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PM मोदी ने इंडोनेशियाई संसद में नेहरू का किया उल्लेख, भारत-इंडोनेशिया के ऐतिहासिक संबंधों को किया याद

PM Narendra Modi ने इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करते हुए भारत और इंडोनेशिया के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और लोकतांत्रिक संबंधों पर विस्तृत प्रकाश डाला। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने भारत के प्रथम प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru का भी उल्लेख किया और दोनों देशों के स्वतंत्रता संग्राम तथा गुटनिरपेक्ष आंदोलन के दौर में बने ऐतिहासिक संबंधों को याद किया। यह उल्लेख इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी सार्वजनिक मंचों पर नेहरू का संदर्भ अपेक्षाकृत कम देते हैं, जबकि इस भाषण में उन्होंने भारत-इंडोनेशिया संबंधों की ऐतिहासिक निरंतरता को रेखांकित करने के लिए उनका नाम लिया।

PM मोदी इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। उन्होंने कहा कि भारत और इंडोनेशिया केवल पड़ोसी समुद्री राष्ट्र नहीं हैं, बल्कि हजारों वर्षों से संस्कृति, व्यापार, विचार और सभ्यता के माध्यम से जुड़े हुए हैं। उन्होंने इस अवसर को दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने का अवसर बताया।

नेहरू और ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया की मित्रता आधुनिक कूटनीति से कहीं अधिक पुरानी है। उन्होंने स्वतंत्रता के बाद दोनों देशों के सहयोग का उल्लेख करते हुए पंडित जवाहरलाल नेहरू और इंडोनेशिया के संस्थापक नेताओं के बीच बने मजबूत संबंधों को याद किया।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने इंडोनेशिया की स्वतंत्रता के संघर्ष के दौरान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसका समर्थन किया था। संयुक्त राष्ट्र में भारत की भूमिका और एशियाई देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने स्वतंत्रता, संप्रभुता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए मिलकर काम किया।

विविधता में एकता पर दिया जोर

PM मोदी ने अपने भाषण में कहा कि भारत और इंडोनेशिया दोनों ऐसे देश हैं जिन्होंने विविधता को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग भाषाओं, संस्कृतियों और परंपराओं के बावजूद दोनों देशों ने लोकतंत्र और सामाजिक सद्भाव को मजबूत किया है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में विश्वास, अवसर और भागीदारी का आधार भी है। उन्होंने भारत को “लोकतंत्र की जननी” बताते हुए दोनों देशों के बीच संसदीय सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।

समुद्री साझेदारी और इंडो-पैसिफिक पर जोर

PM Modi mentions Nehru during landmark speech to Indonesian Parliament

PM ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के लिए समुद्र कभी दूरी का प्रतीक नहीं रहा, बल्कि दोनों देशों के बीच संपर्क और समृद्धि का माध्यम रहा है। उन्होंने हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोग, समुद्री सुरक्षा और मुक्त एवं समावेशी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के महत्व को रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि दोनों देशों को समुद्री व्यापार, ब्लू इकोनॉमी, आपदा प्रबंधन और नौवहन सुरक्षा के क्षेत्रों में सहयोग और मजबूत करना चाहिए।

वैश्विक दक्षिण और संयुक्त राष्ट्र सुधार की वकालत

अपने संबोधन में PM मोदी ने वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज़ को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार अनिवार्य है।

उन्होंने विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की मांग दोहराई और कहा कि वर्तमान वैश्विक व्यवस्था आज की वास्तविकताओं के अनुरूप होनी चाहिए। उन्होंने समावेशी विकास, तकनीक तक समान पहुंच और निष्पक्ष वैश्विक शासन की आवश्यकता पर बल दिया।

भारत-इंडोनेशिया संबंधों को नई दिशा

PM मोदी की यात्रा के दौरान भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा, कृषि, महत्वपूर्ण खनिज, समुद्री सहयोग और आर्थिक साझेदारी सहित कई क्षेत्रों में समझौतों पर भी सहमति बनी। दोनों देशों ने रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने तथा क्षेत्रीय स्थिरता के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले वर्षों में दोनों देश तकनीकी नवाचार, डिजिटल भुगतान, हरित ऊर्जा और शिक्षा के क्षेत्र में भी सहयोग का विस्तार करेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि यह साझेदारी पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और समृद्धि को बढ़ावा देगी।

संसद में मिला गर्मजोशी से स्वागत

जकार्ता स्थित इंडोनेशियाई संसद में प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। अपने संबोधन की शुरुआत में उन्होंने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति Prabowo Subianto और संसद की अध्यक्ष Puan Maharani का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के संबंध केवल सरकारों के बीच नहीं, बल्कि दोनों देशों के लोगों के बीच भी गहरे विश्वास और सांस्कृतिक निकटता पर आधारित हैं।

निष्कर्ष

इंडोनेशिया की संसद में PM नरेंद्र मोदी का संबोधन भारत की “एक्ट ईस्ट” नीति और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। इस दौरान जवाहरलाल नेहरू का उल्लेख कर उन्होंने यह संदेश दिया कि भारत-इंडोनेशिया संबंध किसी एक सरकार या दौर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दशकों से चली आ रही साझा ऐतिहासिक विरासत, लोकतांत्रिक मूल्यों और आपसी सहयोग पर आधारित हैं। उनके भाषण में इतिहास, कूटनीति, आर्थिक साझेदारी और भविष्य के सहयोग की स्पष्ट रूपरेखा दिखाई दी, जो दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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