नई दिल्ली, 29 मार्च भारतीय जनता पार्टी सरकार निगमों का एकीकरण तो जरुर कर रही है लेकिन
एकीकरण प्रस्ताव में केंद्र सरकार ने इस बात का जिक्र नहीं किया कि हजारों करोड़ घाटे में चल रही निगम की
देनदारी कैसे उतरेगी और निगम को उबारने के लिए कितनी राशि अतिरिक्त दी जायेगी।
इससे तो निगम की
हालत नहीं सुधरने वाली। यह कहना है प्रदेश कांग्रेस के डेलिगेट हाजी गुफरान का।
हाजी गुफरान कहते हैं एकीकरण
से ज्यादा निगम की हालत सुधारने होगी ताकि कई माह से लम्बित कर्मचारियों का वेतन और पेंशन का भुगतान
किया जा सके।
हाजी गुफरान कहते हैं अच्छा तो तब रहता जब केंद्र सरकार इस बिल को संसद में लाने से पहले
सभी राजनैतिक पार्टियों से चर्चा करती लेकिन भाजपा को तो अपनी हार दिख रही थी
इसलिए आनन फानन में
लोकतांत्रिक परम्पराओं को भी ताक पर रख दिया गया। हाजी गुफरान कहते हैं
गृहमंत्री द्वारा निगमों के एकीकरण
का जो बिल लोकसभा में पेश किया गया उसमें भविष्य में फंड की व्यवस्था सुधारने के लिए कोई जिक्र नही है
और न ही भविष्य में कर्मचारियों के हितों को लेकर चौथे व पांचवे वित्त आयोग की सिफारिशें लागू करने का जिक्र
है।
भविष्य में फंड के हालाता कैसे सुधरेंगे इस पर भी कोई समाधान नही दिए गए है।
हाजी गुफरान ने कहा कि
एकीकरण के फैसले से फंड की समस्या बरकरार रहेगी
क्योंकि बिल में कर्मचारियों को समय पर वेतन बकाया
एरियर और भाजपा द्वारा घोषणा की सभी अनुबंधित कर्मचारियां को स्थायी करेगी
इसके लिए फंड कहां से आयेगा
इस पर कोई जिक्र नही है।
जबकि भाजपा और आम आदमी पार्टी के शासन में विकास के कार्य फंड की कमी से
पहले ठप्प पड़े है।

