योगी आदित्यनाथ ने फार्मास्यूटिकल भविष्य को दी दिशा: उद्योग नेताओं के साथ बैठक से निकले अहम नतीजे
भारत को मजबूत दवा निर्माण केंद्र बनाने की दिशा में उत्तर प्रदेश तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में लखनऊ में देश की प्रमुख फार्मा कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक की। यह बैठक वैश्विक दवा आपूर्ति श्रृंखला में UP की भूमिका को और सशक्त करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
वर्तमान में UP भारत के कुल दवा उत्पादन का 10% से अधिक हिस्सा तैयार करता है। यहां जेनेरिक दवाओं से लेकर आवश्यक औषधियों तक का निर्माण होता है। बैठक का उद्देश्य इस रफ्तार को और तेज़ करना, नए निवेश आकर्षित करना और आयात पर निर्भरता घटाना था। इस चर्चा से निकली नीतियां, वित्तीय प्रोत्साहन और रणनीतिक योजनाएं यूपी को वैश्विक फार्मा मानचित्र पर नई पहचान दे सकती हैं।
UP की फार्मा ताकत उसकी विशाल भूमि और कुशल श्रम शक्ति है। राज्य में 5,000 से अधिक इकाइयाँ सक्रिय हैं, जो दर्द निवारक दवाओं से लेकर वैक्सीन तक बनाती हैं। नोएडा और कानपुर जैसे औद्योगिक क्षेत्र दिल्ली के बाज़ारों और बंदरगाहों के क़रीब हैं, जिससे उत्तरी भारत और उससे आगे तेज़ आपूर्ति संभव होती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस बढ़त को दोगुना करना चाहते हैं और यूपी को सस्ती, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण दवाओं का वैश्विक केंद्र बनाना चाहते हैं।
बैठक की पृष्ठभूमि इसलिए भी अहम थी क्योंकि आज भी कई जरूरी कच्चे माल, खासकर एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स (API), आयात पर निर्भर हैं। बैठक में सन फार्मा और डॉ. रेड्डीज़ जैसी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने नियामकीय अड़चनों पर खुलकर बात रखी। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार केंद्र सरकार की योजनाओं के अनुरूप सहयोग देगी और मंज़ूरी प्रक्रियाओं को तेज़ किया जाएगा। यह संवाद यूपी को आत्मनिर्भर दवा निर्माण की दिशा में स्पष्ट राह दिखाता है।
प्रमुख नीतिगत निर्देश और निवेश प्रोत्साहन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फार्मा उद्योग के लिए व्यापार सुगमता पर ज़ोर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि तेज़ मंज़ूरी और आर्थिक प्रोत्साहन ही निवेश को आकर्षित करेंगे। इन कदमों से रोजगार और उत्पादन दोनों में तेज़ बढ़ोतरी का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री के प्रमुख निर्देश
मुख्यमंत्री ने कहा कि फार्मा संयंत्र लगाने में देरी विकास को नुकसान पहुँचाती है। अब मंज़ूरी की समय-सीमा को आधा किया जाएगा। प्रत्येक कंपनी को एक समर्पित अधिकारी मार्गदर्शन देगा, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।
उन्होंने पर्यावरण-अनुकूल उत्पादन पर भी ज़ोर दिया। पानी की खपत और कचरा प्रबंधन पर सख्ती होगी। शुरुआती चरण में ही योजनाओं की जांच की जाएगी ताकि बाद में रुकावट न आए। उद्योग प्रतिनिधियों ने माना कि यह कदम परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में मदद करेगा।
