budget पेश होने से पहले संसद में अमित शाह का आगमन: इसके मायने क्या हैं?
फरवरी 2026 की इस ठंडी सुबह संसद परिसर में अलग ही हलचल थी। budget से ठीक पहले का दिन—मीडिया वैन, कैमरे, रिपोर्टरों की भीड़ और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था। हर किसी को पता था कि आज पेश होने वाला केंद्रीय बजट आने वाले पूरे साल की दिशा तय कर सकता है।
इसी माहौल में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अपने काफिले के साथ समय पर संसद पहुँचे। हमेशा की तरह शांत, आत्मविश्वासी और पूरी तरह फोकस्ड। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में अमित शाह केवल कानून-व्यवस्था के मंत्री नहीं हैं—उनकी भूमिका देश की आर्थिक और आंतरिक स्थिरता को जोड़ने वाली कड़ी की तरह है।
budget से पहले उनका संसद पहुँचना महज़ औपचारिकता नहीं, बल्कि एक संकेत है कि सुरक्षा और अर्थव्यवस्था साथ-साथ चलती हैं।
आर्थिक नीति निर्माण में गृह मंत्री की भूमिका
अमित शाह की ज़िम्मेदारी सिर्फ सीमाओं और शहरों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है। उनके मंत्रालय के फैसले सीधे उस ढाँचे को प्रभावित करते हैं, जिस पर आर्थिक विकास टिका होता है।
अंतर-मंत्रालयी समन्वय की अहम जिम्मेदारी
गृह मंत्रालय आंतरिक सुरक्षा की पूरी व्यवस्था देखता है—राज्य पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र बल, सीमा सुरक्षा और साइबर सुरक्षा तक। बजट में इन क्षेत्रों को मिलने वाला धन आम नागरिक के जीवन और व्यापारिक माहौल को प्रभावित करता है।
उदाहरण के लिए:
सीमाओं की बेहतर सुरक्षा = सुरक्षित व्यापार मार्ग
साइबर सुरक्षा में निवेश = डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूती
अमित शाह अन्य मंत्रालयों के साथ समन्वय कर यह सुनिश्चित करते हैं कि सुरक्षा पर खर्च विकास कार्यों से टकराए नहीं, बल्कि उन्हें सहारा दे। बीते वर्षों में इसी समन्वय के चलते तकनीक आधारित पुलिसिंग और अपराध ट्रैकिंग सिस्टम विकसित हुए।
विशेषज्ञ मानते हैं कि मज़बूत आंतरिक सुरक्षा के बिना कोई भी आर्थिक योजना टिकाऊ नहीं हो सकती। शाह की भूमिका यहाँ “गार्डरेल” की तरह है—जो बजट को पटरी से उतरने नहीं देती।
budget से पहले रणनीतिक बैठकें और परामर्श
budget से पहले के दिनों में उच्चस्तरीय बैठकें लगातार चलती हैं। आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) में हर पहलू पर चर्चा होती है, और अमित शाह इन बैठकों में सुरक्षा से जुड़े मुद्दे उठाते हैं।

सूत्रों के अनुसार:
साइबर खतरों को देखते हुए अतिरिक्त फंड की मांग
सीमा प्रबंधन और आंतरिक अशांति वाले क्षेत्रों के लिए विशेष आवंटन
खासतौर पर सीमा क्षेत्रों में तनाव को देखते हुए, शाह यह सुनिश्चित करते हैं कि बजट में ज़मीनी हकीकत के मुताबिक संसाधन उपलब्ध हों। माना जा रहा है कि budget के सुरक्षा अध्याय में उनका प्रभाव साफ दिखेगा।
संसद में आगमन का राजनीतिक संदेश
अमित शाह का संसद के मुख्य द्वार से प्रवेश केवल एक रूटीन मूव नहीं था। budget से ठीक पहले उनका आगमन अपने आप में एक राजनीतिक संदेश है।
दृश्य संकेत और मीडिया की नज़र
कैमरों की चमक के बीच कार से उतरते अमित शाह, हाथ में फाइल और चेहरे पर आत्मविश्वास—यह तस्वीरें तुरंत न्यूज़ चैनलों और सोशल मीडिया पर छा गईं।
उनका शांत और संयमित व्यवहार कई बातें कहता है:
समर्थकों के लिए: सरकार फैसलों को लेकर आश्वस्त है
