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PM मोदी, अमित शाह, राहुल गांधी की CIC नियुक्तियों पर बैठक

पिछले सप्ताह एक अहम कदम के तहत PM नरेंद्र मोदी ने गृह मंत्री अमित शाह और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ बैठक की। उद्देश्य था—केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) में लंबित नियुक्तियों को अंतिम रूप देना। यह संस्था भारत में सूचना के अधिकार (RTI) व्यवस्था का प्रमुख स्तंभ है।

CIC देशभर में RTI अपीलों की अंतिम सुनवाई करता है। जब लोगों को सरकारी विभागों से जानकारी नहीं मिलती, तो वे यहां अपील करते हैं। आयोग में पद खाली रहने से आम नागरिकों को जवाब मिलने में देरी होती है। इसलिए यह नियुक्तियाँ बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इन्हीं के जरिए पारदर्शिता और सत्ता पर निगरानी मजबूत होती है। कानून यह भी तय करता है कि सरकार और विपक्ष मिलकर निष्पक्ष लोगों का चयन करें।

केंद्रीय सूचना आयोग: भूमिका, रिक्तियाँ और जिम्मेदारी

कानूनी आधार और महत्व

RTI अधिनियम 2005 के तहत CIC बनाया गया था। नागरिक किसी भी सार्वजनिक प्राधिकरण से जानकारी मांग सकते हैं। जब पहली अपील के बाद भी जानकारी नहीं मिलती, तो आयोग में दूसरी अपील दाखिल होती है।

आयोग एक निर्णायक संस्थान की तरह काम करता है—मामलों की सुनवाई करता है, सूचना जारी करने के आदेश देता है, और सरकारी विभागों को RTI के नियमों का पालन कराने में मार्गदर्शन देता है।

CIC में एक मुख्य सूचना आयुक्त और अधिकतम दस सूचना आयुक्त होते हैं। अलग-अलग पृष्ठभूमि के विशेषज्ञ नियुक्त किए जाते हैं ताकि जटिल और विविध मामलों का निपटारा हो सके।

मौजूदा रिक्तियाँ और प्रभाव

दिसंबर 2025 की शुरुआत तक CIC में चार पद खाली थे। केवल मुख्य आयुक्त और तीन आयुक्त कार्यरत थे। नतीजतन 20,000 से ज्यादा अपीलें लंबित थीं, जो पिछले वर्ष से भी अधिक हैं।

देरी का असर गंभीर है—किसी स्थानीय परियोजना या फंड पर साधारण RTI का जवाब भी महीनों तक रुक जाता है। कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव जैसे संगठनों ने इसे “संकट” बताया। खाली पदों के कारण लोगों का सूचना पाने का अधिकार कमजोर पड़ता है।

कई कार्यकर्ताओं ने बताया कि भ्रष्टाचार की जांच से जुड़ी RTI भी ठप पड़ी हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि नियुक्तियाँ पूरी होते ही इंतज़ार का समय आधा हो सकता है।

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उच्च-स्तरीय चयन समिति की गतिशीलता

समिति की संरचना और कानूनी प्रावधान

चयन समिति में तीन सदस्य होते हैं:

  1. PM (अध्यक्ष)

  2. लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष (इस समय राहुल गांधी)

  3. प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय मंत्री (अक्सर गृह मंत्री अमित शाह)

कानून इस संरचना को इसलिए अनिवार्य करता है ताकि निष्पक्षता बनी रहे। बहुमत से निर्णय होते हैं, लेकिन आम सहमति को तरजीह दी जाती है। इससे सरकार अकेले मनमाने तरीके से नियुक्तियाँ नहीं कर पाती।

राजनीतिक सहमति की भूमिका

ऐसे संवैधानिक पदों पर अक्सर सभी पक्षों की सहमति बनाने की कोशिश होती है। इससे आयोग की विश्वसनीयता बढ़ती है। 2019 जैसी पिछली नियुक्तियों में भी हफ्तों की बातचीत के बाद आम सहमति बनी थी।

