दिल्ली की बढ़त: CM रेखा गुप्ता ने 500 नई ईवी बसों को दिखाई हरी झंडी, ई-बस लीडरशिप और मज़बूत
ज़रा यह दृश्य सोचिए—दिल्ली की सड़कों पर बिना शोर, बिना धुएँ की सैकड़ों चमचमाती इलेक्ट्रिक बसें दौड़ती हुईं। फरवरी 2026 की एक ठंडी सुबह, जब CM रेखा गुप्ता ने 500 नई ईवी बसों को हरी झंडी दिखाई। यह सिर्फ़ एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि राजधानी के हरित परिवहन भविष्य की बड़ी घोषणा थी।
इस कदम के साथ दिल्ली ने न केवल प्रदूषण के खिलाफ़ अपनी लड़ाई तेज़ की, बल्कि भारत में इलेक्ट्रिक बसों की सबसे बड़ी फ्लीट वाला शहर बनने की अपनी स्थिति भी पक्की कर ली। यह लेख बताएगा कि यह पहल कैसे काम करेगी, इसके पीछे की योजना क्या है, और इसका असर आपकी रोज़मर्रा की यात्रा और पर्यावरण पर कैसे पड़ेगा।
ऐतिहासिक फ्लैग-ऑफ और उसका त्वरित असर
500 नई इलेक्ट्रिक बसों का शुभारंभ
दिल्ली परिवहन निगम (DTC) मुख्यालय के पास आयोजित समारोह में CM रेखा गुप्ता ने बटन दबाया और पहली खेप की ईवी बसें बिना किसी धुएँ के सड़कों पर उतर पड़ीं। इस जोड़ के बाद दिल्ली की इलेक्ट्रिक बसों की संख्या 5,000 से अधिक हो गई है, जो कुछ महीने पहले तक 4,500 थी।
इन बसों को तुरंत चरणबद्ध तरीके से सड़कों पर उतारा जाएगा, जिससे भीड़भाड़ वाले रूट्स पर दबाव कम होगा और यात्रियों को बेहतर सेवा मिलेगी।
रूट विस्तार और इलाक़ों में तैनाती
इन 500 बसों को रणनीतिक रूप से पूरे शहर में तैनात किया जाएगा:
उत्तर और पूर्वी दिल्ली: रिहायशी इलाकों को बेहतर कनेक्टिविटी
केंद्रीय दिल्ली: कनॉट प्लेस, साउथ एक्सटेंशन जैसे हाई-डिमांड रूट
कम सुविधा वाले क्षेत्र: रोहिणी, द्वारका और नरेला जैसे बाहरी इलाके
करीब 200 किलोमीटर नए या अपग्रेडेड रूट्स पर ज़ीरो-एमिशन सफ़र संभव होगा। यानी अब घर से दफ़्तर तक सफ़र में धुएँ की बदबू नहीं, बल्कि साफ़ हवा।

दिल्ली की ई-बस लीडरशिप: राष्ट्रीय स्तर पर बढ़त
दिल्ली अब भारत में ई-बसों की दौड़ में सबसे आगे है:
दिल्ली: 5,000+ ईवी बसें
मुंबई: लगभग 2,800
बेंगलुरु: लगभग 1,900
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़, दिल्ली की ई-बस फ्लीट में पिछले एक साल में 25% की बढ़ोतरी हुई है। देश की कुल इलेक्ट्रिक बसों में से करीब 40% अकेले दिल्ली में चल रही हैं—यह अपने आप में बड़ी उपलब्धि है।
CM रेखा गुप्ता का हरित परिवहन विज़न
तेज़ ईवी अपनाने के पीछे नीतिगत फैसले
रेखा गुप्ता सरकार ने 2030 तक 80% बस फ्लीट को इलेक्ट्रिक करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए:
सार्वजनिक बसों के लिए मुफ़्त चार्जिंग
टैक्स में छूट
केंद्र सरकार की FAME-III योजना से वित्तीय सहायता
CM का साफ़ संदेश है:
“स्वच्छ हवा की शुरुआत स्वच्छ पहियों से होती है।”
इन नीतियों ने लालफीताशाही कम की और बसें तेज़ी से सड़कों पर उतारी जा सकीं।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूती
