Delhi की प्रदूषण के खिलाफ जंग तेज़: मुख्यमंत्री आतिशी गुप्ता ने सख्त PUC नियम लागू किए, कोई छूट नहीं
हर सर्दी Delhi की हवा ज़हरीली हो जाती है। आंखों में जलन, सांस लेने में तकलीफ और घना स्मॉग आम बात बन चुकी है। दिसंबर 2025 में जब एक बार फिर AQI 400 के पार पहुंच गया, तो दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी गुप्ता ने बड़ा और सख्त फैसला लिया। उन्होंने पूरे शहर में PUC (Pollution Under Control) नियमों को बिना किसी छूट के सख्ती से लागू करने का आदेश दिया।
इस फैसले का साफ संदेश है—अब प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के लिए कोई रियायत नहीं। बच्चों की स्कूल छुट्टियाँ, दफ्तरों में घटती उत्पादकता और दमा जैसी बीमारियों के बढ़ते मामले सरकार को मजबूर कर चुके थे कि वह आधे-अधूरे उपाय छोड़कर ठोस कदम उठाए।
सेक्शन 1: नया आदेश क्या है और कैसे बदलेगा सिस्टम?
मुख्यमंत्री गुप्ता का आदेश Delhi में वाहन प्रदूषण से निपटने के तरीके को पूरी तरह बदल देता है। अब जो वाहन उत्सर्जन मानकों पर खरा नहीं उतरेगा, वह सड़क पर नहीं चलेगा।
‘कोई छूट नहीं’ नीति का मतलब
इस नीति के तहत:
निजी कार, बाइक, बस, ट्रक—सभी वाहनों पर समान नियम
2010 से पहले के पुराने वाहन भी शामिल
अस्थायी पास, अपील या जुर्माना देकर बच निकलने की व्यवस्था खत्म
मुख्यमंत्री ने साफ कहा,
“अगर हम नियमों में ढील देंगे, तो दिल्ली की सांसें और भारी होंगी।”
यह नियम कनॉट प्लेस से लेकर द्वारका और बाहरी दिल्ली तक हर इलाके में लागू होगा।
तकनीकी मानक और उत्सर्जन सीमाएँ
सभी वाहनों को भारत स्टेज-VI (BS-VI) मानकों को पूरा करना होगा।
पेट्रोल वाहनों में कार्बन मोनोऑक्साइड 0.3% से कम
डीज़ल वाहनों में स्मोक ओपेसिटी की कड़ी सीमा
CO, हाइड्रोकार्बन और NOx की जांच
PUC सेंटर अब सिर्फ औपचारिक जांच नहीं करेंगे। टेल पाइप से सीधे उत्सर्जन मापा जाएगा।
CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों की भी विज़ुअल जांच होगी ताकि किसी तरह की छेड़छाड़ न हो।
सरकार 2026 की शुरुआत तक 500 PUC केंद्रों में नई मशीनें लगाने जा रही है।

सख्त निगरानी और ज़मीन पर कार्रवाई
हर PUC सर्टिफिकेट की वैधता सीमित
पेट्रोल: 3 महीने
डीज़ल: 1 महीना
ट्रैफिक पुलिस द्वारा रैंडम चेकिंग
मोबाइल यूनिट और पर्यावरण टीमें मौके पर जांच करेंगी
Delhi -गुड़गांव बॉर्डर जैसे इलाकों में ड्रोन निगरानी की भी संभावना
परिवहन विभाग का ऑनलाइन सिस्टम बार-बार उल्लंघन करने वालों को चिन्हित करेगा।
सेक्शन 2: Delhi की हवा में वाहनों की बड़ी भूमिका
Delhi की स्मॉग समस्या में वाहन अहम कारण हैं।
वाहन प्रदूषण कितना बड़ा दोषी?
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार:
Delhi के PM2.5 का लगभग 30% हिस्सा वाहनों से
डीज़ल वाहनों से निकलने वाला NOx ज़मीन-स्तरीय ओज़ोन बनाता है
सर्दियों में ठंडी हवा प्रदूषकों को नीचे ही फंसा लेती है
नवंबर 2025 में मध्य दिल्ली में PM2.5 स्तर 150 माइक्रोग्राम/क्यूबिक मीटर तक पहुंच गया—सुरक्षित सीमा से पांच गुना ज्यादा।
पुराने और खराब रखरखाव वाले वाहन सबसे बड़े दोषी
10 साल से ज्यादा पुराने वाहन 10 गुना ज्यादा प्रदूषण फैलाते हैं
आनंद विहार और रिंग रोड जैसे इलाकों में जाम के दौरान हालात बदतर
एक सर्वे में पूर्वी दिल्ली के 40% ऑटो बुनियादी जांच में फेल
विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ इन वाहनों पर नियंत्रण से ही हॉटस्पॉट्स में 15% तक प्रदूषण घट सकता है।

