India की सुधार एक्सप्रेस: आर्थिक सर्वेक्षण में प्रधानमंत्री के विकास दृष्टिकोण की परतें
हर साल आर्थिक सर्वेक्षण आम बजट से ठीक पहले एक रोडमैप की तरह सामने आता है। यह बताता है कि अर्थव्यवस्था असल में कहां खड़ी है और आगे किन सुधारों की ज़रूरत है। जनवरी 2026 में पेश हुए ताज़ा सर्वेक्षण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की टिप्पणी India की अर्थव्यवस्था को कठिन वैश्विक हालात के बीच भी मज़बूती से आगे बढ़ते हुए दिखाती है।
सर्वेक्षण में अमृत काल की सोच साफ झलकती है—2047 तक India को विकसित राष्ट्र बनाने की 25 साल की यात्रा। इसमें डिजिटल सशक्तिकरण, समावेशी विकास और संरचनात्मक सुधारों पर खास ज़ोर है। इस लेख में हम आर्थिक सर्वेक्षण के प्रमुख बिंदुओं के आधार पर प्रधानमंत्री द्वारा रेखांकित सुधार एजेंडे को सरल भाषा में समझेंगे।
विकास की नींव: समष्टि आर्थिक स्थिरता और लचीलापन
वैश्विक चुनौतियों के बीच घरेलू मजबूती
दुनिया भर में महंगाई, आपूर्ति श्रृंखला की दिक्कतें और भू-राजनीतिक तनाव बने हुए हैं। इसके बावजूद India की अर्थव्यवस्था ने पिछले वर्ष लगभग 7.2% की वृद्धि दर्ज की। प्रधानमंत्री इसे भारत की आंतरिक मजबूती और सही नीतियों का नतीजा बताते हैं।
मध्य-पूर्व जैसे क्षेत्रों में तनाव से तेल की कीमतें बढ़ती हैं, लेकिन India का नवीकरणीय ऊर्जा पर फोकस इस असर को कम करता है। आर्थिक सर्वेक्षण 2026 के लिए 6.8–7% की विकास दर का अनुमान देता है, जो कई अन्य अर्थव्यवस्थाओं से बेहतर है।
राजकोषीय अनुशासन और ऋण प्रबंधन
सरकार ने खर्च पर नियंत्रण रखा है। राजकोषीय घाटा 2025 में GDP का 5.1% रहा, जो लक्ष्य के अनुरूप है। यह पिछले वर्ष के 5.9% से कम है।
केंद्र सरकार का कर्ज GDP का लगभग 57% है, जिसे प्रबंधनीय माना गया है। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ता है और उधारी सस्ती होती है। महंगाई भी 4.5% के आसपास नियंत्रित रही।

विदेशी मुद्रा भंडार और बाहरी क्षेत्र की मजबूती
India का विदेशी मुद्रा भंडार 650 अरब डॉलर से अधिक है, जो लगभग 11 महीनों के आयात को कवर करता है। चालू खाते का घाटा घटकर GDP का 1.2% रह गया है।
रिकॉर्ड 120 अरब डॉलर की रेमिटेंस और 85 अरब डॉलर का FDI India की वैश्विक विश्वसनीयता दिखाते हैं। दवाइयों और आईटी जैसे क्षेत्रों में निर्यात में तेज़ बढ़ोतरी हुई है।
आपूर्ति पक्ष का जोर: विनिर्माण, बुनियादी ढांचा और PLI की सफलता
PLI योजना और विनिर्माण का पुनर्जागरण
प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजनाओं से इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो और EV जैसे क्षेत्रों में 25 अरब डॉलर का निवेश आया। मोबाइल फोन उत्पादन 100 मिलियन से बढ़कर 300 मिलियन यूनिट तक पहुंच गया।
इन क्षेत्रों में 6 लाख से अधिक नौकरियां बनीं। अनुमान है कि 2030 तक PLI GDP में 2% का योगदान दे सकती है।
पूंजीगत व्यय: विकास का गुणक
सरकार का पूंजीगत व्यय GDP का 3.5% तक पहुंचा। सड़कों, रेलवे और बंदरगाहों में निवेश से निजी निवेश भी बढ़ा—हर 1 रुपये के सरकारी निवेश पर 2 रुपये का निजी निवेश।
इससे इंफ्रास्ट्रक्चर आउटपुट में 12% की बढ़ोतरी हुई और रोजगार के अवसर बढ़े।
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स
पीएम गति शक्ति योजना के तहत 1,500 परियोजनाएं डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ी हैं। लॉजिस्टिक्स लागत GDP के 14% से घटकर 8% रह गई है।
AI आधारित पोर्ट ऑपरेशन, ई-वे बिल और रियल-टाइम ट्रैकिंग से व्यापार तेज़ हुआ है।

मानव पूंजी: समावेशी विकास की धुरी
सामाजिक सुरक्षा का विस्तार
जन धन और DBT के ज़रिये 80 करोड़ लोगों तक सीधे लाभ पहुंचे। पीएम किसान योजना के तहत 75,000 करोड़ रुपये किसानों को मिले।
गरीबी दर घटकर 11% रह गई है (2011 में 21% थी)।
शिक्षा और कौशल विकास
नई शिक्षा नीति (NEP) 80% स्कूलों में लागू है। कौशल आधारित शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण पर ज़ोर है।
लक्ष्य है 5 करोड़ युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देना। इससे ड्रॉपआउट दर घटकर 12% रह गई है।
स्वास्थ्य ढांचे की मजबूती
आयुष्मान भारत योजना से 50 करोड़ लोग कवर हैं। 2020 के बाद 2 लाख नए अस्पताल बेड जोड़े गए।
डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार हुआ है।
निजी क्षेत्र को बढ़ावा: ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस
नियमों का सरलीकरण
40 से अधिक कानूनों में सुधार कर 1,500 नियम हटाए गए। निरीक्षण प्रणाली में 40% की कमी आई।
India की ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस रैंकिंग सुधरकर 63 पर पहुंची है।
वित्तीय सुधार और पूंजी निर्माण
IBC के तहत 1,000 से अधिक मामले सुलझे, जिससे 3 लाख करोड़ रुपये की वसूली हुई। बॉन्ड मार्केट में 20% की वृद्धि हुई।

MSME को ताकत
5 करोड़ MSME उद्यम पंजीकृत हुए हैं। क्रेडिट बढ़कर 25 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा।
MSME से जुड़े निर्यात में 15% की वृद्धि हुई और यह क्षेत्र 11 करोड़ लोगों को रोज़गार देता है।
अगले दशक की दिशा
आर्थिक सर्वेक्षण में प्रधानमंत्री का विज़न एक साफ संदेश देता है—
स्थिरता + सुधार + समावेशन = टिकाऊ विकास
संरचनात्मक सुधार, उच्च पूंजीगत निवेश, मानव संसाधन पर फोकस और निजी क्षेत्र की भागीदारी—यही विकसित भारत 2047 की नींव है।
India की यह यात्रा सिर्फ आंकड़ों की नहीं, बल्कि हर नागरिक की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से जुड़ी है।
आपके लिए सबसे अहम सुधार कौन सा है? बदलावों को समझिए, खुद को ढालिए और India की इस विकास यात्रा का हिस्सा बनिए।
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