नई दिल्ली, । दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष आदेश गुप्ता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल से मुलाकात कर उन्हें दिल्ली की समस्याओं से अवगत कराया। दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल से उनके आधिकारिक निवास पर मुलाकात कर एक पत्र सौंप। पत्र में दिल्ली की जनता के सामने खड़ी पांच प्रमुख समस्याओं में हस्तक्षेप करके उनका हल निकालने की मांग रखी।
मुलाकात के बाद आदेश गुप्ता ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि दिल्ली के अंदर 22 हज़ार से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता जिनका दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग में महत्वपूर्ण योगदान हैं, पिछले कई दिनों से अपनी वेतन बढ़ाने की मांग कर रही थी, लेकिन दिल्ली सरकार ने तानाशाही रवैया अपनाते हुए लगभग 1000 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को नौकरी से बर्खास्त कर दिया। उन्होंने कहा कि हमने आज माननीय उपराज्यपाल से मांग की है कि दिल्ली सरकार को एक आदेश जारी कर उन सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को नौकरी पर रखा जाए एवं उनका वेतन भी बढ़ाया जाए। अपना परिवार चलाने के साथ-साथ दिल्ली की महिलाओं की सुरक्षा भी इन्हीं आंगनबाड़ी महिलाओं के हाथों में हैं ऐसे में इनके साथ दोहरा व्यवहार नहीं होना चाहिए।
श्री गुप्ता ने कहा कि गेस्ट टीचर्स को नियमित कर उनका वेतन बढ़ाने के मुद्दे पर उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के बयान को नौटंकी करार देते हुए कहा कि पंजाब चुनाव से पहले उन्होंने नियमित करने की बात कहते रहे, लेकिन हकीकत यह है कि अभी तक एक भी गेस्ट टीचर को नियमित नहीं किया है। उन्होंने कहा कि इस बार के बजट में गेस्ट टीचर्स के बजट भी सिर्फ छह से सात महीनों का रखा गया है। दिल्ली के 12 कॉलेजों के शिक्षकों और गैर शिक्षक कर्मचारियों का पिछले दो सालों से वेतन रोका गया है और आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा लगातार प्रताड़ित किया जा रहा है। कॉलेज के अंदर केजरीवाल सरकार अपने आदमी को रखना चाहती है और कॉलेज द्वारा मना किए जाने के बाद उनकी सज़ा दिल्ली के 12 कॉलेज के शिक्षकों को विकास फंड को रोक कर दिया जा रहा है। श्री गुप्ता ने कहा कि पिछले कई दिनों से दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के लोग केजरीवाल सरकार के आवास के बाहर अपनी मांगों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। उनके समर्थन में हमने आज एक समर्थन पत्र भी दिया है जो ड्यूटा की ओर से दिया गया है।
नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने कहा कि दिल्ली में या तो कन्ट्रैक्ट वर्कर्स हो या फिर वोकेशनल ट्रेनर्स हो, उन्हें दिल्ली में न्यूनत्तम वेतन भी नहीं दिया जा रहा है जबकि केजरीवाल पूरे देश में जा कर कह रहे हैं कि हमने दिल्ली में न्यूनतम वेतन 20 हज़ार रुपये कर दिया है लेकिन हकीकत ये है कि वोकेशनल ट्रेनर्स को 16,000 रुपये और लगभग 1.5 लाख कंट्रैक्ट वर्कर्स हैं उन्हें 10 से 11 हज़ार रुपये दिए जा रहे हैं जिसको लेकर हमने मांग की है कि अगर केजरीवाल सरकार उनका वेतन नहीं बढ़ा सकती तो कम से कम उन्हें न्यूनतम वेतन तो दिया जाए।
रामवीर सिंह बिधूड़ी ने कहा कि किसानों की जमीन केजरीवाल सरकार 17 लाख प्रति एकड़ के हिसाब से ले रही है जबकि केंद्र सरकार फरीदाबाद में 8 करोड़ रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से किसानों की जमीन सड़क बनाने के लिए ले रही है। पिछले 15 सालों से किसानों के जमीन का मुआवजा राशि नहीं बढ़ाई गई है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल का किसानों को मुफ्त बिजली देना, लाल डोरा बढ़ाना एवं कृषि यंत्रों पर सब्सिडी देने का वायदा आज तक पूरा नहीं किया है। इन सभी बातों को आज हमने माननीय उपराज्यपाल के सामने रखी है और उन्होंने अश्वासन दिया है कि इसके बारे में मुख्यमंत्री से बात कर समस्याओं का समाधान किया जाएगा।
पत्र में जिन पांच बिंदुओं में समस्याओं का जिक्र किया गया है, उनमें पहली समस्या राजधानी दिल्ली में 22000 आंगनबाड़ी कर्मचारियों की है। जिन्हें उनके हक का पूरा वेतन नहीं दिया जा रहा है। साथ ही बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी कर्मचारियों को दिल्ली सरकार ने निकाल दिया है। दूसरा बिंदु राजधानी दिल्ली में गेस्ट टीचर्स की समस्या को लेकर है। जिसमे उनका वेतन बढ़ाने और नियमित किए जाने की मांग की गई है। तीसरे, दिल्ली सरकार के अंतर्गत आने वाले 12 कॉलेजों के अंदर कार्यरत शिक्षक और गैर शिक्षक कर्मचारियों का जिक्र किया गया है जो आज भी अपने वेतन को लेकर धरना प्रदर्शन पर बैठे हुए हैं।
चौथे बिंदु में दिल्ली सरकार के शिक्षण संस्थानों में कार्यरत वोकेशनल ट्रेनर्स का जिक्र किया गया है। जिन्हें दिल्ली सरकार के द्वारा 16 हजार हर महीने वेतन के रूप में दिए जा रहे हैं जो काफी कम है, जबकि दूसरे राज्य में 32 हजार वोकेशनल टीचर्स को वेतन के रूप में प्रतिमाह दिए जा रहे हैं। ऐसे में दिल्ली बीजेपी के द्वारा वोकेशनल ट्रेनर्स की सैलरी भी बढ़ाने की मांग की गई है। दिल्ली बीजेपी के द्वारा लिखे गए पत्र में पांचवें और आखिरी बिंदु में कॉन्ट्रेक्ट कर्मचारियों का भी जिक्र किया गया है। जिसमें यह कहा गया है कि दिल्ली के अंदर कार्यरत लगभग डेढ़ लाख कॉन्ट्रेक्ट कर्मचारी ऐसे हैं जो दिल्ली सरकार में काम तो कर रहे हैं। लेकिन उन्हें उनकी योग्यता के अनुसार न्यूनतम वेतन दिल्ली सरकार के द्वारा नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में इन सभी कॉन्ट्रेक्ट वर्कर्स को उनकी योग्यता अनुसार कम से कम न्यूनतम वेतन दिल्ली सरकार के द्वारा जो तय किया गया है, वह जारी किया जाए।