विशेषज्ञों की राय
CSE की डॉ. अनुमिता रॉयचौधरी कहती हैं:
“सख्त PUC नियम सीधे स्रोत पर वार करते हैं। बिना इनके बाकी उपाय बेअसर रहते हैं।”
बीजिंग का उदाहरण देते हुए वे बताती हैं कि कड़े उत्सर्जन नियमों से पांच साल में हवा काफी साफ हुई। दिल्ली में भी पूरी तरह पालन हुआ तो औसत AQI में 20 अंकों तक सुधार संभव है।
सेक्शन 3: वाहन मालिकों पर असर और जरूरी बदलाव
Delhi के करीब 1.2 करोड़ वाहन मालिकों के लिए यह बड़ा बदलाव है।
नए PUC टेस्ट से कैसे गुजरें?
PUC कराने से पहले:
इंजन ट्यून-अप और ऑयल चेंज
स्पार्क प्लग और कैटेलिटिक कन्वर्टर जांचें
प्रक्रिया:
Parivahan पोर्टल से ऑनलाइन बुकिंग
टेस्ट से पहले वाहन गरम करें
फेल होने पर 15 दिन में सुधार कर दोबारा जांच
कई गैराज ₹500 से कम में डायग्नोस्टिक सुविधा दे रहे हैं।
नियम तोड़ने पर सजा
बिना वैध PUC: ₹1,000 जुर्माना
दोबारा उल्लंघन: ₹5,000
सड़क पर फेल टेस्ट होने पर वाहन ज़ब्त
3 बार उल्लंघन पर लाइसेंस सस्पेंड
कमर्शियल वाहनों के लिए नुकसान और भी बड़ा हो सकता है।

पुराने वाहनों से छुटकारा और अपग्रेड के विकल्प
सरकार प्रोत्साहन भी दे रही है:
15 साल पुराने वाहन स्क्रैप करने पर नई EV पर 50% तक छूट
CNG किट पर सब्सिडी (उत्सर्जन 70% तक कम)
2025 में 10,000 नए EV चार्जिंग स्टेशन
डीज़ल ऑटो को CNG में बदलने का खर्च करीब ₹20,000, जो ईंधन बचत से जल्दी निकल आता है।
सेक्शन 4: दूसरी नीतियों के साथ तालमेल
GRAP के साथ समन्वय
AQI 300 पर GRAP लागू
स्टेज-2 में बॉर्डर चेकिंग सख्त
गंभीर स्थिति में 10 साल से पुराने डीज़ल वाहन पूरी तरह प्रतिबंधित
पहले GRAP से 10% सुधार हुआ था, अब सख्त PUC के साथ असर दोगुना हो सकता है।
विभागों का संयुक्त अभियान
परिवहन विभाग: PUC और डेटा
पर्यावरण विभाग: मानक तय करना
ट्रैफिक पुलिस: ज़मीन पर कार्रवाई
हर महीने संयुक्त ड्रिल और ऐप के ज़रिये डेटा शेयरिंग से कार्रवाई तेज़ होगी।

लंबी अवधि की सोच: EV और साफ ईंधन
2030 तक 25% वाहन इलेक्ट्रिक
EV को मुफ्त पार्किंग जैसे लाभ
BS-VI ईंधन से ट्रांज़िशन आसान
लक्ष्य है—ऐसी Delhi जहां बच्चे बिना मास्क बाहर खेल सकें।
बिना समझौते के साफ हवा की ओर
मुख्यमंत्री आतिशी गुप्ता का बिना छूट वाला सख्त PUC आदेश Delhi के प्रदूषण संकट के खिलाफ एक निर्णायक कदम है। यह सीधे वाहन उत्सर्जन पर चोट करता है, जो PM2.5 और स्वास्थ्य समस्याओं का बड़ा कारण है।
नियम कड़े हैं, सज़ा साफ है, लेकिन समाधान भी मौजूद हैं—रेट्रोफिटिंग, EV और सब्सिडी। GRAP और विभागीय तालमेल इस लड़ाई को और मज़बूत बनाते हैं।
अब ज़रूरत है निरंतर और ईमानदार अमल की।
आज ही अपना PUC कराएँ—आपके फेफड़े आपका शुक्रिया कहेंगे।
साफ चलें, साफ सांस लें और दिल्ली को यह जंग जिताने में योगदान दें।

