योगी आदित्यनाथ ने पंचानन पुरी पीठ में दिवंगत महंत रामदास को दी श्रद्धांजलि
गोरखपुर के हृदय में एक शांत, भावनाओं से भरा क्षण देखने को मिला जब UPके मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महान संत महंत रामदास को नमन किया। पंचानन पुरी पीठ के इस पूज्य गुरु का पिछले महीने निधन हो गया था। उनके तप, त्याग और नेतृत्व ने अनगिनत जीवनों को प्रभावित किया। योगी आदित्यनाथ की यह श्रद्धांजलि सिर्फ एक औपचारिकता नहीं थी—यह क्षेत्र में आस्था और नेतृत्व के मजबूत संबंधों को रेखांकित करने वाला एक महत्वपूर्ण पल था।
योगी आदित्यनाथ की यात्रा ने स्थानीय लोगों का ध्यान खींचा। बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए, जो महंत रामदास की दशकों की आध्यात्मिक सेवाओं को याद कर रहे थे। नाथ परंपरा में उनका योगदान और पूर्वी उत्तर प्रदेश में समुदायिक रिश्तों को मजबूत करने में उनकी भूमिका अविस्मरणीय है।
पंचानन पुरी पीठ में आयोजित समारोह
यह आयोजन दिसंबर 2025 की एक स्वच्छ सुबह को हुआ, जब हल्की धूप ने वातावरण को सुहावना बना दिया। योगी आदित्यनाथ मंत्रोच्चार और धूप की सुगंध के बीच पहुँचे—जो गोरखपुर की आध्यात्मिक दुनिया से उनके गहरे जुड़ाव का प्रतीक था। इस सरल लेकिन प्रभावशाली कार्यक्रम ने सभी को पीठ की आध्यात्मिक विरासत की याद दिलाई।
सीएम आदित्यनाथ का आगमन और औपचारिक कार्यक्रम
योगी आदित्यनाथ ठीक मुख्य द्वार पर पहुँचे। सुरक्षा कर्मियों ने व्यवस्था संभाली, लेकिन उन्होंने सबसे पहले वरिष्ठ श्रद्धालुओं का अभिवादन किया। इसके बाद पीठ के पुजारियों द्वारा एक संक्षिप्त प्रार्थना हुई।
वह आहिस्ता-आहिस्ता प्रांगण से गुजरे, पहचाने चेहरों को नमस्कार करते हुए। स्थानीय अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी उनके साथ थे। यह पूरी प्रक्रिया लगभग आधे घंटे चली, जिसमें गरिमा और सादगी दोनों झलक रहे थे।
उनके शांत कदम और संयमित भाव प्रकट कर रहे थे कि परंपरा के समक्ष सबसे बड़े पद भी विनम्रता में झुकते हैं।
श्रद्धांजलि: अनुष्ठान और सम्मान
सीएम योगी आदित्यनाथ ने सबसे पहले दीप प्रज्वलित किया—उसकी लौ मंद ज्योति में चमक रही थी। उन्होंने गेंदे की माला लेकर महंत रामदास के चित्र पर अत्यंत श्रद्धा से अर्पित की। इसके बाद हल्की घंटियों की ध्वनि के बीच छोटी आरती हुई।
उन्होंने चित्र पर शॉल भी चढ़ाई—जो सम्मान, गर्माहट और आदर का प्रतीक है। पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार किया, जिससे वातावरण में शांति की गूंज फैल गई।
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यह पल कुछ ही मिनटों का था, पर इसकी गहराई अपार थी। भक्तों की आँखें नम थीं। यह श्रद्धांजलि सिर्फ एक संत के लिए नहीं, बल्कि उनकी साधना और मार्ग के प्रति थी।
कार्यक्रम में शामिल प्रमुख हस्तियाँ
योगी आदित्यनाथ के साथ कई महत्वपूर्ण व्यक्तित्व उपस्थित थे:
जिलाधिकारी, जिन्होंने पूरे कार्यक्रम की व्यवस्था संभाली
स्थानीय भाजपा नेता और क्षेत्रीय विधायक
नाथ पंथ और समीपवर्ती आश्रमों के वरिष्ठ संत
आधिकारिक प्रतिनिधि व पुलिस अधिकारी
समाज के बुजुर्ग और महंत रामदास के लंबे समय से जुड़े अनुयायी
इन सभी की उपस्थिति ने इस सम्मान समारोह को एक स्थानीय कार्यक्रम से बढ़ाकर पूरे राज्य में चर्चा का विषय बना दिया।
महंत रामदास की विरासत: पीठ का आधारस्तंभ
महंत रामदास ने लगभग 40 वर्षों तक पीठ की सेवा की। उनका जीवन सादगी, तपस्या और आध्यात्मिक शक्ति का उदाहरण था। कठिन समय में उनकी शांत वाणी लोगों को दिशा देती रही।
उनकी शिक्षा, अनुशासन और योग पर आधारित जीवन शैली ने अनेक शिष्यों को आकर्षित किया। उनके मार्गदर्शन में सैकड़ों साधक तैयार हुए।
आध्यात्मिक योगदान
प्रतिदिन योग और ध्यान की साधना
भक्तों को शास्त्रों की कथाएँ सुनाना
भक्ति पर आधारित उनकी पुस्तकों का प्रसार
पैदल यात्राओं के माध्यम से गांव-गांव में धर्म प्रचार
उनकी साधना ने शिष्यों को आंतरिक शांति और अनुशासन की राह दिखाई।
समुदाय सेवा
महंत रामदास:
हर वर्ष 5,000+ लोगों के लिए निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर आयोजित करते थे
गाँवों में स्वच्छ जल परियोजनाएँ शुरू कीं
दो विद्यालयों की स्थापना करवाई
बाढ़ के समय राहत कार्यों में नेतृत्व किया
भूमि विवादों में मध्यस्थ बनकर परिवारों को अदालतों से बचाया
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, उनके प्रयासों से पिछले 10 वर्षों में क्षेत्रीय गरीबी में 15% की कमी आई।

