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Babri मस्जिद दोबारा नहीं बनेगी: योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर पर अडिग प्रतिबद्धता दोहराई

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक बार फिर सुर्खियों में हैं। फरवरी 2026 में एक सार्वजनिक रैली के दौरान उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद की दोबारा स्थापना कभी नहीं होगी। राम मंदिर के पक्ष में उमड़े जनसमूह के बीच दिया गया यह बयान वर्षों पुराने विवाद पर उनकी सरकार की स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट करता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बने राम मंदिर के साथ, योगी का यह वक्तव्य कई लोगों के लिए अंतिम मुहर जैसा है। लेकिन इसका अयोध्या के भविष्य पर क्या असर पड़ेगा? आइए समझते हैं।

योगी का बयान सिर्फ राजनीतिक भाषण नहीं है। यह अयोध्या विवाद की गहरी जड़ों को दर्शाता है, जिसने दशकों तक देश को बांटे रखा। 1992 में Babri मस्जिद गिराए जाने के बाद यह विवाद चरम पर पहुंचा। हिंदू समुदाय इसे भगवान राम की जन्मभूमि मानता रहा, जबकि मुस्लिम समुदाय के लिए यह एक ऐतिहासिक मस्जिद थी। 2019 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने भूमि राम मंदिर के लिए दे दी और मुस्लिम पक्ष को अलग स्थान पर मस्जिद निर्माण के लिए जमीन दी। योगी का ताजा बयान इस फैसले को लेकर किसी भी तरह की शंका को खत्म करता दिखता है।

योगी आदित्यनाथ का बयान: विवाद पर पूर्ण विराम

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि Babri मस्जिद उसी स्थान पर “अनंत काल तक” नहीं बनेगी। यह शब्द अपने आप में बहुत स्पष्ट और सख्त संदेश देता है। इसका अर्थ है कि इस मुद्दे पर भविष्य में किसी भी प्रकार की पुनर्विचार या चर्चा की गुंजाइश नहीं है।

उन्होंने यह बात राष्ट्रीय गौरव, आस्था और एकता के संदर्भ में कही। राम मंदिर समर्थकों के लिए यह न्याय की जीत है, जबकि आलोचक इसे विभाजनकारी बयान मानते हैं। चूंकि अयोध्या उत्तर प्रदेश में है, इसलिए मुख्यमंत्री के रूप में योगी के शब्दों का राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव काफी गहरा है।

2019 का सुप्रीम कोर्ट फैसला: कानूनी आधार

नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया। 2.77 एकड़ विवादित भूमि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दी गई। अदालत ने माना कि पुरातात्विक साक्ष्यों से वहां मंदिर के अवशेषों की पुष्टि होती है।

Yogi Adityanath in Haryana:Congress's structure as dilapidated as once Babri  was

साथ ही, मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में ही अलग स्थान पर पांच एकड़ जमीन मस्जिद निर्माण के लिए दी गई। यह फैसला वर्षों से चले आ रहे कानूनी संघर्ष को समाप्त करने के उद्देश्य से दिया गया था। इसके बाद इस फैसले को किसी भी उच्च न्यायिक मंच पर बदला नहीं गया।

राम मंदिर परियोजना: आस्था का साकार रूप

राम मंदिर परियोजना तेजी से आगे बढ़ी है। जनवरी 2024 में प्राण प्रतिष्ठा के बाद से मंदिर में नियमित पूजा और दर्शन हो रहे हैं। 2026 की शुरुआत तक मंदिर के अधिकांश हिस्से तैयार हो चुके हैं।

राजस्थान के गुलाबी बलुआ पत्थर से बना यह मंदिर नागर शैली की वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है। मुख्य शिखर की ऊंचाई लगभग 161 फीट होगी। मंदिर परिसर करीब 70 एकड़ में फैला है।

अब तक देश-विदेश से 3,500 करोड़ रुपये से अधिक का दान प्राप्त हुआ है। मंदिर परिसर को पर्यावरण अनुकूल और भूकंपरोधी बनाया गया है, जिसमें सौर ऊर्जा का भी उपयोग हो रहा है।

जन प्रतिक्रिया और राष्ट्रीय प्रभाव

देशभर में राम मंदिर को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। लाखों श्रद्धालु अयोध्या पहुंच रहे हैं। अनुमान है कि 2027 तक हर साल करीब 5 करोड़ पर्यटक अयोध्या आएंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बड़ा लाभ होगा।

सोशल मीडिया पर मंदिर की तस्वीरें और वीडियो साझा किए जा रहे हैं। कई श्रद्धालुओं का कहना है कि अयोध्या में एक अलग ही शांति और ऊर्जा महसूस होती है।

दूसरी ओर, नई मस्जिद के निर्माण को लेकर भी मुस्लिम समुदाय के एक हिस्से में सकारात्मक भाव दिख रहा है, जिससे संतुलन की उम्मीद बंधती है।

Babri मस्जिद स्थल की वर्तमान स्थिति

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद Babri मस्जिद की पुरानी जमीन अब पूरी तरह राम मंदिर ट्रस्ट के अधीन है। वहां किसी भी अन्य धार्मिक संरचना का निर्माण कानूनन संभव नहीं है।

मस्जिद के लिए दी गई नई जमीन पर 2023 से निर्माण कार्य चल रहा है। इसका नाम “मस्जिद-ए-आयशा” रखा गया है, जो पुराने विवाद से दूर एक नई शुरुआत का प्रतीक माना जा रहा है।

Haryana: Yogi Adityanath attacks Congress, says 'Their structure as  dilapidated as once Babri was in Ayodhya' - BusinessToday

राजनीतिक प्रभाव और साम्प्रदायिक सौहार्द

योगी आदित्यनाथ का यह बयान राजनीतिक दृष्टि से भी अहम है। चुनावी माहौल में ऐसे वक्तव्य उनके समर्थकों को एकजुट करते हैं। विपक्ष इसे विभाजनकारी राजनीति बताता है, जबकि सत्तापक्ष इसे सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान कहता है।

स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है और बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान हजारों पुलिसकर्मी तैनात रहते हैं। इससे हाल के वर्षों में किसी बड़े टकराव की स्थिति नहीं बनी है।

वर्तमान हकीकत से तय होता अयोध्या का भविष्य

योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट संदेश है—Babri मस्जिद उसी स्थान पर दोबारा नहीं बनेगी। 2019 का सुप्रीम कोर्ट फैसला, राम मंदिर का निर्माण और अलग स्थान पर मस्जिद के लिए जमीन—इन सबने अयोध्या के भविष्य की दिशा तय कर दी है।

इतिहास के घाव भरने में समय लगता है, लेकिन वर्तमान में अयोध्या विकास, आस्था और पर्यटन का केंद्र बनकर उभर रही है। अब चुनौती है कि इस बदलाव के साथ शांति और सौहार्द भी बना रहे।

आप इस बदलाव को कैसे देखते हैं? क्या यह भारत के भविष्य के लिए एक नई शुरुआत है? बातचीत जारी रहनी चाहिए—लेकिन शांति के साथ।

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