Delhi की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने वायु प्रदूषण रणनीति की समीक्षा की, स्वच्छ हवा के लिए समयबद्ध कार्रवाई की मांग
हर सर्दी में Delhi की हवा घनी धुंध में बदल जाती है, जो शहर को जकड़ लेती है। जनवरी 2026 में ठंड बढ़ते ही स्मॉग का डर फिर लौट आया है। लोगों को खांसी होने लगती है, आंखों में जलन होती है और बच्चे घरों में रहने को मजबूर हो जाते हैं। इसी बीच इस सप्ताह एक अहम बैठक में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कमान संभाली। उन्होंने वायु प्रदूषण से निपटने की योजनाओं की समीक्षा की और त्वरित समाधान पर जोर दिया। यह लेख उनके निर्देशों, पुरानी रणनीतियों की कमियों और दिल्लीवासियों पर इसके असर को सरल भाषा में समझाता है।
मौजूदा प्रदूषण-रोधी उपायों की समीक्षा और कमियों की पहचान
वर्तमान प्रोटोकॉल और लागू करने की प्रभावशीलता का आकलन
बैठक में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) की समीक्षा की गई। यह योजना तब लागू होती है जब हवा की गुणवत्ता बहुत खराब हो जाती है। इसमें निर्माण स्थलों की धूल, फैक्ट्रियों का धुआं और वाहनों के उत्सर्जन जैसे पहलू शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि कुछ उपाय कारगर रहे हैं, जैसे सड़कों पर पानी का छिड़काव। लेकिन भीड़भाड़ वाले इलाकों में नियमों का पालन कमजोर है।
कमियां साफ दिखीं—कई निर्माण स्थलों पर धूल ढकने के इंतजाम नहीं होते, फैक्ट्रियां उत्सर्जन की रिपोर्ट देर से देती हैं और पीक ऑवर्स में लोग नियमों को नजरअंदाज करते हैं। मुख्यमंत्री गुप्ता ने कहा कि इन्हीं वजहों से योजना कमजोर पड़ती है। उन्होंने खासकर सर्दियों में सख्त निगरानी की जरूरत बताई।
पिछले साल के आंकड़े भी चिंता बढ़ाते हैं। दिल्ली में 200 से ज्यादा दिन खराब वायु गुणवत्ता वाले रहे। यह स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। बैठक में जोर दिया गया कि कागजी योजनाओं से ज्यादा ज़मीनी कार्रवाई जरूरी है।
डेटा आधारित तथ्यों से बढ़ी कार्रवाई की तात्कालिकता
Delhi की हवा के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। पिछले सर्दियों में AQI 400 से ऊपर चला गया, जो बेहद खतरनाक स्तर है। आकलन बताता है कि करीब 40% प्रदूषण वाहनों और धूल से आता है। आसपास के राज्यों में पराली जलाने से धुआं और बढ़ जाता है।
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इन तथ्यों ने बैठक में सबको झकझोर दिया। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि बिना सख्त कदमों के हालात हर साल बिगड़ते जाएंगे। इसलिए उन्होंने समयसीमा से जुड़ी कार्रवाई का आदेश दिया। यह सिर्फ बातें नहीं, ठोस डेटा पर आधारित फैसला है।
इसे ऐसे समझिए जैसे फायर अलार्म बजना—अलार्म बजते ही तुरंत कदम उठाने पड़ते हैं। दिल्ली को भी अब वही तेजी चाहिए।
मुख्यमंत्री गुप्ता का आदेश: समयबद्ध कार्ययोजना के मुख्य स्तंभ
अलग-अलग क्षेत्रों के लिए सख्त समयसीमा
मुख्यमंत्री ने बड़े प्रदूषकों के लिए कड़ी डेडलाइन तय की।
निर्माण स्थलों पर फरवरी के अंत तक ग्रीन नेट और वेट ड्रिलिंग अनिवार्य।
कार्यालयों के लिए काम के समय को 8 से 10 बजे के बीच अलग-अलग करने का फैसला, जिसे मध्य जनवरी तक 50% दफ्तरों में लागू करना है।
वाहनों के लिए PUC सर्टिफिकेट की सख्त जांच, अगले सप्ताह से चालान शुरू।
