Gujarat केजरीवाल का दावा: बीएमसी चुनावों ने गुजरात में बीजेपी-विरोधी माहौल का संकेत दिया
आम आदमी पार्टी (AAP) के मुखर नेता अरविंद केजरीवाल ने Gujarat की राजनीति में हलचल मचा दी है। उन्होंने मुंबई में हुए हालिया बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनावों का हवाला देते हुए कहा कि लोग बीजेपी से ऊब चुके हैं। केजरीवाल के मुताबिक, ये स्थानीय चुनाव गुजरात के राजनीतिक परिदृश्य में आने वाले बड़े बदलाव का संकेत देते हैं। 2026 के अंत में होने वाले गुजरात विधानसभा चुनावों से पहले उनके बयान ने उत्साह और बहस दोनों को हवा दी है। सवाल उठता है—महाराष्ट्र के एक शहर का चुनाव गुजरात के मतदाताओं के लिए इतना अहम क्यों है? AAP इसे बदलाव की कहानी के तौर पर पेश कर रही है।
अहमदाबाद में हालिया रैली के दौरान केजरीवाल ने बिना किसी हिचक के कहा कि बीएमसी नतीजे Gujarat में बीजेपी के लंबे शासन के लिए “वेक-अप कॉल” हैं। उन्होंने कहा, “मुंबई की जनता ने वही पुराने वादे खारिज कर दिए।” इसके साथ ही AAP ने बड़े राजनीतिक दलों के खिलाफ अपनी लड़ाई को और तेज कर दिया है।
अब नजरें Gujarat विधानसभा चुनावों पर हैं। केजरीवाल मुंबई के इन संकेतों का इस्तेमाल माहौल बनाने में कर रहे हैं। उनका दावा है कि असली बदलाव के लिए गति बन चुकी है। मतदाता, उनके अनुसार, पुराने हथकंडों की बजाय नए विचार चाहते हैं।
AAP द्वारा पेश किया गया बीएमसी चुनावों का नैरेटिव
केजरीवाल को राज्यों के बीच राजनीतिक संकेत जोड़ने में महारत हासिल है। दिसंबर 2025 में हुए बीएमसी चुनाव उन्हें नया हथियार देते हैं। AAP इसे बीजेपी की नीतियों के खिलाफ बढ़ती नाराजगी का नक्शा मानती है। देश के सबसे बड़े शहरी निकाय मुंबई में पड़े ये वोट सत्ताधारी दल की कमजोरियों को उजागर करते हैं।
बीएमसी चुनाव परिणामों का विश्लेषण
बीएमसी चुनावों ने राजनीति को झकझोर दिया। वर्षों से मजबूत स्थिति में रही बीजेपी को इस बार कई अहम वार्ड गंवाने पड़े। शिवसेना और अन्य दलों ने बढ़त बनाई और गैर-बीजेपी गठबंधनों ने 227 में से 150 वार्ड जीत लिए। बीजेपी का वोट शेयर घटकर 35% रह गया, जो 2022 के स्थानीय चुनावों में 42% था। AAP ने भी कुछ सीटें जीतीं, जिससे उसकी मौजूदगी दर्ज हुई।
मतदान प्रतिशत 55% रहा, जो पहले से ज्यादा है। यह गड्ढों, पानी की कमी और नागरिक सुविधाओं को लेकर गुस्से की ओर इशारा करता है। केजरीवाल इन्हीं रोजमर्रा की समस्याओं को गुजरात से जोड़ते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ये नतीजे शहरी थकान दर्शाते हैं। मुंबई की विविध आबादी ने यथास्थिति के खिलाफ वोट दिया। AAP के लिए यह गुजरात के शहरों में भी यही संदेश ले जाने का मौका है।

मुंबई नगर निगम चुनावों से प्रमुख संकेत
दक्षिण मुंबई के व्यावसायिक इलाकों में बीजेपी की सीटों का नुकसान उसकी कमजोर नस दिखाता है।
शिवसेना (यूबीटी) जैसे गठबंधनों को 40% वोट मिले, जिससे एकजुट मोर्चे की ताकत साबित हुई।
AAP का 5% वोट शेयर भले छोटा हो, लेकिन मुश्किल मैदान में उसकी एंट्री दर्ज करता है।
ये आंकड़े सिर्फ संख्या नहीं हैं। AAP इन्हें “जनता के विद्रोह” के रूप में पेश करती है। केजरीवाल कहते हैं कि सूरत जैसे Gujarat के शहरों में भी वही माहौल बन रहा है।