2022 में पारदर्शिता को लेकर मतभेदों से देरी हुई थी। लेकिन इस बार मोदी-शाह-गांधी की संयुक्त बैठक एक सकारात्मक संदेश देती है—तेजी से निर्णय लेने की इच्छा।

इसे ऐसे समझिए: जैसे मैच से पहले रेफरी चुनने के लिए सभी टीमें साथ बैठती हैं ताकि खेल निष्पक्ष रहे।

संभावित उम्मीदवार और चयन मानदंड

चयन के आधिकारिक नियम

RTI अधिनियम योग्यताओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है:

  • सार्वजनिक जीवन में उत्कृष्टता

  • कानून, अर्थशास्त्र, प्रशासन आदि में विशेषज्ञता

  • उच्च स्तर की ईमानदारी और निष्पक्षता

  • सक्रिय राजनेता या हाल में सरकारी पद पर रहे व्यक्ति नहीं हो सकते

  • मुख्य सूचना आयुक्त के लिए आयु सीमा 65 वर्ष

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संभावित प्रोफाइल (सामान्य जानकारी)

चर्चाओं में अक्सर इन पृष्ठभूमियों के लोग शामिल होते हैं:

  • सेवानिवृत्त न्यायाधीश

  • वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी

  • पारदर्शिता व सुशासन के क्षेत्र में काम करने वाले NGO विशेषज्ञ

  • वित्त, कानून, पत्रकारिता जैसे क्षेत्रों के विशेषज्ञ

विविधता को भी महत्व दिया जाता है—महिला विशेषज्ञ, छोटे शहरों के पेशेवर आदि आयोग को समृद्ध बनाते हैं।

राजनीतिक प्रभाव और पारदर्शिता पर सवाल

कार्यपालिका बनाम निगरानी संस्थाएँ

ऐसी नियुक्तियाँ सरकार और उसकी निगरानी करने वाली संस्थाओं के बीच संतुलन का प्रतीक हैं। एक मजबूत CIC सरकार के निर्णयों की सूक्ष्म जांच कर सकता है। लेकिन पक्षपातपूर्ण नियुक्तियाँ इस संतुलन को बिगाड़ देती हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में कहा था कि नियुक्तियों में देरी लोगों के अधिकारों का उल्लंघन है। यह बैठक उसी चेतावनी को ध्यान में रखकर आगे बढ़ने का संकेत देती है।

नागरिक समाज की उम्मीदें

पारदर्शिता समूहों की मांग है कि चयन प्रक्रिया खुली हो—शॉर्टलिस्ट公开 हों, बैठक के मिनट साझा किए जाएँ। सतर्क नागरिक संगठन (SNS) जैसे समूह लगातार इस पर जोर देते रहे हैं।

लोग स्वयं भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं:

  • PMओ वेबसाइट और RTI पोर्टल पर नोटिस देखें

  • आधिकारिक राजपत्र में घोषणाएँ आती हैं

  • चाहें तो RTI डालकर चयन प्रक्रिया के विवरण माँग सकते हैं

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नियुक्तियों के बाद आगे की राह

PM मोदी-शाह-गांधी की बैठक से CIC की नियुक्तियाँ तय होने का रास्ता साफ हुआ है। इससे आयोग की क्षमता फिर से मजबूत होगी और लंबित RTI अपीलों का निपटारा तेज़ होगा।

मुख्य बिंदु:

  • सरकार और विपक्ष का सहमति से काम करना आयोग की निष्पक्षता बनाए रखता है

  • पूरी टीम बनने से नागरिकों को समय पर सूचना मिलेगी

  • विविध और योग्य विशेषज्ञ CIC को और प्रभावी बनाएँगे

  • प्रक्रिया में पारदर्शिता से जनता का भरोसा बढ़ेगा

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