Bihar कैबिनेट में बड़ा फेरबदल: नीतीश कुमार ने विमानन मंत्रालय अपने पास रखा, नए विभागों का बंटवारा — किसे क्या मिला?
Bihar की तेज़-तर्रार राजनीतिक गलियारों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बड़ा दांव चलते हुए कैबिनेट में अहम फेरबदल किया है। इस बदलाव ने राज्य सरकार की दिशा और प्राथमिकताओं को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। यह कदम ऐसे समय पर आया है जब सत्तारूढ़ गठबंधन पुरानी चुनौतियों को दुरुस्त करने और आगामी चुनावों की तैयारी में जुटा है।
यह फेरबदल जेडीयू-बीजेपी गठबंधन की अंदरूनी ज़रूरतों से जुड़ा माना जा रहा है। शासन की कमजोर कड़ियों को मजबूत करने के लिए विभागों का पुनर्विन्यास किया गया है। नीतीश कुमार सत्ता के केंद्र में बने हुए हैं, जहां उन्होंने कुछ अहम मंत्रालय अपने पास रखते हुए सहयोगियों को नई जिम्मेदारियाँ सौंपी हैं।
राजनीतिक हलचल: फेरबदल के तुरंत बाद असर
Bihar कैबिनेट में बदलाव की खबर आते ही मीडिया और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज़ हो गई। कई विश्लेषकों ने इसे नीतीश कुमार की सत्ता पर पकड़ बनाए रखने की रणनीति बताया।
विपक्षी दलों ने इस कदम को गठबंधन के भीतर असंतोष दबाने की कोशिश करार दिया। वहीं सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलीं—कुछ लोगों ने इसे नई ऊर्जा देने वाला कदम बताया, तो कुछ ने सवाल उठाया कि क्या इससे सड़क, रोजगार और बिजली जैसी ज़मीनी समस्याएँ सच में हल होंगी।
यह घटनाक्रम एक बार फिर दिखाता है कि Bihar की राजनीति हमेशा राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचती है।
आगे की रणनीति: शासन पर क्या पड़ेगा असर?
बड़ा सवाल यह है कि क्या यह नई कैबिनेट व्यवस्था स्कूलों, कृषि और बुनियादी ढांचे जैसी परियोजनाओं में तेज़ी लाएगी। 2025 के चुनावों से पहले यह फेरबदल जनता का भरोसा जीतने की कोशिश भी माना जा रहा है।
स्थिरता इस समय सबसे बड़ा मुद्दा है। नीतीश कुमार की टीम मजबूत नेतृत्व दिखाने की कोशिश में है। लेकिन विपक्ष किसी भी चूक को मुद्दा बनाने के लिए तैयार बैठा है।
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नीतीश कुमार की रणनीति: विमानन मंत्रालय अपने पास क्यों रखा?
इस फेरबदल में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नागरिक उड्डयन (एविएशन) मंत्रालय अपने पास बनाए रखा। यह फैसला बताता है कि वह विकास से जुड़े क्षेत्रों पर सीधी पकड़ रखना चाहते हैं।
इसके अलावा उन्होंने सामान्य प्रशासन और कुछ योजना संबंधी विभागों पर भी नियंत्रण बनाए रखा है, जिससे सरकार की रोज़मर्रा की कार्यप्रणाली सीधे उनके हाथ में रहे।
विमानन मंत्रालय का महत्व
Bihar में हवाई कनेक्टिविटी तेज़ी से बढ़ रही है। पटना और गया जैसे शहरों में हवाई अड्डों का विस्तार और उड़ान योजना के तहत छोटे शहरों को जोड़ने की कोशिशें चल रही हैं।
नीतीश कुमार के मुताबिक, यह पर्यटन और व्यापार दोनों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। विमानन मंत्रालय अपने पास रखकर वह इन परियोजनाओं में देरी से बचना चाहते हैं।
सीधे नियंत्रण वाले मंत्रालय
सामान्य प्रशासन विभाग सरकार की रीढ़ होता है—भर्तियाँ, नियम और प्रशासनिक अनुशासन इसी से तय होते हैं।
इसके साथ ही आपदा प्रबंधन पर भी नीतीश कुमार की करीबी नजर बनी हुई है, खासकर बाढ़-प्रभावित बिहार के संदर्भ में।
बड़े विभागीय बदलाव: किसे मिला फायदा, किसे झटका?