उत्तराधिकार और पीठ का भविष्य
महंत रामदास के निधन के बाद, उनके विश्वसनीय शिष्य को नया महंत नियुक्त किया गया। यह शिष्य पिछले 20 वर्षों से उनके प्रशिक्षण में था। परंपरा के अनुसार यह बदलाव शांति और सद्भाव से हुआ।
भविष्य की चुनौतियाँ जैसे विकास कार्यों के लिए धन जुटाना सामने हैं, लेकिन श्रद्धालुओं का सहयोग लगातार मिल रहा है। नए कार्यक्रमों, विशेषकर युवाओं के लिए आध्यात्मिक शिक्षा की योजनाओं से पीठ का भविष्य सुदृढ़ दिखता है।
राजनीतिक और क्षेत्रीय महत्व
योगी आदित्यनाथ की यह यात्रा सिर्फ व्यक्तिगत श्रद्धा नहीं थी—यह उत्तर प्रदेश के धार्मिक और सांस्कृतिक ढांचे में उनकी प्रतिबद्धता का संदेश भी थी। यूपी जैसे राज्य में, जहाँ मंदिर और आश्रम सामाजिक जीवन का बड़ा हिस्सा हैं, ऐसे कार्यक्रम रिश्तों को मजबूत करते हैं।
परंपरा का सम्मान
राजनीति में आने से पहले योगी आदित्यनाथ स्वयं एक महंत थे। इसलिए पंचानन पुरी पीठ जैसे स्थानों से उनका जुड़ाव गहरा है। इस श्रद्धांजलि से उनकी आध्यात्मिक जड़ों का सम्मान झलकता है।
यह कदम लोगों में यह संदेश भी देता है कि नेतृत्व परंपरा के संरक्षण से आता है, अलगाव से नहीं।
भाषण और संदेश
योगी आदित्यनाथ ने अनुष्ठानों के बाद लगभग पाँच मिनट का संक्षिप्त भाषण दिया।
उन्होंने कहा:
महंत रामदास का जीवन निःस्वार्थ सेवा का उदाहरण है।
“सच्चा नेतृत्व हृदय से आता है”—उन्होंने यही संदेश दिया।
राज्य के विकास और ग्राम उत्थान को आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़कर प्रस्तुत किया।
इन सरल शब्दों ने उपस्थित लोगों में गहरा प्रभाव छोड़ा।

स्थानीय नेताओं और भक्तों की प्रतिक्रियाएँ
भाजपा नेताओं ने इसे “उचित सम्मान” बताया।
सोशल मीडिया पर भक्तों ने तस्वीरें और अनुभव साझा किए।
समुदाय के बुजुर्ग भावुक होते दिखे—“मानो रामदासजी आज भी हमारे बीच हैं।”
हर ओर सकारात्मकता महसूस हुई।
लोगों ने इसे योगी आदित्यनाथ के संवेदनशील नेतृत्व का प्रतिबिंब माना।
पंचानन पुरी पीठ: इतिहास और महत्व
गोरखपुर की व्यस्त गलियों से अलग, हरे-भरे परिसर में स्थित यह पीठ शांति का केंद्र है।
यहाँ साल भर साधना, उत्सव और धार्मिक आयोजन होते रहते हैं।
पुराना इतिहास इसे श्रद्धा और परंपरा का प्रमुख स्थल बनाता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
19वीं सदी में एक नाथ योगी ने इसकी स्थापना की
शुरू में यह एक छोटी कुटिया थी
बाद में इसे प्रशिक्षण और आध्यात्मिक अध्ययन केंद्र बनाया गया
महंत रामदास ने 1985 से इसका विस्तार किया
वर्तमान में यह नाथ परंपरा का एक प्रमुख केन्द्र है

धार्मिक पर्यटन में भूमिका
हर साल लगभग 10,000 श्रद्धालु यहाँ आते हैं।
वार्षिक मेला स्थानीय अर्थव्यवस्था में योगदान देता है।
योगी आदित्यनाथ की यात्रा के बाद इसकी पहचान और बढ़ी है।
निरंतरता और सम्मान का प्रतीक
पंचानन पुरी पीठ में महंत रामदास को योगी आदित्यनाथ की श्रद्धांजलि परंपरा, सम्मान और आध्यात्मिकता का सुंदर संगम थी। इस कार्यक्रम ने दिखाया कि कैसे नेतृत्व और धर्म समाज की भलाई के लिए एक-दूसरे का साथ देते हैं।
महंत रामदास की विरासत आगे भी पीठ की गतिविधियों और नए महंत के मार्गदर्शन में जीवंत रहेगी।
योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति ने इस विरासत के महत्व को और मजबूत किया।
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