MMMMM 1

संभल। अगर बाढ़ आ जाती है तो गुन्नौर तहसील के छह गांवों की कृषि भूमि डूब जाती है। गंगा नदी के किनारे बने तटबंध टूटने पर घर डूबने और रास्तों में पानी भर जाने का खतरा है। इन हालातों को देखते हुए जिला प्रशासन सतर्क हो गया है। गंगा किनारे बने तटबंधों का निरीक्षण किया जाएगा। इसी क्रम में जिलाधिकारी अविनाश कृष्ण सिंह ने बुधवार को बहजोई स्थित कलक्ट्रेट में बाढ़ से निबटने के लिए बाढ़ नियंत्रण खंड के अधिकारियों के संग बैठक की। इसमें प्रशासन के अधिकारी भी शामिल हुए।

गुन्नौर तहसील के रघूपुर पुख्ता, मढ़ैया भावरू की, सौंधे की मढ़ैया, मैंगरा, बझांगी, सोन सिवारक आदि गांव गंगा नदी के किनारे पर हैं। जब गंगा नदी में बाढ़ के पानी का सैलाब आता है तो इन गांवों के तमाम किसानों की फसल डूब जाती है। गांव के निचले हिस्सों में पानी भर जाता है। लोगों की आवाजाही प्रभावित होती है। रघूपुर पुख्ता में तो अपने घर तक जाने के लिए लोगों को नाव का सहारा लेना पड़ता है।
इस बार ऐसी नौबत आती है तो प्रशासन कैसे निपटेगा। लोगों को क्या सहूलियत दी जाएगी। जिनके घर डूबेंगे उन्हें कहां रखा जाएगा। पशुओं और मनुष्यों के लिए आश्रय स्थल कहां-कहां बनने हैं। इस पर प्राथमिक चर्चा बैठक में हुई। बैठक में अपर जिलाधिकारी केके अवस्थी, मुख्य विकास अधिकारी उमेश कुमार त्यागी, उप जिलाधिकारी दीपेंद्र यादव ने भाग लिया।
सात दिन में बनाएं बाढ़ नियंत्रण योजना
पिछली बार की तुलना में बाढ़ की ज्यादा बेहतर तैयारी चाहिए। सात दिन के भीतर बाढ़ नियंत्रण योजना तैयार कर ली जाए। बाढ़ नियंत्रण खंड के अभियंता गंगा नदी के किनारे बने तटबंधों की वर्तमान स्थिति का निरीक्षण करें और अगर कहीं मरम्मत की जरूरत है तो उसे तत्काल कराएं। अपनी लिखित आख्या प्रस्तुत करें।
अविनाश कृष्ण सिंह, जिलाधिकारी।
वर्ष 2010 और 2013 में आई थी बाढ़
संभल। वैसे तो संभल जिले में प्रतिवर्ष गंगा का पानी बढ़ता है और बाढ़ का खतरा पैदा हो जाता है लेकिन बाढ़ ने मुख्य रूप से 2010 और 2013 में भारी क्षति पहुंचाई थी। किसानों की फसलें डूब गईं थीं। कई दिनों तक गांवों के लिए आवागमन प्रभावित रहा था। इन वर्षों की बाढ़ से सबक लेकर इस बार की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
यह दो तटबंध रोकते हैं बाढ़ का खतरा
बाढ़ के खतरे से संभल जिले की गुन्नौर तहसील के गांवों को बचाने में दो तटबंद मुख्य रूप से काम करते हैं। पहला तटबंध ईसपुर डाडा के नाम से जाना जाता है जो 11.7 किलोमीटर लंबा है। नगला अजमेरी में दूसरा तटबंद है जो 14.8 किलोमीटर लंबा है। दोनों तटबंधों का निरीक्षण बाढ़ नियंक्षण खंड के अधिकारी करेंगे।