विपक्ष के लिए: सरकार पूरी तैयारी के साथ मैदान में है
यह दृश्य पूरे दिन के राजनीतिक माहौल की टोन सेट करता है।
अलग-अलग हितधारकों को संदेश
सुरक्षा बलों के लिए: आपकी ज़रूरतें प्राथमिकता में हैं
सीमा क्षेत्रों के लोगों के लिए: विकास और सुरक्षा दोनों पर ध्यान
निवेशकों के लिए: देश में स्थिरता है, जोखिम कम है
शाह के आगमन के तुरंत बाद बाज़ारों में स्थिरता दिखना भी इसी भरोसे का संकेत माना गया।
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संक्षेप में:
CAPF कर्मियों को उम्मीद—ट्रेनिंग और उपकरणों में बढ़ोतरी
सीमा राज्यों को संकेत—इन्फ्रास्ट्रक्चर पर फोकस
बाज़ारों को संदेश—नीतिगत स्थिरता बरकरार
गृह मंत्रालय से जुड़ी बजट अपेक्षाएँ
अब सबकी निगाहें इस पर हैं कि आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को कितना budget मिलता है।
पुलिस और सुरक्षा तंत्र के आधुनिकीकरण के लिए आवंटन
पिछले वर्षों में इस क्षेत्र का बजट लगातार बढ़ा है।
2025 में CAPF के लिए ₹2 लाख करोड़ से अधिक
2026 में इसके बराबर या अधिक की उम्मीद
साइबर सुरक्षा पर भी खास ध्यान:
संभावित ₹10,000 करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान
CCTNS जैसी योजनाओं का विस्तार (15,000+ पुलिस स्टेशन जुड़े)
आधुनिकीकरण का मतलब सिर्फ हथियार नहीं:
AI आधारित पुलिसिंग
तेज़ रिस्पॉन्स सिस्टम
बेहतर ट्रेनिंग
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केंद्र शासित प्रदेशों और सीमा राज्यों पर असर
जम्मू-कश्मीर जैसे केंद्र शासित प्रदेश सीधे गृह मंत्रालय के अधीन हैं।
पिछले साल:
J&K को लगभग ₹40,000 करोड़
इस साल:
सीमा क्षेत्रों के लिए ₹15,000 करोड़ तक की उम्मीद
लद्दाख, अरुणाचल जैसे इलाकों में सड़क और कनेक्टिविटी पर जोर
बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर = तेज़ सुरक्षा प्रतिक्रिया + स्थानीय रोज़गार
पिछले budget में अमित शाह की भूमिका
अगर पीछे देखें तो साफ दिखता है कि सुरक्षा बजट में निरंतरता रही है।
पिछले budget से तुलना
2024: आंतरिक सुरक्षा बजट में 12% की बढ़ोतरी
2025: साइबर सुरक्षा और डिजिटल खतरों पर फोकस
2026 की तैयारी भी उसी लाइन पर है। हाल के भाषणों में अमित शाह “मजबूत वित्तीय समर्थन” की बात दोहरा चुके हैं।
इन निवेशों का असर भी दिखा है—कई क्षेत्रों में अपराध दर में गिरावट आई है।
राष्ट्रीय प्रशासनिक दक्षता पर प्रभाव
गृह मंत्रालय के तहत ई-गवर्नेंस परियोजनाओं ने सरकारी कामकाज को तेज़ किया है:
पासपोर्ट सेवाएँ
डिजिटल रिकॉर्ड सिस्टम
नागरिक पोर्टल
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आने वाले बजट में:
AI आधारित प्रशासन
डेटा मैनेजमेंट सिस्टम
इससे समय और संसाधनों की बड़ी बचत संभव है।
सिर्फ एक आगमन नहीं, एक संकेत
अमित शाह का budget से पहले संसद पहुँचना यह साफ करता है कि सुरक्षा हर बजट लाइन के केंद्र में है। यह सरकार की एकजुटता, प्राथमिकताओं और रणनीतिक सोच को दर्शाता है।
उनकी मौजूदगी बताती है कि:
पुलिस और सुरक्षा सुधार प्राथमिकता में हैं
सीमा क्षेत्रों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाएगा
आर्थिक विकास और आंतरिक स्थिरता साथ चलेंगी
अब जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश करेंगी, तो उसमें सुरक्षा से जुड़े संकेतों को ध्यान से पढ़िए—क्योंकि उनकी झलक अमित शाह की सुबह की मौजूदगी में पहले ही दिख चुकी है।
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