Delhi की जलभराव समस्या के अंत की ओर: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने चार मेगा ट्रंक ड्रेन परियोजनाओं का किया ऐलान

हर साल भारी बारिश Delhi की सड़कों को नदियों में बदल देती है। गाड़ियाँ घुटनों तक भरे पानी में बंद हो जाती हैं। लोग डूबे हुए बाजारों से गुजरते हैं, मलबे से बचते हुए। दशकों से यह अव्यवस्था शहर को परेशान करती रही है। लेकिन अब उम्मीद जगी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस समस्या को स्थायी रूप से हल करने की ठोस योजना पेश की है। चार बड़े ट्रंक ड्रेन बनाए जा रहे हैं, जो मानसून की मुसीबत को हमेशा के लिए खत्म करने का वादा करते हैं।

ये परियोजनाएँ Delhi के सबसे ज्यादा जलभराव वाले इलाकों को निशाना बनाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ये ड्रेन भारी मात्रा में पानी को संभालने में सक्षम होंगे। इनके पूरा होते ही लाखों लोगों को राहत मिलेगी। यह कोई अस्थायी मरम्मत नहीं, बल्कि शहर की जलनिकासी व्यवस्था का व्यापक उन्नयन है। अब लोग तेज बारिश में भी सूखी सड़कों की उम्मीद कर सकते हैं।

Delhi की जलभराव समस्या का पैमाना

Delhi हर गर्मी में बाढ़ जैसी स्थिति का सामना करती है। मानसून की तेज बारिश पुरानी नालियों और पाइपों पर भारी पड़ जाती है। छोटी बारिश भी देखते-देखते बड़ी समस्या बन जाती है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और बार-बार होने वाला असर

2019 में एक ही तूफान ने आधे शहर को ठप कर दिया था। आईटीओ और मिंटो ब्रिज जैसे इलाकों में पानी छह फीट तक भर गया। 2025 में भी यही हाल रहा। साकेत और हौज खास जैसे दक्षिण Delhi के इलाके झील में बदल गए। फ्लाईओवर तक डूब गए और यात्रियों से भरी बसें फँस गईं।

मुख्य वजह है 1970 के दशक की पुरानी जलनिकासी व्यवस्था, जो आज की बारिश और बढ़ते निर्माण का दबाव नहीं झेल पाती। कचरा और गड्ढे नालियों को जाम कर देते हैं। सिविल लाइंस और पूर्वी Delhi जैसे इलाके हर साल सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।

आर्थिक और सामाजिक नुकसान

जलभराव से Delhi को भारी आर्थिक नुकसान होता है। 2024 की एक रिपोर्ट के अनुसार हर साल 5,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होता है। इसमें खराब सड़कें, दुकानों का नुकसान और काम ठप होने से हुई आय की हानि शामिल है।

स्वास्थ्य जोखिम भी बढ़ते हैं। जमा पानी में मच्छर पनपते हैं, जिससे डेंगू जैसी बीमारियाँ फैलती हैं। 2023 में मानसून के बाद डेंगू के मामले 40% तक बढ़ गए। सबसे ज्यादा मार गरीब बस्तियों पर पड़ती है, खासकर यमुना के किनारे रहने वालों पर।

BJP govt will leave no stone unturned to address waterlogging issue in Delhi: CM Rekha Gupta

समाधान की रीढ़: चार ट्रंक ड्रेन

मुख्यमंत्री गुप्ता की योजना का केंद्र बिंदु ये चार नए ट्रंक ड्रेन हैं। ये पानी के लिए मुख्य मार्ग की तरह काम करेंगे, जो रिहायशी इलाकों से पानी को सुरक्षित निकास तक पहुँचाएँगे।

परियोजना का विवरण और क्षेत्र

  1. यमुना रिलीफ ड्रेन (उत्तर दिल्ली)
    वजीराबाद से यमुना तक 15 किमी लंबा। कश्मीरी गेट और सदर बाजार जैसे इलाकों को राहत।

