Maharashtra स्थानीय निकाय चुनाव परिणाम 2025: महायुति की निर्णायक जीत, राज्य में दबदबा और मज़बूत
Maharashtra की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। Maharashtra स्थानीय निकाय चुनाव परिणाम 2025 में महायुति ने ज़बरदस्त जीत दर्ज करते हुए प्रमुख नगर निगमों और परिषदों में 70% से अधिक सीटों पर कब्ज़ा कर लिया है। इस गठबंधन में भाजपा, शिवसेना (शिंदे गुट) और एनसीपी (अजित पवार गुट) शामिल हैं। भाजपा अकेले सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि महाविकास आघाड़ी (MVA) काफ़ी पीछे छूट गई।
पुणे, नागपुर, नाशिक और ठाणे जैसे बड़े नगर निगमों से लेकर ग्रामीण इलाकों की ज़िला परिषदों तक, इन नतीजों ने यह साफ़ कर दिया है कि जमीनी स्तर की राजनीति में पलड़ा किसका भारी है। यह जीत सिर्फ़ नगर निकायों तक सीमित नहीं, बल्कि आने वाले विधानसभा चुनावों की दिशा भी तय करती दिख रही है।
महायुति की सुनामी: निर्णायक जनादेश का विश्लेषण
Maharashtra स्थानीय निकाय चुनाव 2025 में महायुति ने करीब 2,500 में से 1,850 सीटें जीत लीं—जो अनुमान से कहीं ज़्यादा हैं। शहरी इलाकों में दबदबा तो रहा ही, ग्रामीण क्षेत्रों में भी गठबंधन ने मज़बूत पैठ बनाई।
पुणे: 85% वार्ड महायुति के खाते में
नागपुर: 100 में से 92 सीटें
ठाणे और नाशिक: 60% से ज़्यादा सीटों पर जीत
सीट बंटवारा (लगभग):
भाजपा: 1,100 सीटें (सबसे बड़ी पार्टी)
शिवसेना (शिंदे): 450 सीटें
एनसीपी (अजित पवार): 300 सीटें
यह प्रदर्शन गठबंधन की एकजुटता और ज़मीनी रणनीति का नतीजा माना जा रहा है।
भाजपा का उभार: सबसे बड़ी पार्टी के रूप में मजबूती
भाजपा ने इस चुनाव में करीब 45% सीटें जीतकर खुद को सबसे ताक़तवर दल साबित किया—जो पिछले स्थानीय चुनावों से काफ़ी अधिक है। पार्टी ने उन इलाकों में भी सेंध लगाई, जहाँ पहले उसका प्रभाव सीमित था।
कोल्हापुर: 40 में से 28 वार्ड
औरंगाबाद: 75 में से 55 सीटें
जालना, परभणी जैसे टियर-3 शहर: 60% से अधिक सीटें
स्थानीय मुद्दों—सड़क, रोज़गार, बुनियादी सुविधाओं—पर फोकस ने भाजपा को छोटे शहरों में भी बढ़त दिलाई।
गठबंधन की एकजुटता: महायुति एक मज़बूत मोर्चा
महायुति में सीट बंटवारे को लेकर कोई बड़ा विवाद सामने नहीं आया। यही वजह रही कि वोट बंटने से बचे और जीत आसान हुई।
ठाणे: संयुक्त रणनीति से 65 में से 45 सीटें
पुणे ग्रामीण: ज़िला परिषद में 150 में से 120 सीटें
नाशिक: नगर निगम में 75% पद गठबंधन के पास
यह दिखाता है कि गठबंधन ज़मीनी स्तर पर भी तालमेल बैठाने में सफल रहा।
एमवीए की निराशा: जमीनी पकड़ कमज़ोर
दूसरी ओर, महाविकास आघाड़ी को बड़ा झटका लगा। कुल मिलाकर उन्हें सिर्फ़ 25–26% सीटें ही मिल पाईं, जो पिछले चुनावों से काफ़ी कम हैं।
2022 की तुलना में करीब 600 सीटों का नुकसान
शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में सबसे ज़्यादा गिरावट
शिवसेना (उद्धव गुट) की शहरी पकड़ ढीली
मुंबई और ठाणे जैसे पुराने गढ़ों में भी प्रदर्शन कमजोर रहा।
मुंबई महानगर क्षेत्र में सिर्फ़ 15% सीटें
नवी मुंबई में 30 से घटकर 10 सीटें
कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार) भी पिछड़े
संयुक्त रूप से लगभग 300 सीटें
अहमदनगर, बीड जैसे जिलों में भारी अंतर से हार
कुल वोट शेयर लगभग 28% तक सिमटा
प्रमुख रणक्षेत्र: राजनीतिक पुनर्संरेखण के उदाहरण
पुणे नगर निगम: 162 में से 140 वार्ड महायुति के पास
नागपुर: भाजपा का किला, 95% सीटें
नाशिक: मेयर पद पर शिंदे गुट की जीत ने बाज़ी पलटी
एक दिलचस्प उदाहरण: पुणे के कोरेगांव पार्क वार्ड में भाजपा के युवा उम्मीदवार ने एमवीए के दिग्गज नेता को 2,000 वोटों से हराया—जो बदलाव का संकेत है।
शहरी–ग्रामीण संतुलन: व्यापक पकड़
महायुति की जीत सिर्फ़ शहरों तक सीमित नहीं रही।
शहरी इलाक़े: 1,600 में से 1,200 सीटें
ग्रामीण ज़िला परिषदें: 900 में से 650 सीटें
सातारा ज़िला परिषद: 70% सीटें महायुति को
यह संतुलन बताता है कि गठबंधन की अपील पूरे राज्य में फैली है।
स्थानीय नेतृत्व और शासन का असर
मतदाताओं ने बड़े भाषणों से ज़्यादा स्थानीय कामकाज को तरजीह दी।
सड़क, पानी, स्ट्रीट लाइट जैसे मुद्दे निर्णायक बने
भ्रष्टाचार के पुराने आरोप एमवीए पर भारी पड़े
साफ़ छवि वाले उम्मीदवारों को फ़ायदा मिला
आगे की राजनीति पर असर
महायुति: विधानसभा चुनावों के लिए मज़बूत आधार
जीत से आत्मविश्वास चरम पर
अंदरूनी मतभेद कम
टिकट बंटवारे में स्थानीय विजेताओं को प्राथमिकता
एमवीए: रणनीति में तात्कालिक बदलाव ज़रूरी
संगठन मज़बूत करने की ज़रूरत
स्थानीय मुद्दों पर फोकस
आपसी खींचतान से बाहर निकलना होगा
Maharashtra की राजनीति की दिशा तय
Maharashtra स्थानीय निकाय चुनाव परिणाम 2025 ने साफ़ संकेत दे दिया है—राज्य में फिलहाल महायुति का दबदबा है और भाजपा सबसे बड़ी ताक़त बनकर उभरी है।
महायुति: करीब 74% सीटें
एमवीए: करीब 26% सीटें
यह जनादेश आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए टोन सेट करता है और विपक्ष के लिए चुनौती बढ़ा देता है।
Surya Kumar Yadav शुबमन गिल की तरह बाहर क्यों नहीं हुए?
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