Makar संक्रांति पर प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में उमड़ा आस्था का सैलाब, हजारों श्रद्धालुओं ने किया पवित्र स्नान
कल्पना कीजिए—सफेद वस्त्रों में लिपटे श्रद्धालु, जनवरी की ठंडी सुबह, और संगम के शांत जल में उतरते हुए हजारों लोग। मंत्रोच्चार लहरों की तरह गूंज रहा है, जल की छींटों के साथ पक्षियों की आवाज़ें मिलकर एक अद्भुत वातावरण रच देती हैं। यह दृश्य है प्रयागराज के त्रिवेणी संगम का, जहाँ मकर संक्रांति के अवसर पर हर वर्ष हजारों श्रद्धालु पवित्र स्नान के लिए एकत्र होते हैं।
Makar संक्रांति सूर्य के उत्तरायण होने का पर्व है—अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का प्रतीक। आस्था रखने वालों के लिए संगम में यह स्नान आत्मशुद्धि और नए आरंभ का अवसर होता है। प्रयागराज, जिसे पहले इलाहाबाद कहा जाता था, सदियों से मोक्ष की कामना करने वालों का केंद्र रहा है। गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम को सबसे पवित्र तीर्थों में गिना जाता है।
Makar संक्रांति का शुभ महत्व
सूर्य का गोचर और ज्योतिषीय महत्व
Makar संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है। इसे उत्तरायण की शुरुआत माना जाता है, जब दिन लंबे और रातें छोटी होने लगती हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार यह समय शुभ फलदायी होता है।
श्रद्धालु पंचांग देखकर शुभ मुहूर्त, खासकर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करते हैं। वर्ष 2026 में यह पुण्यकाल 14 जनवरी की सुबह पड़ा, जिससे संगम पर भोर से ही भीड़ उमड़ पड़ी।
मान्यता है कि इस समय किया गया स्नान पुण्य को कई गुना बढ़ा देता है और नकारात्मकता को दूर करता है।
गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती की कथा
पुराणों के अनुसार गंगा और यमुना स्वर्ग से धरती पर आईं, जबकि सरस्वती अदृश्य रूप में संगम पर उनसे मिलती हैं। तीनों नदियों का यह मिलन अत्यंत पवित्र माना जाता है।
यहाँ स्नान करने से केवल एक जन्म नहीं, बल्कि कई जन्मों के पाप धुल जाते हैं—ऐसी मान्यता है। यह स्थल मानो आत्मा के लिए “रीसेट बटन” जैसा है, जहाँ कर्मों का बोझ हल्का हो जाता है।
पवित्र स्नान की तैयारी: व्यवस्थाएँ और अनुष्ठान
विशाल श्रद्धालु संख्या का प्रबंधन
हर Makar संक्रांति पर एक करोड़ से अधिक श्रद्धालु संगम पहुँचते हैं। इतनी बड़ी भीड़ को संभालने के लिए प्रशासन व्यापक इंतज़ाम करता है।

अस्थायी पुल बनाए जाते हैं
जल पुलिस और नावें तैनात रहती हैं
रेल और बस सेवाओं में अतिरिक्त फेरे लगाए जाते हैं
स्वयंसेवक और पुलिस लाइन व्यवस्था संभालते हैं
मोबाइल ऐप्स और सूचना केंद्र सुरक्षित मार्गों की जानकारी देते हैं, ताकि श्रद्धालु सहजता से स्नान कर सकें।
स्नान के अलावा अन्य प्रमुख अनुष्ठान
स्नान से पहले घाट पर सूर्य देव की पूजा, दीप प्रज्वलन और मंत्रोच्चार किया जाता है। स्नान के बाद नदी को अर्घ्य दिया जाता है।