  2. नजफगढ़ बेसिन चैनल (पश्चिम दिल्ली)
    12 किमी लंबा, द्वारका और जनकपुरी को जलभराव से बचाएगा।

  3. ओखला एक्सटेंशन ड्रेन (दक्षिण दिल्ली)
    10 किमी लंबा, कालकाजी और गोविंदपुरी जैसे इलाकों के लिए।

  4. शाहदरा स्पाइन ड्रेन (पूर्वी दिल्ली)
    14 किमी लंबा, आनंद विहार और लक्ष्मी नगर की सुरक्षा करेगा।

ट्रंक ड्रेन शहर की जलनिकासी प्रणाली की मुख्य धमनियाँ हैं, जो भारी मात्रा में पानी को तेजी से बाहर निकालती हैं।

इंजीनियरिंग क्षमता और मजबूती

हर ड्रेन 8–10 मीटर चौड़ा और 6 मीटर गहरा होगा। ये प्रति सेकंड 200 क्यूबिक मीटर पानी निकाल सकते हैं—पुरानी व्यवस्था से चार गुना ज्यादा। मजबूत कंक्रीट, स्टील रिइनफोर्समेंट, सिल्ट ट्रैप और कंट्रोल गेट्स इन्हें लंबे समय तक टिकाऊ बनाते हैं।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सोच और समयसीमा

मुख्यमंत्री गुप्ता इन ड्रेनों को बाढ़ मुक्त दिल्ली की कुंजी मानती हैं। उनका लक्ष्य है तेज़, पारदर्शी और गुणवत्ता-पूर्ण निर्माण।

बजट और समयसीमा

  • कुल लागत: 2,500 करोड़ रुपये

  • निर्माण शुरू: 2025 के अंत में

  • सभी चार ड्रेन पूरे होने की समयसीमा: दिसंबर 2027

दिल्ली जल बोर्ड और लोक निर्माण विभाग मिलकर इसकी निगरानी कर रहे हैं।

BJP govt will leave no stone unturned to address waterlogging issue in Delhi: CM Rekha Gupta

तकनीक और पर्यावरण का समावेश

स्मार्ट सेंसर पानी के स्तर पर नजर रखेंगे। मोबाइल ऐप से अधिकारी तुरंत कार्रवाई कर सकेंगे। रेन गार्डन, पारगम्य सड़कें और हरित पट्टियाँ पानी को प्राकृतिक रूप से सोखने में मदद करेंगी। परियोजना को जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया गया है।

आम नागरिकों पर असर

इन ड्रेनों के बनने से रोज़मर्रा की जिंदगी आसान होगी।

जलभराव में कमी

विशेषज्ञों के अनुसार, प्रभावित इलाकों में जलभराव के दिन 70% तक कम हो जाएंगे। पानी घंटों में निकल जाएगा, दिनों में नहीं।

यातायात और सेवाओं में सुधार

  • ट्रैफिक जाम में 30% तक कमी

  • एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की तेज़ पहुँच

  • बस और मेट्रो सेवाओं में कम देरी

  • दुकानों और व्यापार को फायदा

नागरिक दिल्ली जल बोर्ड की वेबसाइट और ऐप के जरिए अपने इलाके की प्रगति देख सकते हैं।

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एक मजबूत और बाढ़-मुक्त दिल्ली की ओर

चार ट्रंक ड्रेन परियोजनाएँ दिल्ली के लिए एक ऐतिहासिक कदम हैं। ये सिर्फ जलभराव नहीं, बल्कि उससे जुड़े आर्थिक, स्वास्थ्य और सामाजिक संकटों का भी समाधान हैं।

मुख्य बातें:

  • जलभराव जोखिम में 70% तक कमी

  • हर साल अरबों रुपये की बचत

  • आधुनिक तकनीक और टिकाऊ ढांचा

  • 2027 तक पूरी तरह लागू

दिल्ली अब मानसून से डरने के बजाय उसका सामना करने के लिए तैयार है। इन परियोजनाओं के साथ राजधानी एक नई, मजबूत पहचान की ओर बढ़ रही है—बारिश हो या धूप, रास्ते साफ रहेंगे।