मार्च 15 तक निर्माण क्षेत्र में 100% पालन जरूरी होगा। एजेंसियों की साप्ताहिक ऑडिट होगी। इन कदमों से धूल और ट्रैफिक जाम दोनों कम होंगे।
मुख्य निर्देश:
10 दिन में सभी सक्रिय निर्माण स्थलों पर धूल अवरोधक।
25 जनवरी तक 50% कार्यालयों में स्टैगरड टाइम।
फरवरी की शुरुआत तक Delhi में प्रवेश करने वाले सभी वाहनों के लिए PUC अनिवार्य।

निगरानी और जवाबदेही को मजबूत करना
सड़कों पर मोबाइल मॉनिटरिंग यूनिट्स बढ़ाई जाएंगी। 50 नए स्थानों पर रियल-टाइम एयर क्वालिटी मापी जाएगी। ड्रोन से अवैध कचरा और पराली जलाने पर नजर रखी जाएगी।
तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। AI फैक्ट्रियों के धुएं पर नजर रखेगा। नियम तोड़ने पर 5 लाख रुपये से जुर्माना और बार-बार उल्लंघन करने वालों को ठेके से बाहर किया जाएगा।
जवाबदेही बढ़ाने के लिए अधिकारियों के बोनस को भी स्वच्छ हवा के लक्ष्यों से जोड़ा गया है। आम लोग भी ऑनलाइन प्रगति देख सकेंगे।
परिवहन और वाहन उत्सर्जन पर विशेष फोकस
चरणबद्ध वाहन प्रतिबंधों को तेज करना
खराब हवा वाले दिनों में बाहरी राज्यों से आने वाले ट्रकों पर रोक लगेगी। केवल इलेक्ट्रिक या CNG ट्रकों को तय समय में प्रवेश मिलेगा। AQI 300 पार करने पर ऑड-ईवन योजना फिर लागू हो सकती है।
पराली जलाने की समस्या को देखते हुए पड़ोसी राज्यों से समन्वय बढ़ाया जाएगा। किसानों को पराली प्रबंधन मशीनों के लिए फंड दिया जाएगा। 1 फरवरी से ट्रकों पर सख्त नियम लागू होंगे।
इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए चार्जिंग स्टेशन इस महीने दोगुने किए जाएंगे। इससे सड़कों पर डीजल का धुआं कम होगा।
सार्वजनिक परिवहन और वैकल्पिक साधनों को बढ़ावा
मुख्य रूट्स पर बसें हर 5 मिनट में चलेंगी। बुजुर्गों और छात्रों के लिए मुफ्त यात्रा की सुविधा रहेगी। खराब हवा के दिनों में मेट्रो में अतिरिक्त ट्रेनें चलेंगी।
स्टेशनों पर ई-रिक्शा जैसी लास्ट-माइल सुविधाएं बढ़ेंगी। लक्ष्य है कि बस और मेट्रो यात्रियों की संख्या वसंत तक 20% बढ़े।
आप भी योगदान दे सकते हैं—बस या मेट्रो का इस्तेमाल करें, कारपूल अपनाएं, छोटी दूरी पैदल या साइकिल से तय करें।

नागरिक भागीदारी और जन-जागरूकता
प्रदूषण डेटा में पारदर्शिता
रियल-टाइम AQI अब मोबाइल और बिलबोर्ड पर दिखेगा। अलग-अलग स्तरों के अनुसार स्वास्थ्य सुझाव मिलेंगे। AQI 200 के करीब पहुंचते ही अलर्ट और मास्क की सलाह दी जाएगी।
यह पारदर्शिता लोगों को जागरूक बनाती है और भरोसा बढ़ाती है।
समुदाय की भागीदारी
आरडब्ल्यूए (RWA) अब धूल और जलाने की घटनाओं की रिपोर्ट कर सकेंगी। अच्छे काम के लिए पुरस्कार भी मिलेंगे। स्थानीय स्तर पर “नो-बर्न” अभियान चलेंगे।
आप भी भूमिका निभाएं—उल्लंघन की फोटो खींचकर रिपोर्ट करें। सामूहिक प्रयास से ही बदलाव आएगा।
स्वच्छ और सांस लेने लायक दिल्ली की ओर
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की यह समीक्षा एक बड़ा बदलाव दिखाती है—धीमी प्रतिक्रिया से हटकर तेज और समयबद्ध कार्रवाई। धूल, वाहन और पराली तीनों पर सीधा प्रहार किया गया है।
अगर सभी ने साथ दिया, तो हवा जरूर बेहतर होगी। एजेंसियां सतर्क रहेंगी और नागरिक भी भागीदार बनेंगे।
AQI जांचें, नियमों का पालन करें और हरित विकल्प चुनें। आइए, मिलकर दिल्ली की हवा को हमेशा के लिए साफ बनाएं।
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