स्थानीय जनादेश पर AAP की व्याख्या
AAP बीएमसी नतीजों को राष्ट्रीय ट्रेंड बताती है। केजरीवाल का कहना है कि मुंबई के मतदाताओं ने प्रचार नहीं, प्रगति को चुना। Gujarat में इसका मतलब है दिल्ली और पंजाब में AAP की सरकारों के कामकाज को उदाहरण के रूप में पेश करना।
पार्टी इन नतीजों को भ्रष्टाचार विरोधी रुख से जोड़ती है। उनका दावा है कि बीजेपी बड़े आयोजनों पर ध्यान देती है, जबकि असली जरूरतें नजरअंदाज होती हैं। AAP खुद को Gujarat की समस्याओं का समाधान बताने की कोशिश कर रही है।
Gujarat में केजरीवाल का फोकस: शासन बनाम पहचान की राजनीति
केजरीवाल के Gujarat दौरे से सियासी तापमान बढ़ गया है। वह बीजेपी पर जाति और धर्म जैसी पुरानी विभाजनकारी राजनीति करने का आरोप लगाते हैं। इसके मुकाबले AAP रोजमर्रा की समस्याओं के ठोस समाधान की बात करती है। यही टकराव 2026 की लड़ाई की धुरी बनेगा।
केजरीवाल का दावा है कि बीजेपी बातें बहुत करती है, काम कम। AAP, उनके अनुसार, काम करने वाले स्कूल और क्लिनिक बनाती है।
Gujarat में ‘दिल्ली/पंजाब मॉडल’ का वादा
AAP Gujarat के लिए बड़े वादे कर रही है। दिल्ली की तरह हर घर को 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली। पहली कक्षा से अंग्रेज़ी माध्यम वाले बेहतर स्कूल।

स्वास्थ्य क्षेत्र में मोहल्ला क्लिनिक खोलने का वादा है। AAP का दावा है कि पंजाब में इससे मरीजों का इंतजार आधा हो गया।
केजरीवाल कहते हैं, “Gujarat इससे कम का हकदार नहीं है।” ये वादे बढ़ते खर्च से जूझ रहे मध्यम वर्ग को साधते हैं।
बेरोजगारी सबसे बड़ा मुद्दा है। AAP स्थानीय नौकरियों से जुड़े स्किल सेंटर खोलने की बात करती है और दिल्ली में युवाओं की बेरोजगारी घटने का हवाला देती है।
बीजेपी शासन से उपजी थकान को निशाना
केजरीवाल गुजरात की कमजोर नसों पर चोट करते हैं। हालिया आंकड़ों के अनुसार शहरी बेरोजगारी 8% है। वे खाली फैक्ट्रियों और पलायन के लिए बीजेपी को जिम्मेदार ठहराते हैं।
महंगाई भी बड़ा मुद्दा है। पिछले साल खाद्य कीमतें 12% बढ़ीं। केजरीवाल इसे केंद्र की नीतियों से जोड़ते हैं।
वे बार-बार बीएमसी का उदाहरण देते हैं—“मुंबई ने इस गड़बड़ी को नकार दिया।” गुजरात में घर-घर संपर्क इसी संदेश को फैलाता है।
राजनीतिक असर और बीजेपी का पलटवार
केजरीवाल के दावों से Gujarat की राजनीति में हलचल है। बीजेपी नेता पलटवार में जुट गए हैं। बहस तेज होती जा रही है।
AAP के दावों पर बीजेपी की प्रतिक्रिया
बीजेपी नेताओं ने केजरीवाल के बयान को “हताशा की कल्पना” बताया। जनवरी 2026 की प्रेस कॉन्फ्रेंस में गृह मंत्री अमित शाह ने गुजरात के स्थानीय चुनावों में बीजेपी की जीत गिनाई।
बीजेपी इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्धियों—हाईवे, बंदरगाह—का जिक्र करती है। उनका तंज है, “AAP बड़े वादे करती है, काम नहीं।”
बीजेपी AAP पर आंकड़े चुनकर पेश करने का आरोप लगाती है। उनका कहना है कि मुंबई की समस्याएं स्थानीय हैं, राष्ट्रीय नहीं। Gujarat में पार्टी की पकड़ अब भी मजबूत है।

विशेषज्ञों की राय: क्या मुंबई का जनादेश Gujarat में दोहराएगा?
