जीरो टॉलरेंस नीति: CM योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कसा शिकंजा
सोचिए, सुबह उठें और देखें कि आपके आंगन का एक हिस्सा पड़ोसी की बाड़ में समा गया है। उत्तर प्रदेश में कई लोगों के लिए अवैध अतिक्रमण यही कड़वी सच्चाई रहा है। हाल ही में आयोजित ‘जनता दर्शन’ कार्यक्रम में CM योगी आदित्यनाथ ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए साफ कहा—भूमि कब्जाने वालों के लिए कोई रियायत नहीं होगी। यह कदम संपत्ति अधिकारों की रक्षा और सरकार पर भरोसा मजबूत करने की दिशा में बड़ा संदेश है। वर्षों से गांवों से लेकर शहरों तक जमीन विवाद यूपी की बड़ी समस्या रहे हैं। योगी का यह अभियान सिर्फ बयानबाज़ी नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई का वादा करता है। साफ जमीन का मतलब है—आवास, स्कूल और सड़कों के लिए सुगम विकास। अब आम नागरिक राज्य को भूमि माफिया के खिलाफ ढाल के रूप में देख रहा है।
आदेश स्पष्ट: अवैध भूमि कब्जे पर CM के निर्देश
जनसभाओं और जनसुनवाइयों में CM के शब्द सीधे और कड़े रहे। संदेश साफ है—अवैध अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं होगा। इससे यूपी में कानून के सख्त पालन की दिशा तय होती है।
जनता दर्शन में सख्त चेतावनी
पिछले हफ्ते लखनऊ में हुए जनता दर्शन में सैकड़ों लोग अपनी जमीन से जुड़े मामलों के साथ पहुंचे। CM ने ध्यान से सुना और दो टूक कहा—“अवैध कब्जे पर जीरो टॉलरेंस”। उन्होंने अधिकारियों को हर शिकायत पर तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए। देरी करने वालों की जवाबदेही तय होगी। यह सिर्फ शब्द नहीं हैं—पहले भी ऐसे सत्रों के बाद अवैध कब्जों पर बुलडोजर चले हैं। इससे नागरिकों का भरोसा बढ़ा और गलत काम करने वालों में डर पैदा हुआ।
यूपी कानून में अवैध अतिक्रमण की परिभाषा-CM
बिना अधिकार किसी जमीन पर कब्जा करना—चाहे वह सरकारी हो, निजी हो या सार्वजनिक उपयोग की—अवैध अतिक्रमण कहलाता है। उत्तर प्रदेश में राजस्व संहिता की धारा 122बी और 67 इसके खिलाफ स्पष्ट प्रावधान करती हैं। ग्राम सभा, राज्य संपत्ति या सार्वजनिक स्थलों पर अनधिकृत कब्जे पर जुर्माना, जेल और ध्वस्तीकरण तक का प्रावधान है। दोहराव पर सख्ती और बढ़ाई गई है। स्पष्ट परिभाषा से भ्रम कम होता है और न्यायिक प्रक्रिया तेज होती है।

व्यापक अभियान: क्रियान्वयन और प्रभाव-CM
योगी सरकार के तहत अभियान व्यापक स्तर पर चल रहा है। जमीन पर उतरकर कार्रवाई हो रही है—और नतीजे दिख रहे हैं।
सफलता की कहानियां और आंकड़े
पिछले दो वर्षों में राज्य ने 10,000 एकड़ से अधिक भूमि मुक्त कराई है। 2025 में वाराणसी, लखनऊ जैसे जिलों में 2,500 से अधिक मामलों का निस्तारण हुआ। गोरखपुर के पास वर्षों से कब्जाई गई 50 एकड़ जमीन अब स्कूल के लिए चिन्हित है। मथुरा में मंदिर की जमीन से अवैध दुकानें हटाई गईं। 2026 की शुरुआत तक राज्यभर में 1.2 लाख से अधिक संरचनाएं हटाई जा चुकी थीं। नालों की सफाई से जलभराव घटा और रास्ते खुले—यह मेहनत रंग ला रही है।
सार्वजनिक भूमि बनाम निजी विवाद-CM
मुख्य फोकस सार्वजनिक भूमि पर है—ग्राम सभा, धार्मिक स्थल, नाले और सड़कें। ये कब्जे विकास में सबसे बड़ा रोड़ा होते हैं। साथ ही निजी भूमि विवादों में भी हस्तक्षेप होता है, खासकर जब कमजोर वर्ग प्रभावित हों। दलित आवास, विधवा पेंशन जैसी योजनाओं की जमीन को प्राथमिक सुरक्षा मिलती है। आंकड़ों के अनुसार 70% कार्रवाई सरकारी/सार्वजनिक भूमि पर हुई—यह संतुलन विकास और न्याय दोनों सुनिश्चित करता है।

