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Israel ने अक्टूबर में ईरान पर बड़े हमले की बनाई थी योजना, ट्रंप के विरोध के बाद टला ऑपरेशन: रिपोर्ट

פגישת נתניהו וטראמפ במאר-א-לאגו | N12

Israel meldet neue Angriffe auf Atomanlagen im Iran | STERN.de

Washington menace Téhéran en envoyant des bombardiers au Moyen-Orient via Israël - The Times of Israël

Israel और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच एक नई रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। Financial Times की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अक्टूबर 2026 में ईरान पर दोबारा बड़े पैमाने पर हवाई हमले करने की योजना बनाई थी। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विरोध के बाद इस सैन्य अभियान को फिलहाल रोक दिया गया।

रिपोर्ट में मामले से परिचित तीन अज्ञात सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि इजरायली सेना 10 अक्टूबर के आसपास हमले करने के लिए तैयार थी। प्रस्तावित अभियान में ईरान के परमाणु ठिकानों, सरकारी प्रतिष्ठानों और बिजली संयंत्रों जैसे नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की योजना थी। बताया गया कि प्रस्तावित हमले फरवरी में अमेरिका और इजरायल की ओर से किए गए हमलों से भी अधिक व्यापक हो सकते थे।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि हमले की योजना और उसे रोकने से संबंधित ये विवरण मीडिया रिपोर्टों और अज्ञात सूत्रों पर आधारित हैं। इजरायल की ओर से इस पूरे घटनाक्रम की सभी जानकारियों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

1. 10 अक्टूबर के आसपास हमले की थी तैयारी

Financial Times के अनुसार, इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने ईरान के खिलाफ एक नए सैन्य अभियान की संभावनाओं पर विचार किया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि इजरायली रक्षा बल (IDF) ने कई दिनों तक चलने वाले हवाई हमलों की तैयारी की थी।

इस अभियान के संभावित लक्ष्यों में ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े ठिकाने, सरकारी और सैन्य प्रतिष्ठान तथा बिजली संयंत्र जैसे बुनियादी ढांचे शामिल थे। रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल ने उन लक्ष्यों की एक नई सूची भी तैयार की थी, जिन्हें फरवरी के हमलों में निशाना नहीं बनाया गया था।

हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि प्रस्तावित अभियान में अमेरिकी सेना सीधे शामिल होती या इजरायल अकेले कार्रवाई करता। रिपोर्ट में एक सूत्र ने संकेत दिया कि आने वाले हफ्तों में अमेरिका और इजरायल के संयुक्त अभियान की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।

इसलिए, फिलहाल इसे एक कथित सैन्य योजना के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि ऐसे हमले के रूप में जिसकी तारीख और क्रियान्वयन की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी हो।

2. ट्रंप ने हमले का विरोध क्यों किया?

रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप की सबसे बड़ी चिंता अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान के साथ युद्ध दोबारा शुरू करने को लेकर थी। एक नए सैन्य अभियान से पश्चिम एशिया में संघर्ष और बढ़ सकता था, जिसका असर अमेरिकी राजनीति, अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजारों पर पड़ने की आशंका थी।

ट्रंप ने इससे पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर कहा था कि अमेरिका 3 नवंबर से पहले ईरान पर हमले शुरू नहीं करेगा। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने चुनावों से पहले संघर्ष दोबारा शुरू करने को लेकर हिचकिचाहट दिखाई, जिसके बाद प्रस्तावित इजरायली अभियान फिलहाल रोक दिया गया।

हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि अमेरिका ने हमेशा के लिए सैन्य कार्रवाई का विकल्प छोड़ दिया है। रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि वॉशिंगटन और तेल अवीव के बीच इस मुद्दे पर बातचीत जारी थी और भविष्य की कार्रवाई पर अंतिम निर्णय अनिश्चित बना हुआ था।

3. नेतन्याहू के सामने भी चुनावी चुनौती

Israel पर संभावित हमले का मामला इजरायल की घरेलू राजनीति से भी जुड़ा हुआ है। नेतन्याहू के सामने 27 अक्टूबर को होने वाले इजरायली चुनावों की चुनौती है। ऐसे में अमेरिका और इजरायल, दोनों देशों में चुनाव से पहले सैन्य कार्रवाई को लेकर राजनीतिक और रणनीतिक विचार महत्वपूर्ण हो गए हैं।

13 अक्टूबर की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि नेतन्याहू ने ट्रंप के साथ बातचीत में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता जताई थी और सैन्य अभियान दोबारा शुरू करने की संभावना पर चर्चा की थी।

दूसरी ओर, इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय ने पहले उन आरोपों का खंडन किया था कि नेतन्याहू चुनाव से पहले राजनीतिक कारणों से ईरान के साथ युद्ध दोबारा शुरू करना चाहते हैं। इसलिए हमले के पीछे संभावित राजनीतिक उद्देश्यों को स्थापित तथ्य के बजाय रिपोर्टों में सामने आए आकलन के रूप में देखना चाहिए।

4. ईरान के परमाणु ठिकाने क्यों हैं निशाने पर?