विश्लेषकों के मुताबिक, सीधे तुलना मुश्किल है। Gujarat की अर्थव्यवस्था मैन्युफैक्चरिंग पर टिकी है, जबकि मुंबई सेवाओं पर।
संस्कृति भी अलग है। फिर भी, दोनों जगह के शहरी युवा नौकरियों को लेकर चिंतित हैं। 2025 के CSDS सर्वे में 60% शहरी गुजरातियों ने बदलाव की इच्छा जताई।
अहमदाबाद विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर कहते हैं, “मैसेजिंग स्मार्ट है, लेकिन असली परीक्षा जमीन पर होगी।”
जमीनी हकीकत: Gujarat में केजरीवाल के दावों पर जनता की राय
Gujarat की गलियों में चर्चा गर्म है। चाय की दुकानों से लेकर व्हाट्सएप ग्रुप तक बीएमसी का जिक्र है।
सोशल मीडिया पर माहौल
#GujaratWantsChange जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। जनवरी 2026 में 55% पोस्ट AAP के पक्ष में दिखे। युवा वर्ग खासा सक्रिय है।
बीजेपी समर्थक भी पलटवार कर रहे हैं। बहस तीखी है, लेकिन शहरी इलाकों में जिज्ञासा बढ़ी है।
जमीनी रिपोर्टिंग
अहमदाबाद के व्यापारी कहते हैं, “सड़कें बनीं, पर नौकरियां नहीं।” सूरत के हीरा मजदूर महंगाई से परेशान हैं। ग्रामीण इलाकों में हालांकि बीजेपी की पकड़ बनी हुई है।
10 में से 6 बातचीत में बेरोजगारी सबसे बड़ा मुद्दा निकला।

Gujarat की सियासी लड़ाई की दिशा
अरविंद केजरीवाल ने बीएमसी चुनावों को Gujarat में बीजेपी-विरोधी हवा के संकेत के रूप में पेश किया है। AAP सुशासन और मुफ्त सुविधाओं का मॉडल आगे रख रही है, जबकि बीजेपी अपने विकास रिकॉर्ड पर भरोसा जता रही है। 2026 के चुनाव तय करेंगे कि यह लहर टिकेगी या नहीं।
मतदाताओं के लिए मुख्य बातें
बीएमसी नतीजे शहरी नाराजगी दिखाते हैं, जो Gujarat के शहरों के लिए चेतावनी हो सकते हैं।
AAP के वादे बेरोजगारी और महंगाई जैसे असली मुद्दों पर केंद्रित हैं।
बीजेपी विकास और स्थिरता का दावा करती है, लेकिन युवाओं में थकान दिख रही है।
बदलाव की उम्मीद है, पर भरोसा अभी पूरी तरह पक्का नहीं।
उपयोगी सुझाव:
श्रम ब्यूरो की मासिक रोजगार रिपोर्ट और लोकनीति-CSDS जैसे संस्थानों के शहरी सर्वे पर नजर रखें। जिला स्तर के उपचुनाव भी बड़े संकेत दे सकते हैं। सतर्क रहें—आपका वोट भविष्य तय करेगा।
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