आइडिया जन्म दिया। आसानी से मिलना और टिकाऊ होना—इन्हीं कारणों ने उसे प्रेरित किया।
पत्थर को तैयार करना
उसे यह पत्थर Delhi के बाहर एक नदी किनारे मिला। धूल और मिट्टी के बीच पड़ा था। उसने उसे एक बैग में डालकर घर लाया।
सबसे पहले उसने उसे पानी और साबुन से अच्छी तरह धोया। गंदगी आसानी से उतर गई। फिर कई दिनों तक धूप में सुखाया।
दूबारा खुरदुरापन हटाने के लिए उसने उसके किनारों को फाइल से घिसा। धीरे-धीरे पत्थर को संतुलित आकार मिला।
तैयारी में कई घंटे लगे, लेकिन इसी पर पूरी कला की नींव टिकी थी।

पत्थर में घड़ी लगाना
पत्थर में घड़ी लगाना आसान नहीं होता। उसने पास की दुकान से एक छोटा क्वार्ट्ज मैकेनिज़्म खरीदा।
फिर पत्थर में एक छोटा छेद ड्रिल किया ताकि बैटरी और मशीन फिट हो सके। हर कदम बहुत सावधानी से लिया—एक भी दरार नहीं आई।
मजबूत चिपकने वाले ग्लू से उसने मशीन को अंदर फिट किया। पत्थर के नैचुरल आकार में यह तकनीक इतनी अच्छी तरह छिप गई कि देखने में यह कला का टुकड़ा ज्यादा और गैजेट कम लगता था।
कई दिनों तक उसने इसे टेस्ट किया। समय बिल्कुल सही चलता रहा।
₹5,000 की कलाकृति बनाने की प्रक्रिया: हुनर और स्टाइल
पत्थर की नक्काशी और अंतिम रूप देना
छेनी, फाइल और ग्राइंडर जैसे टूल्स से उसने पत्थर में हल्के कर्व्स तैयार किए। हर चोट के साथ पत्थर के अंदर छिपे पैटर्न उभरते गए।
फिर पॉलिश की बारी आई। नरम कपड़े और तेल से उसने पत्थर को चमक दी। ग्रे शेड और प्राकृतिक रेखाएँ निखर गईं।
उसने हल्के से अंकों को उकेरा और ऊपर एक पारदर्शी लेयर चढ़ाई ताकि धूल और घिसावट से बच सके।
घड़ी के पार्ट्स को सलीके से छिपाना
डिज़ाइन का मकसद था—नैचुरल लुक को बिगाड़े बिना टेक्नोलॉजी जोड़ना।
कोई बड़ा डायल नहीं
सिर्फ एक खूबसूरत कटे हुए हिस्से से झाँकती सुइयाँ
अंदर छिपा क्वार्ट्ज मैकेनिज़्म
कोई वायर बाहर नहीं
रस्टिक और मॉडर्न का यह मिश्रण लोगों को खूब पसंद आया।

कीमत कैसे तय हुई?
20+ घंटे का मेहनताना
अनोखा डिज़ाइन (हर पत्थर अलग)
हाथ से बनी वस्तु की प्रीमियम वैल्यू
मार्केट रिसर्च—इसी श्रेणी की अपसाइक्लिंग वस्तुएँ महंगी बिकती हैं
₹5,000 इस कला, मेहनत और uniqueness के लिए उचित कीमत थी।
ऑनलाइन बवाल: क्यों हुआ यह वायरल?
तेजी से वायरल होने के कारण
वीडियो पहले इंस्टाग्राम पर पोस्ट हुआ। तेज़ कट्स, प्रक्रिया का सफर और खूबसूरत अंतिम परिणाम—लोग फौरन जुड़ गए।
यह वायरल हुआ क्योंकि इसमें था:
रैग्स-टू-रिचेज़ सा एहसास
पर्यावरण को बचाने वाला upcycling angle
स्थानीय टैलेंट का गर्व
“कचरे को कीमती बनाने” की प्रेरणा
कुछ ही घंटों में हजारों लाइक्स और शेयर आ गए।
विशेषज्ञों ने भी सराहा
डिज़ाइनर्स ने इसे “पुराने और नए का शानदार मेल” कहा।
पर्यावरण विशेषज्ञों ने इसे टिकाऊ कला का अच्छा नमूना बताया।
डीआईवाई और अपसाइक्लिंग ट्रेंड लगातार बढ़ रहे हैं—यह घड़ी उसी का परफ़ेक्ट प्रतिनिधित्व है।

वायरल होने के बाद बिक्री में उछाल
पहली बिक्री के बाद ऑर्डर आने लगे।
उसने तीन और घड़ियाँ उसी कीमत पर बेचीं।
अब यह शौक एक छोटे बिज़नेस में बदलने की ओर बढ़ रहा है।
कस्टम ऑर्डर मिलने लगे हैं।
कमाई भी स्थिर रूप से बढ़ने लगी है।
एक पत्थर ने जिंदगी बदल दी।
नए निर्माताओं के लिए सुझाव
पत्थर पर काम करने के उपकरण
छेनी
फाइल
ड्रिल
सैंडपेपर
पॉलिशिंग कपड़ा
मजबूत ग्लू
क्वार्ट्ज घड़ी मैकेनिज़्म
कम लागत में शुरुआत की जा सकती है।
अपना स्टाइल कैसे बनाएं
अनोखी सामग्री चुनें—पत्थर, लकड़ी, कांच, धातु
प्रक्रिया की तस्वीरें और वीडियो शेयर करें
पर्यावरण-हितैषी दृष्टिकोण अपनाएँ
छोटे मेलों, इंस्टाग्राम और Etsy जैसी जगहों पर शुरुआत करें

कला को कमाई में बदलना
समय और मेहनत के आधार पर कीमत तय करें
सोशल मीडिया पर रील्स और स्टोरीज़ डालें
ग्राहकों से कनेक्ट बनाएं
सुरक्षित पैकिंग और तेज़ शिपिंग रखें
अपनी कला को पहचान दिलाएँ—धीरे-धीरे आय का स्रोत बन जाएगी।
हमने “मूल्य” को नई नजर से देखना सीखा
Delhi के इस लड़के की घड़ी दिखाती है कि कैसे साधारण, अनदेखी चीजें भी कला और आय का स्रोत बन सकती हैं। अपसाइक्लिंग न केवल कचरा कम करती है, बल्कि स्थानीय प्रतिभा को नए मौके देती है।
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