Bihar

नीतीश कुमार–अमित शाह मुलाकात: Bihar की राजनीति के लिए क्या मायने?

दिल्ली के सत्ता गलियारों में हाल ही में Bihar के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अहम मुलाकात हुई। यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब बिहार की राजनीति में गठबंधन, विकास और सत्ता संतुलन को लेकर चर्चाएँ तेज़ हैं। सवाल यही है—क्या बातचीत का केंद्र सड़क, बिजली और विकास रहा, या फिर आने वाले राजनीतिक मुकाबलों की रणनीति?

यह मुलाकात 2025 के अंत में हुए Bihar विधानसभा चुनावों के तुरंत बाद हुई। एनडीए को भले ही मामूली बढ़त मिली हो, लेकिन ऐसी हर बैठक सत्ता के समीकरण बदलने की क्षमता रखती है। पटना से दिल्ली तक अटकलें तेज़ हैं—क्या इससे केंद्र से ज़्यादा फंड मिलेगा, या जद(यू)–भाजपा रिश्ते और मज़बूत होंगे?

आइए, इस बैठक के खुले एजेंडे और छिपे सियासी संकेतों को समझते हैं।

मुख्य एजेंडा: आधिकारिक मुद्दे

1. Bihar के विकास प्रोजेक्ट और केंद्रीय फंडिंग

नीतीश कुमार ने केंद्र से फंड जल्द जारी करने पर ज़ोर दिया। उन्होंने सड़कों, बिजली और इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरतों को सामने रखा। पटना–पूर्णिया हाईवे जैसे अहम प्रोजेक्ट्स पर रुकी राशि जल्द जारी करने की बात हुई।

केंद्रीय योजनाओं के तहत पिछले बजट में बिहार को 50,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा मिले थे, लेकिन ज़मीन अधिग्रहण जैसी अड़चनों से काम धीमा है। ग्रामीण इलाकों को जोड़ने के लिए नई रेल लाइनों पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर ये प्रोजेक्ट तेज़ी से पूरे हों, तो मुज़फ्फरपुर जैसे ज़िलों में रोज़गार और विकास को बड़ा बढ़ावा मिल सकता है।

Delhi: Bihar CM Nitish Kumar meets Union Home Minister Amit Shah

2. Bihar में कानून-व्यवस्था

हाल के महीनों में Bihar के शहरी इलाकों में अपराध के मामले बढ़े हैं। मुख्यमंत्री ने खासतौर पर उत्तर बिहार में गिरोहों की गतिविधियों और अवैध हथियारों की समस्या उठाई।

अमित शाह ने केंद्रीय बलों से सहयोग बढ़ाने का भरोसा दिया। त्योहारों को देखते हुए अतिरिक्त CRPF तैनाती और नेपाल सीमा से जुड़े सुरक्षा मुद्दों पर भी बात हुई। सुरक्षित माहौल का सीधा असर जनता के भरोसे और वोट बैंक पर पड़ता है।

3. आगामी चुनाव और गठबंधन रणनीति

2029 के लोकसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन रणनीति अभी से बन रही है। एनडीए में सीट बंटवारे और तालमेल पर चर्चा हुई। नीतीश कुमार के पुराने राजनीतिक पलटाव को देखते हुए विश्वास बनाए रखना भाजपा के लिए अहम है।

आरजेडी की पिछड़ा वर्ग राजनीति का जवाब कैसे दिया जाए—यह भी बातचीत का हिस्सा रहा। इसे एक टीम मीटिंग की तरह देखा जा रहा है, जहाँ आने वाले मैच की तैयारी होती है।

छिपे सियासी संकेत

1. राष्ट्रीय राजनीति में नीतीश कुमार की भूमिका

यह मुलाकात नीतीश कुमार को राष्ट्रीय स्तर पर मज़बूत नेता के रूप में पेश करती है। जद(यू) के भीतर और बाहर, इससे उनकी स्थिति मज़बूत होती है और विपक्ष की ओर जाने की अटकलें कमजोर पड़ती हैं।

इसे शतरंज की चाल की तरह देखा जा सकता है—केंद्र से नज़दीकी बढ़ाकर नीतीश अपने राजनीतिक पत्ते मज़बूत कर रहे हैं।

Nitish Kumar-Amit Shah bonhomie on display at meeting over breakfast |  India News - Times of India

2. क्षेत्रीय सहयोगियों पर अमित शाह की पकड़

भाजपा के लिए Bihar रणनीतिक राज्य है। शाह की यह पहल नीतीश को साथ बनाए रखने और आरजेडी की वापसी रोकने की कोशिश है। इससे पूर्वी भारत में एनडीए की स्थिति भी मज़बूत होती है।

संभावना है कि साझा अभियान और बेहतर समन्वय पर भी बात हुई हो।

असर और प्रतिक्रियाएँ

राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया

  • जद(यू): इसे विकास और केंद्र–राज्य संबंधों के लिए सकारात्मक बताया।

  • भाजपा: Bihar के उत्थान की दिशा में कदम कहा।

  • आरजेडी: इसे सत्ता बचाने की कवायद और “फोटो सेशन” करार दिया।

  • कांग्रेस: गठबंधन की आड़ में केंद्रीय उपेक्षा का आरोप लगाया।

सोशल मीडिया पर भी इस मुलाकात को लेकर चर्चाएँ और मीम्स छाए रहे।

Nitish Kumar-Amit Shah bonhomie on display at meeting over breakfast |  India News - Times of India

संभावित नीतिगत बदलाव

आने वाले हफ्तों में प्रोजेक्ट्स के लिए फंड जारी होने, बाढ़ नियंत्रण योजनाओं और सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव दिख सकते हैं। 2026 तक बड़े फैसलों के संकेत मिल सकते हैं।

Bihar –केंद्र संबंधों की आगे की दिशा

यह बैठक Bihar के लिए अहम मानी जा रही है। विकास, सुरक्षा और गठबंधन—तीनों मोर्चों पर सहमति बनाने की कोशिश दिखती है। अगर बातों को ज़मीन पर उतारा गया, तो बिहार को इसका सीधा फायदा मिल सकता है।

असली कसौटी यही होगी कि कितनी जल्दी आम लोगों तक असर पहुँचता है। आने वाले महीनों में पटना और दिल्ली के कदमों पर नज़र रखना ज़रूरी है।

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