दुखद क्षति: Prashant तमांग की असमय मृत्यु और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की श्रद्धांजलि
इस हफ्ते आई खबर किसी वज्रपात से कम नहीं थी। लोकप्रिय गायक और कोलकाता पुलिस के अधिकारी Prashant तमांग का मात्र 40 वर्ष की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। उनके अचानक चले जाने से पूरे देश, खासकर पश्चिम बंगाल और दार्जिलिंग में शोक की लहर दौड़ गई।
Prashant तमांग को लोग सबसे ज्यादा इंडियन आइडल सीजन 3 (2007) जीतने के लिए याद करते हैं। दार्जिलिंग की पहाड़ियों से निकलकर उन्होंने राष्ट्रीय मंच पर पहचान बनाई। बाद में उन्होंने कोलकाता पुलिस जॉइन कर संगीत और जनसेवा—दोनों को एक साथ निभाया।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया पर गहरा दुख जताया। उन्होंने इसे राज्य के लिए अपूरणीय क्षति बताया और कोलकाता पुलिस से उनके मजबूत जुड़ाव को याद किया। उनके शब्दों ने लाखों लोगों के दिल को छू लिया।
यह कहानी Prashant तमांग के जीवन, उनकी सफलता, उनकी पुलिस सेवा और उनके जाने के बाद उमड़े शोक को समर्पित है—एक ऐसे व्यक्ति को, जिसने कला और कर्तव्य को एक साथ जिया।
दार्जिलिंग से राष्ट्रीय पहचान तक: Prashant तमांग का सफर
Prashant तमांग का बचपन दार्जिलिंग की ठंडी वादियों में बीता। चाय बागानों के बीच गूंजती उनकी आवाज़ ने बहुत कम उम्र में सबका ध्यान खींचा। संगीत उनके लिए सपना भी था और सहारा भी।
शुरुआती जीवन संघर्षों से भरा था। परिवार की आर्थिक स्थिति साधारण थी। घर चलाने के लिए उन्होंने छोटे-मोटे काम किए, लेकिन स्थानीय आयोजनों में गाना नहीं छोड़ा।
प्रारंभिक जीवन और जड़ें
1985 में जन्मे Prashant एक साधारण गोरखा परिवार से थे। उनके पिता ड्राइवर थे। स्कूल कार्यक्रमों में वे नेपाली लोकगीत गाते थे।
उन्होंने कुछ समय भारतीय सेना में भी सेवा की, जिससे उनके व्यक्तित्व में अनुशासन और जिम्मेदारी आई।
सेना से निकलने के बाद वे मुंबई पहुंचे और ऑडिशन देना शुरू किया। संघर्ष लंबा था, लेकिन हौसला मजबूत।
इंडियन आइडल सीजन 3: निर्णायक मोड़
2007 में इंडियन आइडल के मंच पर उन्होंने नेपाली गीत गाकर जजों और दर्शकों का दिल जीत लिया। महीनों चले मुकाबले में उनकी सादगी और आवाज़ ने उन्हें विजेता बना दिया।
यह पहली बार था जब पूर्वोत्तर भारत से कोई प्रतिभागी इंडियन आइडल जीता। दार्जिलिंग में जश्न का माहौल था। वे रातों-रात प्रेरणा बन गए।

