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PM मोदी: आर्थिक सर्वेक्षण बताता है कि भारत की ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ तेज़ी से विकास की ओर बढ़ रही है

कल्पना कीजिए एक ट्रेन की, जो खराब मौसम के बावजूद पूरी रफ्तार से पटरियों पर दौड़ रही हो। आज का भारत कुछ ऐसा ही है—PM नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में। 2026 के केंद्रीय बजट से ठीक पहले पेश किए गए ताज़ा आर्थिक सर्वेक्षण में तस्वीर काफ़ी सकारात्मक दिखती है। आने वाले वर्ष में विकास दर लगभग 7% रहने का अनुमान है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में वास्तविक जीडीपी 6.8% तक पहुँच गई। यह रिपोर्ट सिर्फ़ आंकड़ों का पुलिंदा नहीं है—यह इस बात का प्रमाण है कि सरकार की बड़े सुधारों की मुहिम, जिसे ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ कहा जा रहा है, लगातार आगे बढ़ रही है। कारोबार के नियमों में सुधार से लेकर सभी को जोड़ने वाली डिजिटल तकनीक तक, ये कदम अर्थव्यवस्था को ज़्यादा मज़बूत बना रहे हैं। आइए समझते हैं कि इसका भारत के भविष्य और आपके लिए क्या मतलब है।

‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ को समझना: आर्थिक मजबूती के मुख्य स्तंभ-PM

‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ उस तरीके का प्रतीक है, जिससे मोदी सरकार टिकाऊ सुधार लागू कर रही है। ये तात्कालिक समाधान नहीं, बल्कि खेती से लेकर उद्योग तक, पूरी व्यवस्था को नया आकार देने वाले बदलाव हैं। आर्थिक सर्वेक्षण बताता है कि पहले किए गए सुधार आज स्थायी ताकत में बदल रहे हैं।

संरचनात्मक सुधार: कार्यकुशलता की रफ्तार

पुराने क़ानून कई बार प्रगति की राह में रस्सियों की तरह उलझ जाते हैं। दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (IBC) ने इस उलझन को काफी हद तक सुलझाया। 2016 से अब तक 8,000 से ज़्यादा मामलों का निपटारा हुआ है और करीब 50 अरब डॉलर की फंसी हुई संपत्तियाँ मुक्त हुई हैं। इससे निवेश को नई जान मिली है।

वस्तु एवं सेवा कर (GST) ने राज्यों के बीच कर प्रणाली को एकसार किया। हाल के सुधारों से मासिक संग्रह 2 लाख करोड़ रुपये से ऊपर पहुँच गया है। इससे छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े उद्योगों तक, सभी को बेहतर योजना बनाने में मदद मिली।

इन सुधारों की वजह से भारत विश्व बैंक की ‘ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस’ रैंकिंग में 14 पायदान ऊपर गया। रियल एस्टेट और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में मंज़ूरियाँ तेज़ हुईं और पिछले साल विनिर्माण उत्पादन 9% बढ़ा। आज स्टार्टअप्स कम इंतज़ार और कम काग़ज़ी कार्रवाई के साथ शुरू हो रहे हैं—यह बदलाव रोज़मर्रा की ज़िंदगी में दिखता है।

Economic Survey shows India's 'Reform Express' on track amid global uncertainty: PM Modi | DD News

डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI): विकास का त्वरक

DPI को आप एक मज़बूत डिजिटल रीढ़ की तरह समझिए, जो करोड़ों लोगों को जोड़ती है। UPI के ज़रिये हर महीने 1200 करोड़ से अधिक लेन-देन हो रहे हैं, जिससे लोग औपचारिक बैंकिंग से जुड़ रहे हैं। आधार, जो 130 करोड़ से अधिक लोगों की पहचान का माध्यम है, सत्यापन को बेहद आसान बनाता है।

ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ONDC) छोटे कारोबारियों को ऑनलाइन बाज़ार तक सीधी पहुँच देता है और बड़े प्लेटफॉर्म की भारी फीस से राहत दिलाता है। पिछले पाँच वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक खातों की संख्या 40% बढ़ी है।

इन तकनीकों से भुगतान और अनुबंध की लागत 50% तक कम हुई है। विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ा—पिछले साल एफडीआई 85 अरब डॉलर तक पहुँचा। डिजिटल विज़न के चलते आज ठेले वाला भी आसानी से डिजिटल भुगतान स्वीकार कर रहा है।

क्षेत्रीय सफलताएँ: जहाँ सुधारों ने ज़मीनी असर दिखाया

सुधार सिर्फ़ नीतियों तक सीमित नहीं रहते, वे रोज़गार और उत्पादन में दिखते हैं। आर्थिक सर्वेक्षण ऐसे ही क्षेत्रों की ओर इशारा करता है।

