इंडिया सावधान न्यूज़ मजहर अंसारी
लखनऊ, यूक्रेन और रशिया में चल रहे भीष्ण युद्ध के चलते भारत से गए हजारों छात्र जो मेडिकल की शिक्षा हासिल करने के लिए अपने माता पिता और देश छोड़कर जाने वाले छात्रों से लिए यह समय किसी भयानक काल की तरह है,इसी क्रम में सहसवान से पिछले चार वर्षों पूर्व में गए मुहम्मद शादाब आज प्रातः अपने घर सकुशल घर वापसी आ गए हैं,
छात्र शादाब को लेकर उनके परिजन डाक्टर हाजी आस मोहम्मद इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर लेने के लिए पहुंच गए थे,आपको बताते चलें की मुहम्मद शादाब इंडिया से यूक्रेन में अपने सपनो को साकार करने के लिए और पिता की ख्वाहिशों को अमली जामा पहनाने के लिए पिछले चार साल पहले गए थे
मगर इन पांच वर्षों में वह कभी घर वापस नहीं आए थे उनका कहना था कि में यहां एक डाक्टर बनने के लिए आया हूं और जब तक डाक्टरी की डिग्री हासिल नहीं कर लेता तब तक इंडिया वापस नहीं जाऊंगा, मगर तकदीर को कुछ और ही मंजूर था, मगर शादाब ने कभी हिम्मत नहीं हारी उन्होंने अपने हौसलों को हमेशा उड़ान देने का काम किया, इधर उनके परिजनों ने भी अपने बेटे के लिए हर संभव कुरबानी देने के लिए हमेशा उनका सहयोग करते रहे।
शादाब ने हमको बताया कि 24 फरबरी को यूक्रेन में सब कुछ रोज की तरह सामान्य था मगर अचानक जेसे ही रशिया ने हमला किया तब हम लोग सोचने पर मजबूर हो गए और हमने सब से पहले खाने के कुछ सामान को खरीदा और अपने रूम में चले गए इसके कुछ देर के बाद यूक्रेन की सरकार की ओर से एलान किया गया हालात ठीक नहीं है आप लोग अपने अपने रूम को छोड़कर बंकर में चले जाएं,
हम लोग कभी बनकर में चले जाते और कभी बाहर निकल आते थे,शादाब ने इंडिया सावधान न्यूज़ से बात करते हुए बताया कि हम लोगों को सब से ज्यादा परेशानी यूक्रेन और रोमानिया जाते समय हुई उन्होंने अपनी परेशानी को साझा करते हुए बताया की जब छात्र बॉर्डर पार करने के लिए जाते थे तब वहां पन्द्रह से बीस छात्रों को ही निकाला जाता था,
शादाब ने अपनी बहुत सारी बातों को साझा किया और बताया की इंडियन सरकार की ओर से हम लोगों को रोमानिया से दिल्ली तक लाया गया उसके बाद शादाब के परिजन दिल्ली हवाई अड्डे पर लेने पहुंच चुके थे,जेसे ही शादाब और परिजन मिले एक दूसरे की खुशी का ठिकाना नहीं था परिजनों ने अपने बच्चे को पाकर ऐसा महसूस किया जेसे न जानो दुनिया की सबसे बड़ी खुशी मिल गई हो,उधर शादाब के चेहरे पर थकान देखी जा रही थी,