सिंगल-विंडो क्लीयरेंस और नियामकीय सुधार
UP में अब फार्मा उद्योग के लिए “वन-स्टॉप” मंज़ूरी प्रणाली लागू होगी। भूमि, पर्यावरण और लाइसेंस से जुड़ी सभी मंज़ूरियाँ एक ही आवेदन से मिलेंगी। पहले जहां एक साल तक इंतज़ार करना पड़ता था, अब लक्ष्य अधिकतम तीन महीने का है।

राज्य ने भूमि नियमों से जुड़ी पुरानी अस्पष्टताओं को भी दूर किया है। फार्मा परियोजनाओं के लिए अलग टीम बनाई गई है, जो समस्याओं का तुरंत समाधान करेगी। इससे नए निवेशकों को तेज़ी से फैसले लेने में मदद मिलेगी।
वित्तीय प्रोत्साहन और सब्सिडी ढांचा
नई इकाइयों के लिए आर्थिक सहायता प्रमुख आकर्षण है। API उत्पादन में बड़े निवेश पर 25% तक सब्सिडी दी जाएगी। स्थानीय बिक्री से होने वाले मुनाफे पर पाँच साल तक कर छूट मिलेगी।
छोटी कंपनियों को राज्य बैंकों के माध्यम से कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध होगा। हरित तकनीक अपनाने पर स्थापना लागत का 50% तक अनुदान दिया जाएगा। रोजगार सृजन से जुड़ी सब्सिडी स्थानीय युवाओं को काम देने के लिए प्रेरित करेगी।
बल्क ड्रग निर्माण और API आत्मनिर्भरता पर ज़ोर
भारत अपनी 70% API ज़रूरतें चीन से आयात करता है। उत्तर प्रदेश इस निर्भरता को कम करने की दिशा में बड़ा कदम उठाना चाहता है। बैठक में स्थानीय उत्पादन को बढ़ाने पर विशेष चर्चा हुई।
API आयात निर्भरता को कम करने की योजना
एंटीबायोटिक्स और हृदय रोग की दवाओं जैसे प्रमुख API यूपी में ही तैयार किए जाएंगे। राज्य और केंद्र सरकार मिलकर वित्तीय सहायता देंगी। लक्ष्य है कि 2030 तक यूपी राष्ट्रीय API मांग का 20% पूरा करे।
इससे कीमतों में उतार-चढ़ाव कम होगा और झांसी जैसे क्षेत्रों में स्थायी रोजगार पैदा होंगे।
बल्क ड्रग पार्क और PLI योजना का एकीकरण
UP में दो नए बल्क ड्रग पार्क विकसित किए जा रहे हैं—एक लखनऊ के पास और दूसरा बुंदेलखंड में। यहां ज़मीन, बिजली और बुनियादी ढांचा तैयार हालत में मिलेगा।
उद्योग इन पार्कों से केंद्र की PLI (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) योजना का लाभ भी उठा सकेंगे, जिससे बिक्री पर 10–20% तक प्रोत्साहन मिलेगा। सोनभद्र का एक पार्क पहले ही तीन इकाइयों की मेजबानी कर रहा है।
गुणवत्ता और वैश्विक मानकों पर फोकस
हर नई इकाई को WHO-GMP मानकों का पालन करना होगा। निरीक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। निर्यात बढ़ाने के लिए US FDA जैसे अंतरराष्ट्रीय मानकों पर भी ज़ोर रहेगा।
राज्य प्रयोगशालाएँ शुरुआती दौर में मुफ्त परीक्षण सुविधा देंगी, जिससे छोटे उद्योग भी वैश्विक मानकों पर खरे उतर सकें।
बुनियादी ढांचा और लॉजिस्टिक्स को मज़बूती
फार्मा उद्योग के लिए बेहतर सड़क, भंडारण और कोल्ड चेन ज़रूरी है। बैठक में लॉजिस्टिक्स को लेकर बड़े निवेश की घोषणा हुई।
विश्वस्तरीय फार्मा लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर
