Delhi 01

नई दिल्ली, 19 अप्रैल  दिल्ली के जहांगीर पुरी में हुई सांप्रदायिक हिंसा पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए
जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने इसे कानून-व्यवस्था की विफलता करार दिया और पूरी
घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की।

मौलाना मदनी ने कहा कि जांच एजेंसियां को ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारी
का निर्वहन करना चाहिए और उन लोगों और समूहों की धरपकड़ की जरूरत है जो भड़काऊ नारे लगाते रहे और
गैर कानूनी तरीके से हथियारों का प्रदर्शन करते रहे।

जहांगीरपुरी में पुलिस प्रशासन की लापरवाही और धार्मिक
जुलूस में शामिल अराजक तत्वों पर काबू पाने में नाकामी निंदनीय है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार मौलाना मदनी के निर्देश पर जमीयत का पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल सुप्रीम कोर्ट के
एडवोकेट मोहम्मद नूरुल्लाह के नेतृत्व में जहांगीरपुरी पहुंचा और प्रभावित मस्जिद के इमाम साहब और सी ब्लॉक

में रहने वाले जिम्मेदार लोगों से मुलाकात करके स्थिति को समझा। प्रतिनिधिमंडल में जमीयत उलमा-ए-हिंद के
मुख्यालय से मौलाना अज़ीमुल्लाह सिद्दीकी क़ासमी, मौलाना ग़य्यूर अहमद क़ासमी, क़ारी सईद अहमद और हाई
कोर्ट के एडवोकेट अब्दुल गफ्फार शामिल रहे।

प्रतिनिधिमंडल ने मस्जिद के इमाम मौलाना शाहिद उस्मानी,
स्थानीय नागरिकों -खलील अहमद, शेख अब्दुल कादिर, मोहम्मद जहांगीर, मौलाना रमजान से विस्तृत जानकारी
ली। इन लोगों ने बताया कि शाम छह बजे से पहले दो बार मस्जिद के सामने भीड़ आई।

जिम्मेदारों के कहने पर उनका रूट बदल दिया गया। जब शाम में छह बजे तीसरी बार धार्मिक जुलूस हुसैन चौक
होते हुए यहां पहुंचा तो ज्यादा उग्र हो गया। इसमें शामिल असमाजिक तत्वों ने मुसलमानों के ख़िलाफ नारे लगाए।

विशेषकर ‘‘देश में रहना होगा, जय श्रीराम कहना होगा’’।

लोगों ने हाथ जोड़कर उनको यहां से जाने के लिए कहा
तो और अड़ गए और तलवार निकाल लिया जिसके बाद दोनों तरफ से पथराव हुआ।

बाद में पुलिस आ गई और
दोनों पक्षों की भीड़ के बीच में खड़ी हो गई। स्थानीय लोगों से जब पूछा गया कि क्या भीड़ मस्जिद में झंडा
लगाना चाह रही थी तो उन्होंने कहा कि कुछ लोग मस्जिद के गेट पर झंडा लगाने की कोशिश कर रहे थे लेकिन
वह असफल रहे।