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ऐतिहासिक पल: President मुर्मू, पीएम मोदी और President पुतिन की ऐतिहासिक तस्वीर

एक ऐसी तस्वीर जिसने दुनिया भर की सुर्खियों को रोशन कर दिया—President द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी President व्लादिमीर पुतिन एक साथ खड़े नज़र आए। मुस्कानें, मज़बूत हैंडशेक और आत्मविश्वास… यह दृश्य अक्टूबर 2025 में रूस के कज़ान में हुए BRICS शिखर सम्मेलन का है।
यह President मुर्मू, पीएम मोदी और पुतिन की ऐतिहासिक तस्वीर सिर्फ एक फोटो नहीं—भारत और रूस के मजबूत रिश्तों का प्रतीक बन गई है, खासकर ऐसे समय में जब दुनिया बड़े बदलावों से गुजर रही है।

यह मुलाकात कूटनीति के एक अहम पड़ाव को दिखाती है—जहाँ भारत पुराने विश्वासपात्रों के साथ खड़ा रहता है, जबकि नई वैश्विक चुनौतियों से निपटना भी जारी रखता है।
यूक्रेन जैसे क्षेत्रों में तनाव बढ़ने के बीच यह तस्वीर साझेदारी और भरोसे का साफ संदेश देती है।

इस त्रिपक्षीय मुलाकात का महत्व

सम्मेलन का संदर्भ

कज़ान में आयोजित BRICS सम्मेलन में ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के नेता एक साथ आए। बातचीत का फोकस—व्यापार, तकनीकी सहयोग और वैश्विक नियमों में समानता।
President मुर्मू भारत का प्रतिनिधित्व कर रही थीं, जबकि प्रधानमंत्री मोदी अर्थव्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर वार्ता का नेतृत्व कर रहे थे।

यह सम्मेलन वर्षों से चल रहे सहयोग का अगला चरण था। BRICS में अब मिस्र और ईरान जैसे नए सदस्य भी शामिल हो चुके हैं, जिससे इसका दायरा और मजबूत हुआ है।

तस्वीर एक सत्र के बाद ली गई जहाँ ऊर्जा सहयोग पर चर्चा हुई—भारत ने रूस से सस्ते तेल की मांग ज़ोरदार तरीके से रखी।

बैठक में जलवायु फंड, डिजिटल पेमेंट और विकासशील देशों की जरूरतों पर भी बातचीत हुई।
रूस ने इस आयोजन के ज़रिए ग्लोबल साउथ में अपनी भूमिका दिखाने की कोशिश की।
अंत में, 2030 तक बड़ी संख्या में संयुक्त परियोजनाओं पर काम करने की घोषणा की गई।

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बॉडी लैंग्वेज और प्रतीकवाद का विश्लेषण

फोटो को गौर से देखें—पुतिन बीच में, दायीं ओर मोदी, और बायीं ओर राष्ट्रपति मुर्मू।

  • खुली मुद्रा

  • सीधा संपर्क

  • सहज मुस्कानें

ये सब एकता और भरोसे का संकेत देते हैं।

पीएम मोदी का हल्का-सा सिर झुकाना—सम्मान और सौहार्द का प्रतीक।
President मुर्मू की शांत मुस्कान—भारत की स्थिर और दृढ़ भूमिका को दर्शाती है।

यह फ्रेम पुराने भारत-रूस संबंधों की याद दिलाता है। मुश्किल समय में ऐसी तस्वीरें घरेलू समर्थन बढ़ाती हैं और अंतरराष्ट्रीय आलोचनाओं को शांत करती हैं।

भारत-रूस संबंध: मोदी–पुतिन अक्ष की गहराई

स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की निरंतरता

भारत और रूस के संबंध शीत युद्ध के समय से मजबूत रहे हैं। 1971 में हुई दोस्ती की संधि आज भी दोनों देशों के रिश्तों की नींव है।

  • भारत की 60% सैन्य आपूर्ति रूस से आती है

  • S-400 मिसाइल सिस्टम इसका आधुनिक उदाहरण

  • 2025 में भारत रोज़ाना 1.5 मिलियन बैरल रूसी तेल खरीद रहा है

  • चांद मिशनों पर 2026 के लिए संयुक्त योजनाएँ

मोदी और पुतिन की 2014 से अब तक 20 से अधिक मुलाकातें हो चुकी हैं।
हर मुलाकात—न्यूक्लियर प्लांट, रक्षा डील, वैक्सीन साझेदारी—कई समझौतों को जन्म देती है।