ईवी बसें तभी सफल होती हैं जब चार्जिंग सिस्टम मज़बूत हो। दिल्ली ने इस दिशा में बड़ा निवेश किया है:
50 नए फास्ट-चार्जिंग स्टेशन
20 डिपो अपग्रेड, हर एक में 100 चार्जर
स्मार्ट ग्रिड और सोलर पैनल से लैस डिपो
500 मेगावाट अतिरिक्त बिजली क्षमता
अब बसें दो घंटे से कम समय में चार्ज होकर दोबारा रूट पर लौट सकती हैं।
फंडिंग मॉडल और पीपीपी साझेदारी
इस परियोजना में फंडिंग का स्रोत रहा:
राज्य बजट
केंद्र सरकार की सब्सिडी
टाटा और अशोक लेलैंड जैसी कंपनियों के साथ PPP मॉडल
निजी कंपनियाँ 10 साल तक ऑपरेशन संभालेंगी। इससे सरकारी ख़र्च कम हुआ और सेवा तेज़ मिली। ग्रीन बॉन्ड्स के ज़रिये भी अतिरिक्त पूंजी जुटाई गई।
तकनीक और यात्री अनुभव
बैटरी, रेंज और दक्षता
हर नई बस में:
250 kWh लिथियम-आयन बैटरी
एक चार्ज में 250 किमी तक रेंज
10 साल तक चलने की क्षमता
डीज़ल बसों की तुलना में संचालन लागत 30% कम है और शोर लगभग न के बराबर।
यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाएँ
लो-फ़्लोर डिज़ाइन और व्हीलचेयर रैंप
8 सीसीटीवी कैमरे और इमरजेंसी बटन
जीपीएस ट्रैकिंग और मोबाइल ऐप अपडेट
डिजिटल डिस्प्ले, कुछ रूट्स पर वाई-फाई
एक यात्री का कहना था:“अब सफ़र में डीज़ल की बदबू नहीं—दिन की शुरुआत बेहतर लगती है।”
दिल्ली के जलवायु लक्ष्यों पर असर
कार्बन उत्सर्जन में कटौती
इन 500 बसों से हर साल करीब:
15,000 टन CO₂ उत्सर्जन कम
कणीय प्रदूषण में 40% तक गिरावट
यह दिल्ली के 2050 तक नेट-ज़ीरो लक्ष्य के अनुरूप है। पहले के चरणों में ही प्रदूषण स्तर में 20% तक कमी देखी गई है।
रोज़गार और हरित अर्थव्यवस्था
इस ऑर्डर से:
2,000 नए रोज़गार
NCR में मैन्युफैक्चरिंग और मेंटेनेंस जॉब्स
ड्राइवरों और तकनीशियनों के लिए नई ट्रेनिंग
ग़ाज़ियाबाद और आसपास की फैक्ट्रियों में स्थानीय भर्ती बढ़ी है। यह एक पूरे “ग्रीन इकोसिस्टम” की नींव रखता है।
आगे की चुनौतियाँ
बढ़ती बिजली मांग से ग्रिड पर दबाव
बैटरी रीसाइक्लिंग की व्यवस्था
ड्राइवरों का तकनीकी प्रशिक्षण
हालाँकि सोलर एनर्जी, बैटरी री-यूज़ और स्किल प्रोग्राम जैसी योजनाएँ इन चुनौतियों का समाधान पेश करती हैं।
सार्वजनिक परिवहन का भविष्य तय करती दिल्ली
CM रेखा गुप्ता द्वारा 500 ईवी बसों का फ्लैग-ऑफ दिल्ली को भारत की ई-बस राजधानी बना देता है। मज़बूत नीतियाँ, पुख्ता इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक तकनीक—तीनों मिलकर यह बदलाव संभव कर रहे हैं।
यह साबित करता है कि सही नेतृत्व और इच्छाशक्ति से स्वच्छ, सस्ता और आधुनिक सार्वजनिक परिवहन हकीकत बन सकता है।
US के इस दावे के बाद कि प्रधानमंत्री मोदी रूसी तेल खरीदना बंद करने पर सहमत हो गए हैं, रूस ने दिल्ली का समर्थन किया।
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