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लॉकडाउन: भूखे पेट 300 किमी पैदल चले, तेज धूप-गर्मी ने ली 21 साल के मजदूर की जान

‘दोपहर की धूप में मेरे बुलाने के लिये, वो तेरा कोठे पे नंगे पांव आना याद है…’, ये पंक्तियां उस शायर ने लिखी थीं जिसकी आज पुण्यतिथि है. नाम है हसरत मोहानी. हसरत मोहानी ने इस खूबसूरत शायरी के जरिये ये बताने की कोशिश की है कि इंसान की चाहत उसे तेज धूप में भी नंगे पांव निकलने के लिये राजी कर लेती है.

लेकिन आज हालात जुदा हैं. लॉकडाउन ने लोगों को मजबूर कर दिया है और इस मजबूरी में मजदूर नंगे पांव, भूखे पेट सैकड़ों किलोमीटर पैदल निकल पड़े हैं. कहीं ट्रेन से कटकर उनकी मौत हो रही है तो कहीं कोई गाड़ी हादसे का शिकार हो रही है. अब तो आलम ये है कि धूप और गर्मी भी गरीब मजदूरों की जान लेने लगी है.

तेलंगाना के भद्राचलम में तेज धूप और गर्मी एक प्रवासी मजदूर की मौत का कारण बन गई है. 21 साल का यह नौजवान मजदूर हैदराबाद से अपने साथियों के साथ ओडिशा के लिये निकला था. रविवार को ये सभी मजदूर हैदराबाद से निकले. दिन रात पैदल चलते रहे. मई के महीने की चिलचिलाती धूप और लू के थपेड़ों को चीरते हुये इन मजदूरों ने अपना सफर जारी रखा. करीब 300 किलोमीटर चलने के बाद ये भद्राचलम पहुंच गये.

मंगलवार को जब ये मजदूर भद्राचलम पहुंचे तो 21 साल के युवक को अचानक सीने में दर्द उठा. इसके बाद उल्टियां होने लगीं. देखते ही देखते यह युवक सड़क पर गिर गया. ये देख साथी मजदूर घबरा गये और किसी तरह उसे भद्राचलम अस्पताल ले गये. अस्पताल पहुंचने से पहले ही युवा मजदूर की मौत हो चुकी थी. डॉक्टरों ने उसे ब्रॉट डेड घोषित कर दिया.

खबरों के मुताबिक डॉक्टरों का कहना है कि मजदूर की बॉडी और मुंह एकदम सूखे थे, ऐसे में इस बात की आशंका है कि मौत तेज धूप और गर्मी के चलते हुई है. डॉक्टरों ने ये भी बताया कि मृतक मजदूर के साथियों ने उन्हें बताया कि सोमवार दोपहर से उन सभी ने कुछ भी नहीं खाया था. यानी ये मजदूर भूखे पेट सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलते रहे.

सूचना पाकर पुलिस भी अस्पताल पहुंची और मृतक के परिजनों को जानकारी दी गई. इसके अलावा पुलिस ने शव के लिये वाहन का भी इंतेजाम कराया. मृतक का घर ओडिशा के मल्कानगिरी जिले में है.

बता दें कि तेलंगाना की गिनती देश के सबसे गर्म राज्यों में की जाती है. मई महीने में वहां तेज धूप और गर्मी का प्रकोप रहता है. इस हफ्ते भद्राचलम का तापमान 40 डिग्री से ऊपर है, यानी ये मजदूर भूखे प्यासे जलाने वाली धूप में पैदल चले जा रहे थे.