ताज़ा समझौतों में साइबेरिया में रेयर-अर्थ खनन और बढ़ता व्यापार शामिल है—2024 में दोनों देशों के बीच व्यापार 65 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया।

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कूटनीति में राष्ट्रपति मुर्मू की भूमिका

भारत की President होने के नाते मुर्मू राष्ट्रीय सम्मान और पहचान का प्रतिनिधित्व करती हैं।
उनका कज़ान पहुँचना, देश की परंपरा और गरिमा को आगे बढ़ाता है।

उनकी आदिवासी पृष्ठभूमि वार्ताओं में नया दृष्टिकोण जोड़ती है।
संस्कृति आदान-प्रदान और मानवीय संबंधों पर उनका जोर—भारत-रूस संबंधों को और गहराई देता है।

इस तस्वीर में उनकी उपस्थिति संकेत देती है कि—

सरकार का राजनीतिक और संवैधानिक दोनों स्तरों पर पूर्ण समर्थन रूस के साथ खड़ा है।

वैश्विक भू-राजनीति: भारत का संतुलन और रूस की कूटनीति

मल्टीपोलर दुनिया में भारत की रणनीति

भारत आज बहुध्रुवीय दुनिया में संतुलन की रणनीति अपना रहा है।

  • रूस से हथियार खरीदता है

  • अमेरिका के साथ सैन्य अभ्यास भी करता है

  • BRICS में शामिल रहते हुए Quad में भी सक्रिय

यह तस्वीर इसी रणनीति का प्रतीक है—किसी एक खेमे में नहीं, भारत अपनी राह चुनता है।

अमेरिका चिंतित रहता है, फिर भी भारत-अमेरिका व्यापार 200 बिलियन डॉलर से ऊपर है।
भारत अपनी प्राथमिकताएँ खुद तय करता है—यही संदेश यह तस्वीर देती है।

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संघर्ष के बाद रूस की कूटनीतिक रणनीति

2022 में यूक्रेन संघर्ष शुरू होने के बाद रूस ने एशिया की ओर झुकाव बढ़ाया।
भारत उसके लिए बड़ा सहयोगी बना—तेल व्यापार ने रूस की अर्थव्यवस्था को राहत दी।

  • रुपये-रूबल भुगतान

  • आर्कटिक शिपिंग रूट

  • उर्वरक में 15% लागत कम करने वाले संयुक्त निवेश

  • दिल्ली–व्लादिवोस्तोक समुद्री कनेक्टिविटी के प्रयास

यह सब रूस की नई वैश्विक रणनीति के संकेत हैं।

भविष्य: इस मुलाकात से आगे क्या?

क्षेत्र-विशेष सहयोग

  • 2030 तक भारत-रूस व्यापार लक्ष्य: 100 बिलियन डॉलर

  • रक्षा सहयोग: संयुक्त पनडुब्बियाँ

  • 2026 से बढ़े हुए सैन्य अभ्यास

  • संयुक्त उपग्रह नेटवर्क

  • वैक्सीन निर्माण

  • अनाज और ऊर्जा व्यापार का विस्तार

भारत के कारोबारियों के लिए यह बड़े अवसरों का दौर है।

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क्षेत्रीय असर

यह तस्वीर दक्षिण और मध्य एशिया में मजबूत संदेश भेजती है—

  • भारत की रूस संग साझेदारी शक्ति का संकेत

  • मध्य एशिया में पाइपलाइन और सुरक्षा सहयोग

  • चीन के प्रभाव को संतुलित करने की क्षमता

  • पड़ोसी देशों में चिंता कम करना

यह स्नैपशॉट आने वाले वर्षों तक किताबों और विश्लेषणों में उद्धृत होगा।

तस्वीर से बढ़कर एक संदेश

President मुर्मू, पीएम मोदी और पुतिन की यह तस्वीर सिर्फ एक फ्रेम नहीं—
यह स्थायी संबंधों, स्ट्रैटेजिक भरोसे और बदलती दुनिया में साझेदारी की कहानी है।

जब वैश्विक शक्तियाँ टकरा रही हैं, ऐसे क्षण स्थिरता का रास्ता दिखाते हैं।

अगर आप व्यवसाय से जुड़े हैं—तो अब भारत-रूस व्यापार के नए दरवाज़े खुल रहे हैं।

यह तस्वीर सिर्फ पिक्सल नहीं—
यह भविष्य के सहयोग का आमंत्रण है।

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