टीकों और संवेदनशील दवाओं के लिए तापमान नियंत्रित कोल्ड स्टोरेज हब बनाए जाएंगे। 2027 तक 50 ऐसे केंद्र स्थापित करने की योजना है। GPS ट्रैकिंग वाले ट्रक सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित करेंगे।
एक्सप्रेसवे और वेयरहाउसिंग का लाभ
पूर्वांचल और अन्य एक्सप्रेसवे से दिल्ली जैसे बाज़ार चार घंटे में जुड़े होंगे। हाईवे के पास बड़े वेयरहाउस बनाए जाएंगे।
गंगा जलमार्ग के ज़रिए भी दवा परिवहन की योजना है, जिससे सड़क जाम कम होगा और लागत घटेगी।
जल और बिजली सुरक्षा
उद्योगों को 24×7 बिजली आपूर्ति का आश्वासन दिया गया है, जिसमें सोलर बैकअप को भी प्रोत्साहन मिलेगा। जल पुनर्चक्रण संयंत्र अनिवार्य किए जाएंगे ताकि उत्पादन निर्बाध रहे।
नवाचार, R&D और मानव संसाधन विकास
मुख्यमंत्री ने शिक्षा संस्थानों और उद्योग के बीच सहयोग बढ़ाने पर ज़ोर दिया।
अनुसंधान और विकास का इकोसिस्टम
गोरखपुर AIIMS और स्थानीय कंपनियों के बीच संयुक्त शोध परियोजनाएँ होंगी। राज्य R&D लागत का 30% तक अनुदान देगा।
बायोटेक पार्क और साझा प्रयोगशालाएँ स्टार्टअप्स को बढ़ावा देंगी। IIT जैसे संस्थानों से तकनीकी सहयोग होगा।
कौशल विकास और प्रशिक्षण
क्लीन-रूम संचालन और गुणवत्ता नियंत्रण में कौशल की कमी को देखते हुए पॉलीटेक्निक में अल्पकालिक कोर्स शुरू होंगे। हर साल 10,000 युवाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है।
वैश्विक प्रतिभा और निवेश आकर्षण
विदेशी विशेषज्ञों के लिए तेज़ वीज़ा प्रक्रिया और R&D ज़ोन के पास आवास सुविधा दी जाएगी। फाइज़र जैसी वैश्विक कंपनियों के साथ साझेदारी की संभावनाएँ तलाशी जा रही हैं।
फार्मा पावरहाउस बनने की ओर उत्तर प्रदेश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की यह पहल उत्तर प्रदेश को फार्मा उद्योग का मजबूत केंद्र बनाने की स्पष्ट दिशा दिखाती है। API पार्क, वित्तीय प्रोत्साहन, बुनियादी ढांचा और कौशल विकास—हर कदम आत्मनिर्भरता और रोजगार सृजन की ओर है।
अनुमान है कि अगले पाँच वर्षों में 5 लाख नए रोज़गार पैदा होंगे और राज्य की GDP में 15% तक की वृद्धि हो सकती है।
उद्योग के लिए प्रमुख संदेश
सिंगल-विंडो सिस्टम से 90 दिनों में मंज़ूरी पाएं
API निवेश पर 25% तक सब्सिडी का लाभ लें
बल्क ड्रग पार्क और PLI योजना से अतिरिक्त प्रोत्साहन पाएं
WHO मानकों का पालन कर मुफ्त राज्य परीक्षण सुविधा का उपयोग करें
एक्सप्रेसवे से जुड़े कोल्ड चेन और लॉजिस्टिक्स का लाभ उठाएं
स्थानीय विश्वविद्यालयों के साथ R&D और प्रतिभा विकास में साझेदारी करें
आगे की राह
अब नज़र इस बात पर रहेगी कि ये योजनाएँ ज़मीन पर कितनी तेज़ी से उतरती हैं। पहले बल्क ड्रग पार्क 2026 के मध्य तक शुरू होने की उम्मीद है। अगर क्रियान्वयन मज़बूत रहा, तो UP जल्द ही गुजरात जैसे अग्रणी राज्यों को टक्कर दे सकता है।
अगर आप फार्मा उद्योग से जुड़े हैं, तो उत्तर प्रदेश में निवेश का यह सही समय हो सकता है — अवसर तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं।
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