PM

क्या सिर्फ PM मोदी ही करा सकते हैं शांति? ईरान-अमेरिका तनाव पर डगलस मैकग्रेगर की राय

मध्य-पूर्व में Iran और United States के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ड्रोन हमले, प्रॉक्सी संघर्ष और समुद्री टकराव ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

इसी बीच अमेरिकी सेना के रिटायर्ड कर्नल Douglas Macgregor ने एक बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि इस संकट को कम करने में अगर कोई नेता मध्यस्थता कर सकता है तो वह भारत के PM Narendra Modi हैं।

मैकग्रेगर के अनुसार भारत की वैश्विक स्थिति ऐसी है कि वह दोनों देशों से बात कर सकता है और उन्हें बातचीत की मेज तक ला सकता है।

मैकग्रेगर के तर्क: क्यों PM मोदी बन सकते हैं मध्यस्थ

भारत की गैर-गुट नीति का फायदा

भारत लंबे समय से रणनीतिक रूप से स्वतंत्र विदेश नीति अपनाता रहा है। यह नीति शीत युद्ध के समय की गुटनिरपेक्ष सोच से प्रभावित रही है।

इसका फायदा यह है कि भारत:

  • अमेरिका के साथ मजबूत रणनीतिक साझेदारी रखता है

  • ईरान के साथ ऐतिहासिक और आर्थिक संबंध भी बनाए रखता है

मैकग्रेगर का मानना है कि इसी संतुलन के कारण भारत दोनों पक्षों से बिना टकराव के बातचीत कर सकता है।

Trump should call PM Modi': Retired US army officer on how to come out of Iran  war – Firstpost

PM मोदी की कूटनीतिक शैली

PM नरेंद्र मोदी ने कई बार कठिन परिस्थितियों में भी अलग-अलग देशों से संतुलित संबंध बनाए रखे हैं।

उदाहरण के तौर पर:

  • रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत ने दोनों पक्षों से संवाद बनाए रखा

  • खाड़ी देशों के साथ भारत के संबंध मजबूत हुए

  • वैश्विक मंचों पर भारत की भूमिका बढ़ी

G20 की अध्यक्षता के दौरान भी भारत ने कई वैश्विक मुद्दों पर संवाद बढ़ाने की कोशिश की थी।

भारत के पास मध्यस्थता की मजबूत आधारशिला

आर्थिक और ऊर्जा संबंध

भारत की ऊर्जा जरूरतें काफी हद तक मध्य-पूर्व पर निर्भर हैं।

  • भारत अपनी कुल तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से आयात करता है

  • ईरान भारत के लिए एक महत्वपूर्ण ऊर्जा स्रोत रहा है

अगर खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, खासकर Strait of Hormuz में, तो वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसलिए भारत के लिए शांति बनाए रखना आर्थिक रूप से भी जरूरी है।

Retired US colonel suggests 'Trump should talk to PM Modi' amid escalating  tensions with Iran

ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध

भारत और ईरान के संबंध सदियों पुराने हैं।

व्यापार, संस्कृति और भाषा के स्तर पर दोनों देशों के बीच गहरे संपर्क रहे हैं। आधुनिक दौर में भी यह सहयोग कई परियोजनाओं में दिखाई देता है, जैसे:

  • Chabahar Port परियोजना

  • मध्य एशिया तक व्यापारिक मार्ग

यह परियोजना भारत के लिए रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पाकिस्तान को बायपास कर अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच बनती है।

लेकिन रास्ता आसान नहीं

अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी

भारत और अमेरिका के बीच रक्षा और तकनीकी सहयोग लगातार बढ़ रहा है।

उदाहरण के तौर पर:

  • QUAD समूह में भारत की भूमिका

  • रक्षा सहयोग और सैन्य अभ्यास

ऐसे में अगर भारत ईरान के पक्ष में ज्यादा झुकता हुआ दिखे तो अमेरिका के साथ संबंधों पर दबाव आ सकता है।

ईरान की आंतरिक राजनीति

ईरान की राजनीति भी काफी जटिल है।

सर्वोच्च नेता Ali Khamenei के नेतृत्व में देश की विदेश नीति तय होती है और कई बार कठोर रुख अपनाया जाता है।

ईरान के भीतर भी:

  • कठोर रुख अपनाने वाले गुट

  • समझौते के समर्थक गुट

इनके बीच मतभेद रहते हैं, जिससे बातचीत की प्रक्रिया मुश्किल हो जाती है।

Retired US colonel suggests 'Trump should talk to PM Modi' amid escalating  tensions with Iran

संभावित मध्यस्थता कैसे हो सकती है?

अगर भारत मध्यस्थ की भूमिका निभाता है तो यह कई रूपों में हो सकता है।

1. बैक-चैनल बातचीत

गोपनीय बातचीत के जरिए दोनों देशों के बीच संदेश पहुंचाना।

2. अंतरराष्ट्रीय मंचों पर संवाद

जैसे G20 या अन्य बहुपक्षीय मंचों पर अनौपचारिक बैठकें।

3. आर्थिक सहयोग के जरिए समाधान

ऊर्जा और व्यापार समझौतों के माध्यम से तनाव कम करने की कोशिश।

डगलस मैकग्रेगर का दावा भले ही बड़ा लगे, लेकिन इसमें कुछ सच्चाई भी है। भारत की संतुलित विदेश नीति, ईरान के साथ ऐतिहासिक संबंध और अमेरिका के साथ बढ़ती साझेदारी उसे एक संभावित मध्यस्थ बना सकती है।

हालांकि चुनौतियां भी कम नहीं हैं—अमेरिका की रणनीतिक अपेक्षाएं और ईरान की आंतरिक राजनीति इस प्रक्रिया को जटिल बना सकती हैं।

फिर भी अगर कोई देश दोनों पक्षों से समान रूप से बात कर सकता है, तो वह भारत हो सकता है।

अब सवाल यह है:
क्या PM नरेंद्र मोदी वास्तव में इस संकट में शांति स्थापित करने की भूमिका निभा सकते हैं?

Delhi विश्वविद्यालय ने राहुल गांधी के ‘साक्षात्कार’ के दावे को खारिज किया, तथ्यों की जांच की अपील की

Follow us on Facebook

India Savdhan News | Noida | Facebook

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.