तकनीक और पारदर्शिता: सख्त निगरानी
तकनीक से छिपे कब्जों पर लगाम लगी है। यूपी ने पारंपरिक कार्रवाई के साथ स्मार्ट टूल्स जोड़े हैं।
GIS मैपिंग और डिजिटल निगरानी
GIS मैपिंग, ड्रोन और मोबाइल ऐप्स से वास्तविक समय में अतिक्रमण की पहचान होती है। आगरा में हाल ही में नदी किनारे कब्जे पहचानकर 200 एकड़ भूमि मुक्त कराई गई। नागरिक फोटो के साथ शिकायत दर्ज कर सकते हैं। डेटा केंद्रीय प्रणाली में जाता है, जिससे टीम तुरंत भेजी जाती है। प्रतिक्रिया समय हफ्तों से घटकर दिनों में आ गया है। आगे AI आधारित पूर्वानुमान की योजना भी है।
स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही-CM
हर जिले के डीएम के लिए लक्ष्य तय हैं—तिमाही में न्यूनतम मामलों का निस्तारण। पुलिस प्रमुखों की भी भूमिका तय है। मासिक समीक्षा होती है और प्रगति पब्लिक डैशबोर्ड पर दिखती है। लापरवाही पर कार्रवाई तय है—एक मामले में देरी पर अधिकारी का तबादला हुआ। यह जवाबदेही काम को तेज रखती है।
कमजोर वर्गों की सुरक्षा: छोटे भूमिधारकों का संरक्षण
भूमि विवादों में सबसे ज्यादा नुकसान कमजोर तबकों को होता है। इस नीति में उनकी सुरक्षा प्राथमिक है।

आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं के लिए भूमि
अस्पताल, स्कूल, नाले और सड़कें—इनके लिए जमीन खाली होना जरूरी है। बरेली में कब्जे से मुक्त जमीन पर अस्पताल का विस्तार हुआ। लखनऊ में खेल मैदान खुला। नालों की सफाई से बाढ़ की समस्या घटी। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे जैसे प्रोजेक्ट्स भी कब्जे हटने से तेज हुए। सार्वजनिक हित सीधे बेहतर हुआ।
असली मालिकों के लिए कानूनी रास्ता
यदि आपकी जमीन पर कब्जा है, तो तहसील कार्यालय में दस्तावेजों के साथ शिकायत दर्ज करें। ई-शिकायत के लिए राज्य पोर्टल पर फोटो और विवरण अपलोड करें। पुलिस और राजस्व की संयुक्त जांच से त्वरित कार्रवाई होती है। 2025 में 5,000 से अधिक लोगों को इसी प्रक्रिया से जमीन वापस मिली। विशेष बेंचों से मामलों का तेजी से निपटारा हो रहा है—बड़े वकील की जरूरत नहीं, सही कागजात काफी हैं।
भूमि माफिया के खिलाफ स्थायी रोक
CM योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति उत्तर प्रदेश में गेम-चेंजर साबित हो रही है। खेतों से शहरों तक अवैध अतिक्रमण पर निर्णायक प्रहार हो रहा है। भूमि मुक्त हो रही है, तकनीक से निगरानी मजबूत हुई है और कमजोर वर्गों को संरक्षण मिला है। संदेश साफ है—देरी नहीं, कार्रवाई होगी; तोड़फोड़, जुर्माना और जेल—तीनों विकल्प खुले हैं। इससे संपत्ति सुरक्षित होगी और विकास को गति मिलेगी।
सतर्क रहें। शिकायत दर्ज करें।
इस लड़ाई में आपकी आवाज़ मायने रखती है। मिलकर एक न्यायपूर्ण और पारदर्शी उत्तर प्रदेश बनाएं।
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