उत्तर बंगाल के युवाओं के लिए प्रेरणा
Prashant की सफलता ने पहाड़ी इलाकों के युवाओं को सपना देखने की हिम्मत दी। उन्होंने गोरखा संस्कृति को राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई।
आज भी कई युवा कलाकार उन्हें अपनी प्रेरणा मानते हैं।
कोलकाता पुलिस से अनोखा रिश्ता
शोहरत के बावजूद Prashant ने सेवा को चुना। उन्होंने 2011 में पश्चिम बंगाल पुलिस जॉइन की। यह फैसला सबको चौंकाने वाला था।
मनोरंजन से आगे कर्तव्य का चयन
उन्होंने कठिन परीक्षाएं पास कीं और कोलकाता में तैनाती ली। उनका मानना था कि संगीत दिलों की सेवा करता है और पुलिस समाज की।
2013 में वे सब-इंस्पेक्टर बने और 2020 में इंस्पेक्टर के पद पर पदोन्नत हुए।
जिम्मेदारियाँ और सामुदायिक जुड़ाव
उन्होंने ट्रैफिक और कम्युनिटी पुलिसिंग में काम किया। स्कूलों में जाकर बच्चों को कानून और नशे से बचाव के बारे में गीतों के माध्यम से समझाया।
पुलिस कार्यक्रमों में वे गाते भी थे, जिससे जवानों का मनोबल बढ़ता था। आम लोग उन्हें बेहद स्नेह और सम्मान से देखते थे।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की श्रद्धांजलि
Prashant के निधन के कुछ ही घंटों बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया पर भावुक संदेश साझा किया।
मुख्यमंत्री के शब्द
उन्होंने लिखा,
“Prashant तमांग पश्चिम बंगाल के लिए एक अनमोल रत्न थे। उन्होंने अपनी आवाज़ और अपनी सेवा—दोनों से लोगों का दिल जीता। यह क्षति अपूरणीय है।”
उन्होंने कोलकाता पुलिस में उनकी भूमिका को भी विशेष रूप से याद किया और परिवार के प्रति संवेदना जताई।
राजनीतिक और सामाजिक महत्व
यह श्रद्धांजलि सिर्फ औपचारिक नहीं थी। इससे यह संदेश गया कि Prashant केवल एक गायक नहीं, बल्कि राज्य की शान थे। इससे पुलिस बल और गोरखा समुदाय—दोनों को सम्मान मिला।
अन्य नेताओं, कलाकारों और पुलिस अधिकारियों ने भी गहरा दुख व्यक्त किया।

जन प्रतिक्रिया और शोक
सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि
X (ट्विटर), फेसबुक और इंस्टाग्राम पर
#RIPPrashantTamang ट्रेंड करने लगा।
लोगों ने उनके गीतों के वीडियो, पुरानी तस्वीरें और यादें साझा कीं।
कलाकारों और साथियों की प्रतिक्रियाएँ
इंडियन आइडल से जुड़े कलाकारों, संगीतकारों और बॉलीवुड हस्तियों ने उन्हें याद किया। कई ने कहा—“Prashant सिर्फ गायक नहीं, एक नेक इंसान थे।”
सार्वजनिक श्रद्धांजलि
दार्जिलिंग में मोमबत्ती जलाकर हजारों लोगों ने श्रद्धांजलि दी। कोलकाता में पुलिस और नागरिकों ने मौन रखा। भविष्य में उनकी स्मृति में स्मारक और छात्रवृत्ति की योजनाओं की भी घोषणा हुई।

अधूरी रह गई राहें और अमर विरासत
Prashant एक नए फोक-फ्यूजन एल्बम पर काम कर रहे थे। पुलिस सेवा में भी वे सामुदायिक योजनाओं को आगे बढ़ाना चाहते थे। उनका जाना कई अधूरे सपने छोड़ गया।
लेकिन उनकी विरासत अमर है।
एक ऐसा व्यक्ति, जिसने माइक और वर्दी—दोनों को समान सम्मान के साथ निभाया।
दोहरी निष्ठा की याद
Prashant तमांग का जाना हम सबके लिए गहरा आघात है। इंडियन आइडल की चमक से लेकर कोलकाता पुलिस की जिम्मेदारी तक—उन्होंने जीवन को पूरी ईमानदारी से जिया।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की श्रद्धांजलि पूरे राज्य की भावना को दर्शाती है। दार्जिलिंग और कोलकाता—दोनों आज उन्हें याद कर रहे हैं।
उनके गीत आज भी गूंजते हैं। उनकी सेवा प्रेरणा देती है।
Prashant तमांग—एक आवाज़, एक सिपाही, एक अमर याद।
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