विनिर्माण और PLI योजना की कामयाबी

उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना 2020 में शुरू हुई और 14 क्षेत्रों को कवर करती है। अब तक 25 अरब डॉलर का निवेश आया और लगभग 6 लाख नौकरियाँ बनीं।

मोबाइल निर्माण में भारत अब 95% फोन देश में ही बना रहा है, जबकि पहले यह आंकड़ा 10% था। निर्यात दोगुना होकर 15 अरब डॉलर तक पहुँच गया। फार्मा क्षेत्र में एपीआई उत्पादन बढ़ने से आयात पर निर्भरता 20% घटी।

यह ‘मेक इन इंडिया’ को मज़बूती देता है। वैश्विक कंपनियाँ, जैसे एप्पल, भारत में उत्पादन बढ़ा रही हैं। सर्वेक्षण का अनुमान है कि 2030 तक विनिर्माण का जीडीपी में हिस्सा 18% हो जाएगा—जिसका सीधा असर परिवारों की आय पर पड़ेगा।

बुनियादी ढाँचा और पूंजीगत व्यय

सड़कें, रेल और बंदरगाह व्यापार की धमनियाँ हैं। सरकार ने पूंजीगत व्यय बढ़ाकर 11 लाख करोड़ रुपये किया, जिसमें से 85% समय पर खर्च हुआ। 2014 से अब तक 50,000 किमी से ज़्यादा राजमार्ग बने।

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से माल ढुलाई 25% तेज़ हुई। बंदरगाहों की क्षमता 1.5 अरब टन तक पहुँच गई। इससे निर्माण क्षेत्र में 1 करोड़ से अधिक रोज़गार बने और स्टील व सीमेंट जैसे उद्योगों को भी लाभ हुआ।

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वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की स्थिरता-PM

दुनिया भर में युद्ध और महँगाई जैसे झटके लगे, लेकिन भारत संतुलित रहा। आर्थिक सर्वेक्षण इसके पीछे समझदारी भरी नीतियों को मानता है।

महँगाई नियंत्रण और मौद्रिक नीति

खाद्य महँगाई 8% तक पहुँची, लेकिन मूल महँगाई 5% से नीचे रही। रिज़र्व बैंक के समय पर कदमों से औसत CPI 5.4% पर काबू में रहा। अन्य देशों की तुलना में भारत की स्थिति बेहतर रही, जिससे आम उपभोक्ता को राहत मिली।

राजकोषीय अनुशासन और ऋण प्रबंधन

राजकोषीय घाटा घटकर 5.1% पर आ गया है और इसे 4.5% तक लाने का लक्ष्य है। ऋण-से-जीडीपी अनुपात 58% पर स्थिर है। अब खर्च का बड़ा हिस्सा परिसंपत्तियों के निर्माण पर जा रहा है, जिससे दीर्घकालीन विकास को बल मिलता है।

Economic Survey shows India's 'Reform Express' on track amid global uncertainty: PM Modi | DD News

आगे का रास्ता: सुधारों की रफ्तार बनाए रखना

आर्थिक सर्वेक्षण भविष्य की दिशा भी दिखाता है। श्रम कानूनों के सरलीकरण, हरित ऊर्जा और कौशल विकास पर ज़ोर रहेगा।

आगे के प्रमुख सुधार:

  • उद्योगों के लिए भर्ती नियम आसान करना

  • इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार

  • AI और ग्रीन टेक्नोलॉजी में कौशल प्रशिक्षण

निजी निवेश के संकेत भी मज़बूत हो रहे हैं। सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के तहत 100 अरब डॉलर से अधिक की परियोजनाएँ पाइपलाइन में हैं।

भारत की अर्थव्यवस्था का आत्मविश्वास भरा सफ़र-PM

PM मोदी के नेतृत्व में आर्थिक सर्वेक्षण साफ़ करता है कि ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ पूरी रफ्तार से आगे बढ़ रही है। डिजिटल ढाँचा, बुनियादी ढाँचा और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में प्रगति भारत को वैश्विक औसत से तेज़ी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रही है।

IBC और GST से दक्षता बढ़ी, DPI से समावेशन हुआ, PLI और पूंजीगत व्यय से रोज़गार पैदा हुए। महँगाई नियंत्रण और संतुलित वित्तीय नीतियाँ भरोसा देती हैं। आगे श्रम, ऊर्जा और कौशल पर ध्यान विकास की गति बनाए रखेगा।

भारत का आर्थिक भविष्य मज़बूत दिखता है। इन सुधारों का असर आपकी ज़िंदगी और अवसरों पर भी पड़ेगा। अपनी राय साझा कीजिए—और इस विकास यात्रा का हिस्सा बनिए।

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