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Nitish कुमार ने बजट का किया स्वागत: विपक्ष के हमलों के बीच बिहार की कनेक्टिविटी और नौकरियों को बढ़ावा

भारत का ताज़ा केंद्रीय बजट सूखे खेतों पर पहली मानसूनी बारिश की तरह आया है—उम्मीदें जगाने वाला, लेकिन तीखी बहसों को भी जन्म देने वाला। बिहार के मुख्यमंत्री Nitish कुमार ने इसे तुरंत सराहा और कहा कि सड़कों, रेल और रोजगार में निवेश से राज्य को नई रफ्तार मिलेगी। वहीं विपक्ष ने इसे खोखला करार देते हुए आरोप लगाया कि बिहार को एक बार फिर नज़रअंदाज़ किया गया है।

बिहार से जुड़े केंद्रीय बजट के प्रमुख ऐलान

केंद्रीय बजट 2026 में बिहार जैसे पूर्वी राज्यों के लिए बड़े प्रावधान किए गए हैं। इस क्षेत्र में सड़कों और रेल परियोजनाओं के लिए ₹50,000 करोड़ से अधिक की राशि तय की गई है। मकसद है पुरानी बाधाओं को हटाकर आर्थिक गतिविधियों को गति देना।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछड़े इलाकों के लिए विशेष पैकेजों पर ज़ोर दिया। बिहार को नए एक्सप्रेसवे और स्किल डेवलपमेंट सेंटरों का लाभ मिलने वाला है। यह “संतुलित विकास” की राष्ट्रीय नीति के अनुरूप बताया गया है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बिहार को पूर्वी भारत के प्रवेश द्वार के रूप में मजबूत करता है। हालांकि स्थानीय लोगों को अब भी संदेह है कि ये वादे ज़मीन पर उतरेंगे या नहीं।

Nitish कुमार का समर्थन: कनेक्टिविटी और रोजगार पर फोकस

Nitish कुमार ने बजट को “बिहार के उत्थान की रणनीति” बताया। उन्होंने कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी से यात्रा समय घटेगा और बाज़ार खुलेंगे। पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने दावा किया कि दो साल में रोजगार दोगुना हो सकता है।

मुख्यमंत्री के मुताबिक सड़क और रेल परियोजनाएं कृषि और छोटे व्यापार को सीधे फायदा पहुंचाएंगी। उनकी टीम का दावा है कि इन योजनाओं से लगभग 10 लाख नई नौकरियां पैदा होंगी।

हालांकि विपक्ष इसे सिर्फ बयानबाज़ी मानता है।

Bihar Govt targets 10 million jobs and Rs 50 Trillion Investment with the  Launch of 'Seven Resolves 3' – Patna Press

तत्काल राजनीतिक टकराव: विपक्ष की प्रतिक्रिया

राजद नेता तेजस्वी यादव ने बजट की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि “बिहार को टुकड़ों में हिस्सा मिला है, जबकि अमीर राज्यों को भरपूर।” उन्होंने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया—“गरीबों के लिए असली मदद कहां है?”

कांग्रेस ने भी सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि कृषि सहायता बेहद कम है। विपक्ष का दावा है कि बिहार को कुल बजट का सिर्फ 2% हिस्सा मिला है।

एनडीए सरकार जहां बजट के समर्थन में है, वहीं चुनावी माहौल में विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बना रहा है।

बिहार में कनेक्टिविटी का विस्तार: मुख्यमंत्री द्वारा गिनाई गई परियोजनाएं

सड़क और राजमार्ग विकास

पटना–गया एक्सप्रेसवे के लिए ₹8,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिससे ट्रैफिक जाम कम होगा। इसके अलावा एनएच-31 के विस्तार से माल ढुलाई की लागत 20% तक घटने का दावा है।