इस Bihar कैबिनेट फेरबदल में कई मंत्रियों की किस्मत बदली।
किन मंत्रियों को मिला बड़ा फायदा?
विजय कुमार चौधरी को अब वित्त मंत्रालय सौंपा गया है। यह मुख्यमंत्री के भरोसे का संकेत माना जा रहा है।
सम्राट चौधरी को ऊर्जा मंत्रालय मिला है, जो बिजली संकट से जूझ रहे Bihar के लिए अहम विभाग है।
इन विभागों के साथ मंत्रियों की राजनीतिक हैसियत भी बढ़ी है।
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पुनर्नियुक्ति और सत्ता संतुलन
प्रेम कुमार से कृषि मंत्रालय लेकर किसी नए चेहरे को दिया गया। खराब फसल उत्पादन को इसकी वजह माना जा रहा है।
ललन सिंह को अपेक्षाकृत कम प्रभावशाली विभाग मिला, जिसे राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
यह फेरबदल साफ करता है कि प्रदर्शन के आधार पर जिम्मेदारी तय की जा रही है।
गठबंधन संतुलन की कोशिश
जेडीयू-बीजेपी गठबंधन में संतुलन बनाए रखना ज़रूरी था।
बीजेपी को गृह विभाग जैसे अहम मंत्रालय मिले
जेडीयू के पास शिक्षा जैसे मुख्य विभाग बरकरार रहे
इससे गठबंधन के भीतर टकराव से बचने की कोशिश की गई है।
अहम क्षेत्रों पर असर: वित्त और बुनियादी ढांचा
वित्त मंत्रालय की नई जिम्मेदारी
विजय कुमार चौधरी के सामने बड़ी चुनौती है—बिहार पर 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज।
उन्हें 2026 का बजट तैयार करते समय मुफ्त योजनाओं और विकास खर्च के बीच संतुलन बनाना होगा।
बुनियादी ढांचा: ऊर्जा, सड़क और जल संसाधन
ऊर्जा (सम्राट चौधरी): हर साल 1,000 मेगावाट बिजली जुड़ने के बावजूद कटौती बनी हुई है।
सड़क निर्माण (नितिन नवीन): पटना-पूर्णिया जैसे हाईवे प्रोजेक्ट्स में तेजी लाने की उम्मीद।
जल संसाधन (रामा नंद सिंह): पिछली बाढ़ में 5,000 करोड़ रुपये की फसल क्षति के बाद यह विभाग बेहद अहम हो गया है।
जनता और राजनीति की प्रतिक्रिया
मीडिया और जनभावना
कुछ अखबारों ने इसे नीतीश कुमार की “नई शुरुआत” बताया।
एक त्वरित सर्वे के मुताबिक लगभग 45% लोग इस फेरबदल से संतुष्ट दिखे, खासकर रोजगार और कनेक्टिविटी की उम्मीदों के कारण।
हालांकि, वित्तीय कर्ज और बिजली संकट को लेकर चिंताएँ बनी हुई हैं।
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विपक्ष की रणनीति
राजद और कांग्रेस ने इस फेरबदल को “पुरानी बोतल में नई शराब” बताया है।
तेजस्वी यादव ने गरीबी और बेरोजगारी के आंकड़ों को लेकर सरकार पर हमला बोला है।
विधानसभा में आने वाले सत्रों में यह मुद्दे और गरमाने तय हैं।
नीतीश सरकार का अगला अध्याय
नीतीश कुमार के नेतृत्व में यह बिहार कैबिनेट फेरबदल सरकार की नई दिशा तय करता है।
विमानन मंत्रालय अपने पास रखकर उन्होंने विकास की कमान थामी है, जबकि वित्त और बुनियादी ढांचे में नए चेहरे उतारे गए हैं।
यह कदम 2025 के चुनावों से पहले स्थिरता और प्रदर्शन दिखाने की कोशिश है।
अब असली परीक्षा ज़मीन पर नतीजों की होगी।
मुख्य बातें संक्षेप में
नीतीश कुमार के पास विमानन मंत्रालय — कनेक्टिविटी और व्यापार को बढ़ावा
वित्त मंत्रालय विजय कुमार चौधरी को — कर्ज और बजट संतुलन बड़ी चुनौती
बिजली, सड़क और जल संसाधनों में बदलाव — रोजगार और विकास की उम्मीद
आगे क्या देखें?
आने वाले 90 दिनों में:
बजट घोषणाएँ
नई परियोजनाओं की शुरुआत
ऊर्जा और जल नीति में बदलाव
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