इजरायल और अमेरिका लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता जताते रहे हैं। दोनों देशों की प्रमुख चिंताओं में ईरान की यूरेनियम संवर्धन क्षमता, परमाणु कार्यक्रम से संबंधित सुविधाएं और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम शामिल हैं।

ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। वहीं, अमेरिका चाहता है कि तेहरान अपनी परमाणु गतिविधियों पर कड़ी सीमाएं स्वीकार करे।

अक्टूबर में प्रस्तावित हमले की रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में गतिरोध बना हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी इजरायल का दौरा किया था और वहां नेतन्याहू समेत वरिष्ठ अधिकारियों के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा की थी।

हालांकि, किसी सैन्य कार्रवाई से ईरान की परमाणु क्षमता पर कितना प्रभाव पड़ता, इसका निश्चित आकलन उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं किया जा सकता।

5. क्या ईरान पर दोबारा हमला हो सकता है?

फिलहाल इस सवाल का निश्चित जवाब नहीं है। Financial Times की रिपोर्ट में एक सूत्र ने कहा कि आने वाले हफ्तों में हमले दोबारा शुरू होना पूरी तरह असंभव नहीं है। वहीं, एक अन्य आकलन के मुताबिक, सैन्य तैयारियों का इस्तेमाल ईरान पर बातचीत की मेज पर दबाव बनाने के लिए भी किया जा सकता है।

इस बीच, ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों ने इजरायल को चेतावनी दी है कि किसी भी नए हमले का जवाब दिया जाएगा। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी कहा है कि उनका देश कूटनीतिक समाधान चाहता है, लेकिन अपनी रक्षा करने के लिए तैयार है।

यदि संघर्ष दोबारा शुरू होता है, तो उसका प्रभाव केवल इजरायल और ईरान तक सीमित नहीं रह सकता। खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा, तेल और गैस की आपूर्ति तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी इसका असर पड़ सकता है। हालांकि, इन संभावित प्रभावों की गंभीरता इस बात पर निर्भर करेगी कि संघर्ष किस स्तर तक बढ़ता है।

6. इजरायल की ओर से आई अलग रिपोर्ट क्या कहती है?

इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण विरोधाभास भी सामने आया है। Jerusalem Post ने 21 अक्टूबर को सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट किया कि इजरायली सेना 10 अक्टूबर को ईरान पर हमला करने की स्थिति में नहीं थी और उस तारीख के लिए वैसी औपचारिक सैन्य तैयारी नहीं की गई थी, जैसी किसी बड़े अभियान से पहले होती है।

यह रिपोर्ट Financial Times के दावे से अलग है। ऐसे में यह मान लेना उचित नहीं होगा कि ट्रंप ने निश्चित रूप से एक पूरी तरह तैयार हमले को रोक दिया था। उपलब्ध रिपोर्टों में सैन्य तैयारी की स्थिति और हमले को मंजूरी देने के स्तर को लेकर अंतर है।

अक्टूबर 2026 में ईरान पर संभावित इजरायली हमले को लेकर सामने आई रिपोर्टों ने अमेरिका-इजरायल संबंधों और पश्चिम एशिया की सुरक्षा पर नए सवाल खड़े किए हैं। Financial Times के मुताबिक, नेतन्याहू की सरकार ने बड़े हमले की योजना बनाई थी, लेकिन ट्रंप ने अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले युद्ध दोबारा शुरू करने का विरोध किया।

हालांकि, इजरायल की सैन्य तैयारी को लेकर दूसरी रिपोर्ट में अलग दावा किया गया है। इसलिए पूरे घटनाक्रम को अभी रिपोर्टों में सामने आए दावों के आधार पर ही समझना चाहिए। फिलहाल, कूटनीतिक बातचीत, दोनों देशों की चुनावी परिस्थितियां और ईरान की प्रतिक्रिया यह तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी कि क्षेत्र में तनाव आगे किस दिशा में बढ़ता है।

 

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