Delhi

Delhi में पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और CPI(M) नेताओं को हिरासत में लिया गया, केरल में विरोध-प्रदर्शन शुरू

नई Delhi/तिरुवनंतपुरम, 10 अक्टूबर 2026: दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन से पहले पुलिस ने केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन समेत भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी CPI(M) के कई वरिष्ठ नेताओं को हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई के बाद केरल में राजनीतिक माहौल गरमा गया और वामपंथी नेताओं तथा कार्यकर्ताओं ने पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ विरोध जताया। विपक्षी दलों ने हिरासत में लिए जाने की घटना पर सवाल उठाए, जबकि पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत का हवाला दिया।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पिनराई विजयन के साथ CPI(M) के महासचिव एम.ए. बेबी, वरिष्ठ नेता वृंदा करात, एम.वी. गोविंदन, पी.के. श्रीमती और राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास सहित कई नेताओं को हिरासत में लिया गया। ये नेता दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित होने वाले विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे थे। प्रदर्शन का उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करना था। यह आंदोलन मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर उठे विवाद के बीच आयोजित किया गया था।

Ex-CM Vijayan, CPI(M) leaders detained in Delhi; protests erupt across Keralam

जंतर-मंतर जाने से पहले हुई कार्रवाई

Delhi रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई और पुलिस बल तैनात किया गया। CPI(M) के नेता केरल भवन से जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहे थे, तभी पुलिस ने उन्हें रोककर हिरासत में ले लिया।

पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि वे लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने जा रहे थे, लेकिन उन्हें प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने नहीं दिया गया। CPI(M) ने पुलिस की कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि विपक्षी नेताओं को अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए।

Delhi पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भी हिरासत में लिए जाने के बाद केंद्र सरकार और दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी की स्थिति को एक तरह की खुली जेल बताते हुए आरोप लगाया कि विरोध की आवाजों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, यह विपक्षी नेताओं का आरोप है; पुलिस का पक्ष भी इस घटनाक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा है। <Cite refs={[“turn899011search1″,”turn899011search4”]}/>

मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर विवाद

इस पूरे विवाद के केंद्र में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR है। चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची की जांच करना और उसमें मौजूद गलत, दोहराई गई या अपात्र प्रविष्टियों को ठीक करना बताया जाता है। लेकिन विपक्षी दलों ने प्रक्रिया के तरीके और उसके संभावित राजनीतिक प्रभाव को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।

Delhi विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने से पात्र मतदाताओं के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है। कुछ विपक्षी नेताओं ने आशंका जताई है कि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा सकता है।

Ex-CM Vijayan, CPI(M) leaders detained in Delhi; protests erupt across Keralam

दूसरी ओर, चुनाव आयोग और भारतीय जनता पार्टी ने पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण नियमित सत्यापन प्रक्रिया का हिस्सा है और इसका उद्देश्य सूची को अधिक सटीक बनाना है।

ऐसे में विवाद केवल एक राजनीतिक प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि मतदाता सूची की विश्वसनीयता, पात्र नागरिकों के मतदान के अधिकार और चुनावी प्रक्रिया में जनता के विश्वास जैसे व्यापक मुद्दों से जुड़ गया है।

 

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