इन सड़कों से नेपाल के साथ व्यापार भी तेज़ होने की उम्मीद है।

रेलवे आधुनिकीकरण

बजट में बिहार की रेल परियोजनाओं के लिए ₹12,000 करोड़ रखे गए हैं। मुजफ्फरपुर–दरभंगा नई लाइन और स्टेशनों के आधुनिकीकरण पर जोर है।

डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से कोयला और अनाज की ढुलाई तेज होगी। पटना से दिल्ली का सफर अब 12 घंटे में संभव होने की बात कही गई है।

डिजिटल और ग्रामीण कनेक्टिविटी

भारतनेट के तहत 5,000 नए गांवों को फाइबर इंटरनेट से जोड़ा जाएगा। 20 जिलों में 5G टावर लगाए जाएंगे।

इससे किसानों को ऑनलाइन बाज़ार और छात्रों को ई-लर्निंग का लाभ मिलेगा।

रोजगार सृजन की संभावनाएं

सेक्टर आधारित रोजगार अनुमान

सरकार के मुताबिक निर्माण क्षेत्र सबसे बड़ा रोजगारदाता बनेगा—केवल हाईवे से 3 लाख नौकरियां। बेगूसराय में नए SEZ से ऑटो और टेक्सटाइल में 2 लाख रोजगार की उम्मीद है।

एग्री-प्रोसेसिंग यूनिट्स किसानों को सालभर काम देंगी।

Politics over job creation intensifies in Bihar - The Statesman

MSME और स्किल डेवलपमेंट

₹5,000 करोड़ MSME सेक्टर को दिए गए हैं। स्किल हब्स में 1 लाख युवाओं को वेल्डिंग, कोडिंग जैसे कोर्स कराए जाएंगे।

महिलाओं के लिए सिलाई और नर्सिंग में विशेष प्रशिक्षण की व्यवस्था है।

निजी निवेश आकर्षित करने की योजना

निवेशकों को 5 साल के लिए 15% टैक्स छूट दी जाएगी। ग्रीन बॉन्ड्स से सोलर प्लांट्स लगेंगे।

पिछले साल के निवेश उदाहरणों से सरकार उत्साहित है।

विपक्ष की जांच: “खोखले वादे” का आरोप

फंड आवंटन पर सवाल

विपक्ष का आरोप है कि पिछले साल घोषित ₹20,000 करोड़ अब तक नहीं दिखे। यूपी जैसे राज्यों को ज्यादा हिस्सा मिला है।

कई परियोजनाएं अधूरी पड़ी हैं, जिससे भरोसा कमजोर होता है।

रोजगार लक्ष्य पर संदेह

आलोचकों के अनुसार पिछली अवधि में सिर्फ 4 लाख नौकरियां बनीं, फिर 10 लाख कैसे?

प्रशिक्षण में देरी और बुनियादी सुविधाओं की कमी भी सवालों में है।

कृषि क्षेत्र की अनदेखी

MSP में बढ़ोतरी नहीं, सिंचाई बजट में 10% कटौती और बाढ़ राहत की कमी से किसान नाराज़ हैं।

आर्थिक प्रभाव और विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का अनुमान है कि इंफ्रास्ट्रक्चर से बिहार की GSDP में 7% तक बढ़ोतरी हो सकती है, बशर्ते परियोजनाएं समय पर पूरी हों।

हालांकि महंगाई और संसाधन लीक होने का खतरा भी जताया गया है।

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आगे की राह और राजनीतिक दांव

Nitish कुमार के लिए यह बजट कनेक्टिविटी और रोजगार के जरिए बिहार को आगे ले जाने का मौका है। लेकिन विपक्ष के आरोप और कृषि उपेक्षा की बातें बहस को ज़िंदा रखती हैं।

सफलता के लिए तेज़ अमल, पारदर्शिता और कौशल प्रशिक्षण ज़रूरी होगा। यह बजट अल्पकाल में एनडीए को फायदा दे सकता है, लेकिन ज़रा सी चूक चुनावी नुकसान बन सकती है।

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