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भारत की कूटनीतिक जीत: प्रधानमंत्री मोदी से Arab देशों के विदेश मंत्रियों की मुलाक़ात का महत्व

ज़रा इस दृश्य की कल्पना कीजिए—Arab दुनिया के शीर्ष राजनयिक, एक ही कक्ष में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हाथ मिलाते हुए। फरवरी 2026 की शुरुआत में सऊदी अरब, यूएई, मिस्र सहित कई प्रमुख अरब देशों के विदेश मंत्री विशेष रूप से नई दिल्ली पहुँचे। यह कोई औपचारिक मुलाक़ात भर नहीं थी, बल्कि भारत और अरब देशों के बीच रिश्तों को नई ऊँचाई देने की एक ठोस कोशिश थी।

इसे आप दो प्रभावशाली क्षेत्रों के बीच एक मज़बूत पुल के रूप में देख सकते हैं—जहाँ व्यापार, ऊर्जा और शांति जैसे साझा लक्ष्य केंद्र में हैं। खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) और अरब लीग के अहम सदस्य इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे। बातचीत का फोकस आर्थिक सहयोग बढ़ाने, सुरक्षा चुनौतियों से निपटने और वैश्विक मुद्दों पर साझा रुख बनाने पर था।

यह क्यों अहम है? क्योंकि यह दिखाता है कि भारत अब मध्य-पूर्व में केवल एक व्यापारिक साझेदार नहीं, बल्कि रणनीतिक भागीदार के रूप में उभर रहा है।

कूटनीतिक संदर्भ और ऐतिहासिक बदलाव

भारत–Arab संबंधों का बदलता स्वरूप

भारत और Arab देशों के रिश्ते कोई नए नहीं हैं। प्राचीन मसाला मार्गों से लेकर आज के आधुनिक बंदरगाहों तक, मुंबई से मस्कट तक व्यापारिक रिश्ते सदियों पुराने हैं। आज भी दुबई, रियाद और दोहा जैसे शहरों में लाखों भारतीय काम करते हैं, जो हर साल अरबों डॉलर की रेमिटेंस भारत भेजते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में यह रिश्ता तेज़ी से आगे बढ़ा है। भारत अब नियमित रूप से शिखर सम्मेलन आयोजित करता है और बड़े रणनीतिक समझौते करता है। 2023 में बना I2U2 समूह (भारत, इज़राइल, यूएई और अमेरिका) इसी दिशा का संकेत था।

वैश्विक परिदृश्य में बदलाव भी मददगार रहा है। कुछ क्षेत्रों से अमेरिका की सीमित मौजूदगी के बाद, Arab देश भारत को एक स्थिर और भरोसेमंद साझेदार के रूप में देखने लगे हैं—एक ऐसे पड़ोसी के रूप में, जो बदलती दुनिया में संतुलन दे सकता है।

बातचीत के पीछे प्रमुख एजेंडे

दिल्ली में हुई बैठकों में ठोस मुद्दों पर चर्चा हुई:

Foreign ministers of Arab countries call on Modi - OrissaPOST

आतंकवाद के खिलाफ सहयोग
सीमा-पार आतंकी संगठनों से निपटने के लिए खुफिया जानकारी साझा करने पर सहमति बनी। ISIS जैसे बचे-खुचे नेटवर्क पर नज़र रखने के लिए संयुक्त तंत्र बनाने की बात हुई।

ऊर्जा सुरक्षा और हरित ऊर्जा
भारत को स्थिर तेल आपूर्ति चाहिए, जबकि Arab देश ग्रीन एनर्जी की ओर बढ़ रहे हैं। सौर ऊर्जा पर संयुक्त शोध के लिए नया समझौता हुआ, जो 2025 के यूएई–भारत $2 अरब के करार को आगे बढ़ाता है।

तकनीक और कौशल विकास
AI आधारित कृषि, साइबर सुरक्षा और डिजिटल स्किल्स पर चर्चा हुई। क़तर के साथ डिजिटल ट्रेनिंग प्रोग्राम पर समझौता इसका उदाहरण है।

ये पहलें दिखाती हैं कि रिश्ते केवल बयानबाज़ी तक सीमित नहीं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर आगे बढ़ रहे हैं।

आर्थिक साझेदारी: व्यापार, ऊर्जा और निवेश

द्विपक्षीय व्यापार को नई रफ़्तार

भारत और Arab देशों के बीच व्यापार 2025 में $140 अरब तक पहुँच गया, जो 2024 से 15% अधिक है। अब गैर-तेल व्यापार तेज़ी से बढ़ रहा है।

  • मिस्र को भारत का फार्मा निर्यात 20% बढ़ा

  • सऊदी Arab को IT सेवाओं में तेज़ उछाल

  • यूएई–भारत मुक्त व्यापार समझौते से इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में 25% वृद्धि

अब रुपये–दिरहम में व्यापार पर भी चर्चा हो रही है, जिससे डॉलर निर्भरता कम होगी और लागत घटेगी।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूती

भारत अपनी 85% तेल ज़रूरतें Arab देशों से पूरी करता है—करीब 50 लाख बैरल प्रतिदिन।
2025 में ADNOC के साथ 20 साल का समझौता इस दिशा में बड़ा कदम था।

निवेश भी तेज़ हैं:

  • सऊदी अरब के PIF का भारतीय रिफाइनरियों में $10 अरब निवेश

  • यूएई की Masdar कंपनी द्वारा राजस्थान में $3 अरब के विंड प्रोजेक्ट्स की योजना

यहाँ भारतीय प्रवासी समुदाय अहम भूमिका निभाता है। खाड़ी देशों में 90 लाख से ज़्यादा भारतीय काम करते हैं। 2025 में उनकी रेमिटेंस $50 अरब से ऊपर रही—जो भारत की अर्थव्यवस्था को सीधा सहारा देती है।

PM Modi meets Arab foreign ministers, reaffirms historic ties and expanding  India-Arab cooperation - DD India

क्षेत्रीय सुरक्षा पर रणनीतिक तालमेल

अंतरराष्ट्रीय खतरों से निपटना

आतंकवाद और ड्रोन हमले जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए:

  • संयुक्त खुफिया समूह

  • साझा ट्रेनिंग प्रोग्राम

  • अरब सागर में नौसैनिक अभ्यास

यूएई अधिकारियों के साथ भारत का एंटी-ड्रोन प्रशिक्षण इसका ताज़ा उदाहरण है।

जटिल क्षेत्रीय संघर्षों में संतुलन

भारत ने यमन जैसे मुद्दों पर संतुलित रुख अपनाया है—UN शांति प्रक्रिया का समर्थन और मानवीय सहायता दोनों।
इज़राइल–फिलिस्तीन मुद्दे पर भारत का दो-राज्य समाधान अरब देशों से मेल खाता है। ग़ाज़ा के लिए अतिरिक्त $100 मिलियन सहायता की घोषणा भी हुई।

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर संयुक्त गश्त की योजना बनी, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम है।

बहुपक्षीय मंच और जन-जन के रिश्ते

G20, SCO और अरब लीग की भूमिका

भारत ने G20 में Arab लीग को स्थायी आमंत्रण देकर बड़ा संकेत दिया। इससे जलवायु और खाद्य सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अरब देशों की भागीदारी बढ़ी।

SCO में ईरान और सऊदी Arab की मौजूदगी भारत को क्षेत्रीय शांति पर संवाद का मंच देती है।
Vibrant Gujarat जैसे सम्मेलनों में अरब CEOs की बढ़ती भागीदारी भी इसी का परिणाम है।

प्रवासी भारतीय: कूटनीति की मज़बूत कड़ी

Arab देशों में 85 लाख से ज़्यादा भारतीय रहते हैं, जो हर साल लगभग $55 अरब भारत भेजते हैं।
यूएई में ही 35 लाख भारतीय निर्माण और रिटेल सेक्टर की रीढ़ हैं।

PM Modi meets Arab foreign ministers, reaffirms historic ties and expanding  India-Arab cooperation - DD India

ये प्रवासी:

  • सांस्कृतिक सेतु बनते हैं (दोहा में दीवाली समारोह जैसे आयोजन)

  • व्यापारिक नेटवर्क खोलते हैं

ई-वीज़ा और श्रम समझौतों से अब काम की प्रक्रिया आसान हुई है, जिससे लोगों के रिश्ते और गहरे होते हैं।

अगले दशक की साझेदारी की नींव

प्रधानमंत्री मोदी और Arab विदेश मंत्रियों की यह मुलाक़ात भारत की विदेश नीति में एक निर्णायक मोड़ को दर्शाती है।
अब यह रिश्ता गुटनिरपेक्षता से आगे बढ़कर सक्रिय साझेदारी में बदल चुका है।

  • भारत को ऊर्जा सुरक्षा और नए बाज़ार

  • अरब देशों को तकनीक और निवेश के अवसर

आने वाले वर्षों में:

  • ग्रीन हाइड्रोजन

  • डिजिटल हब

  • संयुक्त स्टार्टअप्स

जैसे क्षेत्रों में तेज़ बढ़ोतरी संभव है। 2030 तक व्यापार दोगुना होने की उम्मीद है।

मुख्य बिंदु संक्षेप में:

  • व्यापार लक्ष्य: 2028 तक $200 अरब

  • सुरक्षा सहयोग: संयुक्त खुफिया तंत्र और नौसैनिक अभ्यास

  • जन-शक्ति: प्रवासी भारतीयों की बढ़ती भूमिका

अगर आप कारोबारी हैं, तो अभी खाड़ी बाज़ारों की ओर देखें।
भारतीय दूतावासों और व्यापार मंडलों से संपर्क करें।

भारत–Arab साझेदारी मज़बूत होगी, तो अवसर भी सबके लिए बढ़ेंगे।

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