तिल और गुड़ Makar संक्रांति के मुख्य प्रतीक हैं। तिल-गुड़ के लड्डू बांटे जाते हैं, जो मिठास और सौहार्द का संदेश देते हैं। घरों में हवन में तिल अर्पित किया जाता है।
पहली बार आने वालों के लिए सुझाव:
सूर्योदय से पहले पहुँचें
सूती, जल्दी सूखने वाले कपड़े पहनें
तौलिया, अतिरिक्त कपड़े और पानी साथ रखें
पहचान पत्र अपने पास रखें
संगम का आध्यात्मिक अनुभव
सामूहिक भक्ति का साक्षात्कार
संगम पर पहुँचते ही भजनों की ध्वनि, शंखनाद और मंत्रों की गूंज मन को भीतर तक छू जाती है। हजारों लोग एक साथ स्नान करते हुए एक ही भावना से जुड़े होते हैं।
यह सामूहिक भक्ति एक अद्वितीय ऊर्जा रचती है—मानो आप किसी विशाल पारिवारिक प्रार्थना का हिस्सा हों।
एक श्रद्धालु कहते हैं, “संगम पर संक्रांति के दिन हर ओर ईश्वरीय अनुभूति होती है, ऐसा अनुभव कहीं और नहीं।”
तिल-गुड़ और दान की परंपरा
सर्दियों में तिल-गुड़ शरीर को ऊष्मा देता है और रिश्तों में मिठास घोलता है। लोग इसे आपस में बाँटकर पुराने मतभेद भुलाते हैं।
दान का विशेष महत्व है—अन्न, वस्त्र, कंबल या दक्षिणा देना पुण्यकारी माना जाता है। यह व्यक्तिगत आस्था को सामाजिक सेवा से जोड़ता है।
आप भी कर सकते हैं:
तिल के लड्डू बनाकर बाँटना
घाटों पर दान केंद्रों में सहयोग
जरूरतमंदों की मदद
परंपरा और आधुनिकता का संगम
हिंदू परंपरा में प्रयागराज का स्थायी स्थान
Makar संक्रांति प्रयागराज के धार्मिक कैलेंडर का अहम पर्व है और कुंभ मेले जैसे महाआयोजनों की भूमिका तैयार करता है। यहाँ परंपरा और आधुनिकता साथ-साथ चलती हैं।
मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के ज़रिए अब नई पीढ़ी भी इस आस्था से जुड़ रही है। दादा-दादी अपने पोते-पोतियों को परंपराएँ सिखाते हैं—यह सिलसिला यूँ ही चलता रहता है।
पर्यावरण और संरक्षण की ज़रूरत
नदियों पर आज प्रदूषण का दबाव है। भीड़ और कचरे से जल की शुद्धता प्रभावित होती है। लेकिन प्रयास भी जारी हैं—
प्रशासन द्वारा सफाई अभियान
स्वयंसेवी संस्थाओं की जागरूकता मुहिम
प्लास्टिक पर रोक और कचरा प्रबंधन
आप भी योगदान दे सकते हैं:
कचरा डस्टबिन में डालें
प्लास्टिक का उपयोग न करें
नदी संरक्षण अभियानों का समर्थन करें
पवित्रता को जीवन में उतारें
त्रिवेणी संगम में Makar संक्रांति का पवित्र स्नान आस्था, परंपरा और सामूहिक चेतना का अद्भुत संगम है। हजारों श्रद्धालु यहाँ स्नान कर आत्मिक शांति और नई ऊर्जा के साथ लौटते हैं।
यह केवल स्नान नहीं, बल्कि बेहतर जीवन की ओर एक कदम है। सूर्य का उत्तरायण होना हमें याद दिलाता है कि परिवर्तन हमेशा प्रकाश की ओर ले जाता है।
इन पलों की पवित्रता को अपने साथ घर ले जाएँ और पूरे वर्ष जीवन में उतारें। अगली Makar संक्रांति पर, यदि अवसर मिले, तो संगम की इस दिव्य अनुभूति का हिस्सा ज़रूर बनिए।
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